आजु एगो खबर पढ़े के मिलल कि बिहार भोजपुरी अकादमी मालिनी अवस्थी के आपन ब्रांड अम्बेसडर बनवले बिया आ अब मालिनी जी देश विदेश में भोजपुरी के प्रचार प्रसार करीहें. बुध का दिने अखबार वालन के ई जानकारी देत अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ रविकांत दुबे कहले बाड़न कि भोजपुरी भाषा संस्कृति पर होखत सांस्कृतिक प्रदूषण के हमला का खिलाफ अकादमी लगातार लड़त आइल बिया. पिछला दिने अकादमी का तरफ से सात चरण में जनजागरण अभियान चलावल गइल आ अब एही दिसाईं मालिनी अवस्थी के तीन साल खातिर अकादमी के अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक राजदूत बनावल गइल बा.

उनकर कहना बा कि मालिनी अवस्थी अपना आचार विचार संस्कार आ पहिरावा से भोजपुरी समाज के संस्कारी महिला के छवि पेश करेली. अपना पारंपरिक गीत आ संवाद से उ जवन संदेश दीहें ओकर बड़हन असर एहिजे ना सगरी देश आ विदेशो में पड़ी.

अकादमी के एह फैसला पर आजु सबेरे छपरा से कृष्ण कुमार वैष्णवी के फोन अउवे जे बहुते उग्र रहलन एह फैसला के खिलाफ. कहलन कि का सगरी भोजपुरिया समाज से कवनो दोसर अइसन आदमी भा महिला ना मिलल जेकरा के बिहार भोजपुरी अकादमी आपन सांस्कृतिक राजदूत बना पाइत.

एह संदर्भ में आजु हमरा भोजपुरी के लड़ाई लड़े वाला एगो बड़का लड़ाका के कमी बहुते अखरत बा. एह घरी उ निष्क्रिय पड़ गइल बाड़न आ भोजपुरी आंदोलन बेपेंदी के लोटा हो गइल बा. कवनो समाज भा देश में सक्रिय लोगन के कम से दू गो ध्रुव होखल जरूरी होला बाकिर दुर्भाग्य से आजु भोजपुरी समाज में दू गो के कहो एकहू ध्रुव नइखे बाचल. सभे मदमस्त बा कि कुछउ कर ल कहीं से केहू कुछ बोले वाला नइखे. हम तोहरा हँ में हँ मिलाईं तू हमरा में मिलावत रहीहऽ. जेकरा जवन मन में आवे निफिकिर होके कर लेव. कहीं से कवनो आवाज ना उठी. दुर्भाग्य से अँजोरिया शुरूए से एह विचार के रहल कि हमार काम भोजपुरी के काम करे में लागल हर आदमी के बड़ाई करे वाला होखी आ हम केहू के आलोचना ना करब. एकरा पीछे सबले बड़का कारण रहुवे कि निंदक वाला काम करे खातिर एगो ध्रुव रहुवे. ओह आदमी के चाहे केहू कतनो शिकायत कर लेव बाकिर एक बात ला उनकर शिकायत ना कइल जा सके कि उ भोजपुरी के हित ना चाहत रहलें. खैर, अब ओह कमीओ के दूर करे के कोशिश करी अँजोरिया आ अब भोजपुरी के गलत सलत बातो पर आवाज उठावल करी अँजोरिया. हमार केहू से निजी दुश्मनी नइखे त केहू से बहुत सटलो नइखीं हम. हमार मकसद बा सिर्फ भोजपुरी के बात कइल आ भोजपुरी में कइल.

एक बात के आलोचना बहुत सिमसिमाहे तरीका से बाकिर हम पहिलहू से करत आइल बानी. भोजपुरी में कवनो काम छोटहन ना होले. जवन कुछ होला अंतर्राष्ट्रीय भा विश्व भर का पैमाना पर. भोजपुरी के कवनो कलाकार सुपरस्टार से कम ना होले आ कवनो फिलिम सुपरहिट से कम ना होखे. बाँगे के आदत पड़ गइल बा हमनी के. भोजपुरी से जुड़ल अधिकतर सभा समारोह गीतगवनई आ नाच के सांस्कृतिक आयोजन से सिमटा के रह गइल बा. भोजपुरी में गैर मंचीय साहित्यकारन के, बिना हल्ला मचवेल काम करे वालन के कवनो गिनिती नइखे. का हम जान सकीलें कि बिहार भोजपुरी अकादमी पिछला तीन साल में कवन कवन साहित्यिक आयोजन कइले बिया, कवन कवन किताब प्रकाशित कइले बिया आ ओह किताबन के कतना प्रति बेच लिहले बिया भलही पुस्तकालयन खातिर होखे वाला सरकारी खरीदे से? अकादमी के लक्ष्य का बा, साहित्य के अकादमिक गतिविधि बढ़ावल कि गीत गवनई आ नाच के अंतर्राष्ट्रीय आयोजन कइल.

दुर्भाग्य से भोजपुरी में महेन्दर मिसिर के परंपरा आजुओ ले जियत बा. मिसिर जी महान रहनी बाकिर उहाँ के बहुते काम महानता से बहुते दूर के होखत रहुवे. बाकिर महेन्दर मिसिर के परंपरा जियावे राखे वाला लोग डु्प्लीकेट माल भर रह गइल बा, कतहीं कवनो कोना से महानता के दर्शन दुर्लभ बा ओह लोग में. सभे लागल बा भोजपुरी के धंधा में. हमहू लागले बानी. अलग बात बा कि कुछ लोग कह सकेला कि सियरा रंग बदलले बा बाकिर ह उहे!

– संपादक, अँजोरिया समूह

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