साल चौदह के इंतजार देश वइसहीं करत बा जइसे कबो चौदह साल का बनवास का बाद लवटत राम ला कइले होखी. एह बीच हर राजनीतिक गोल, हर गोलबंदी में एह बात ला खींच तान जारी बा कि के बनी अगिला प्रधानमंत्री. यूपीए गोलबंदी में तिसरका नंबर के नेता प्रधानमंत्री पद पर बइठी जब कि एनडीए गोलबंदी के पहिलका नंबर के. स्वाभाविक बा कि तिसरका नंबर वाला से अधिका जूतमपैजार पहिलका नंबर वाला खातिर होखी आ होखतो बा.

भोजपुरिया इलाका के एगो फगुआ में गावल जाला कि “बुढ़वा के घर से निकाल द सईंया हो.” काहें कि बुढ़वा के आदत खराब हो गइल बा आ उ बेर बेर “अगिया बहाने बुढ़वा घुसेला चुहनिया” आ एही दौरान रहि रहि के मटकीओ मारत रहेला. रउरा सभे जानत बानी कि एहिजा बुढ़वा से मतलब केकरा से बा. एनडीए गोल का तरफ से प्रधानमंत्री बने के सपना बुढ़ऊ से छूटइलो छूटत नइखे आ एह चलते ऊ खेल बिगाड़े पर लागल बाड़ें. हर कोशिश करत बाड़ें कि भाजपा नरेन्द्र मोदी के आपन नेता मत घोषित करो. कबो उनका के संसदीय बोर्ड में शामिल करे के विरोध होखत बा त कबो चुनाव समिति के संयोजक बनवला के. कबो कहे लागत बाड़न कि मोदी कइलन का? पहिलहीं से आगा रहल एगो राज्य के अउरी आगा ले गइलें जबकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह एगो बीमारू राज्य के विकसित राज्य बनावे में लागल बाड़े आ एह तरह उनकर महत्व मोदी से अधिका होखे के चाहीं. एहिजा ई लिखला क मतलब ई नइखे कि शिवराज सिंह के महत्व नइखे. शिवराज सिंह के महत्व बा, होखहुं के चाहीं बाकिर नरेन्द्र मोदी जवना तरह देश भर के नवहियन के उछाह में ले आइल बाड़ें तवना के मुकाबिला ना कइल जा सके. आ एह बात का पीछे ई बात कतहीं नइखे कि पहिला बेर एगो अति पिछड़ा जाति के कवनो नेता देश के प्रधानमंत्री पद पर बइठे के सबले तगड़ा दावेदार बन के उभरल बा. पहिला बेर कवनो तेली जाति के आदमी में देश के प्रधानमंत्री के अक्स देखल जात बा आ सबले खास बाति ई बा कि ई सपना देखे वालन में अगड़ी जाति कहाए वालन के गिनिती भरपूर बा. नरेन्द्र मोदी के लहर में जातिवाद खोजले ना भेंटाई बाकिर अगर कहीं उनुका के नेता पद से वंचित करे के कुचेष्टा भइल त हिंदू समाज के पिछड़ा समूह हमेशा ला बिदक सकेला. हिंदुत्व के अलमबरदार लोग के एह बात पर धेयान देबे के पड़ी. कहीं पिछड़ा समाज ई मत मान बइठे कि मोदी का खिलाफ सिंह के एहीला आगा बढ़ावे के कोशिश होखत बा. मोदी का बदले गडकरी के चुनाव समिति के संयोजक बनावे के बात होखत बा. भाजपा का सोझा कवनो दोसर राह नइखे. या त ओकरा मोदी के आपन नेता बनावे के होखी ना त देश के नेता देबे के सपना हमेशा ला छोड़े के पड़ी. उमेद कइल जाव कि गोवा में होखे जात कार्यकारिणी का बइठका में एह बाति के नजर से अलोप ना होखे दिहल जाई.

अब आईं एह एक नंबर के लड़ाई का बाद तीन नंबर के लड़ाई पर. यूपीए के बड़का दल कांग्रेस के नंबर वन नेता सोनिया का अलावे केहु दोसर ना हो सके. खुद सोनिया अपने बेटा राहुलो के एह पद पर ना देख सकस. आन्हर धृतराष्ट्र का तरह जे अपना बेटा सुयोधन के, अलग बाति बा कि दुनिया ओकरा के दुर्योधन का नाम से अधिका जानेले, राज गद्दी ना देके युवराजे बना के रखलन. दुसरा नंबर पर राहुल के जगहा सुरक्षित बा. एह जगहा पर आए के सपना कवनो कांग्रेसी ना देख सके. अब रहल बात तिसरा नंबर के नेता के त अबहीं एह नंबर पर मनमोहन सिहं बइठल बाड़न. बाकिर नौ साल का शासन में जवन घपला घोटाला भइल, यूपीए वाला जतना माल कटलें ओकर भगतान मनमोहन सिहं के माने सम्मान से करे के पड़ी. समय आ गइल बा जब कांग्रेस अपना फायदा ला उनकर बलि दे दी. स्वाभाविक बा कि एकरा बाद ई बहुत खास हो जाई कि कांग्रेस में तिसरका नंबर के नेता के बा. जे रही ओकरे मौका मिली प्रधानमंत्री के गद्दी पर बइठे के. काहें कि सगरी कांग्रेसी ई जान गइल बाड़ें कि राहुल पीएम बनल नइखन चाहत आ अपना महतारी का तरह बिना कवनो बात के जिम्मेदारी लिहले हर बात के मजा लूटल चाहत बाड़ें. एकर तुलना एही से कइल जा सकेला कि दूध पिए के लालसा भरपूर बा बाकिर खटाल नइखे डाले के, लगहर नइखे पोसे के. खैर, राहुल के मति राहुल जानसु. एहिजा त बात कांग्रेसियन के होखत बा. त तिसरका जगहा पर आवे के सपना देखत बंगाली बाबू राष्ट्रपति भवन चहूंप गइलन, पी चिदम्बरम के सपना सपने रहि जाए वाला बा काहे कि उनुका के कबो साम्यवादी भा समाजवादी चश्मा बरदाश्त ना कर पाई. हालांकि कुछ दिन उनुको नाम खुब पिचपिचाइल रहुवे. अब एह जगहा के सबले बड़ दावेदार बन के उभरल बाड़न एंटोनी. सीधा सादा इमानदार आदमी ठीक मनमोहन सिंह जइसन आ उनुके लेखा बिना काम के, माटी के माधो जस. आ सबले बड़ बाति ई कि मनमोहने सिंह का तरह गैर हिंदू!

समय के पहिया तेजी से घूमत बा. देखत रहीं. बाकिर अबकी देश चूकल त फेर ढेर दिन ले सम्हरे के मौका ना मिली.
– ओमप्रकाश सिंह
(संपादक, अंजोरिया समूह)

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