आजुकाल्ह हम बहुते फिकिरमन्द बानी. अँजोरिया चलावत युग बीत गइल बाकिर हम बाकी लोग जइसन ना बन सकनी.

ना त हमार कवनो गुट बनल, ना हम कवनो गुट में शामिल भइनी. से ना त तीन में ना तेरह में वाला हाल हो गइल. एगो कहाउत ह कि नव कन्नौजिया, तेरह चुल्हा. बहुत कुछ वइसने हाल बा भोजुपरिया प्रकाशन के. कहे खातिर त कहाला कि दुनिया भर में पसरल भोजपुरियन के तादाद नांहिओ त तीस करोड़ बावे. बाकिर अतना बड़हन भाषा परिवार होखला का बावजूद कवनो अइसन पत्रिका, अखबार के त बाते छोड़ दीं, नइखे जवना के गाहक संख्या एक हजार के होखे. वेबसाइट त अबहिंयो दस बीस गो बाड़ी सँ बाकिर कवनो पर एक लाख के हिट ना हो पावे. अइसना में भोजपुरियन के कवनो खास महत्ता ना देखे बाकी लोग.

एगो अउर बात कहीं त कह सकीलें कि भोजपुरी अगर जियत बिया त गीत-गवनई का रुप में. भोजपुरी सिनेमा के हाल त पहिलहीं खराब होखे लागल रहुवे, रहल-सहल कसर कोविड पूरा कर दिहलसि. आ आजुकाल्हु भोजपुरी सिनेमा के के कहो जब बॉलीवुड सिनेमा के अपनहीं उलुटा साँस चलत बावे. अधिकतर वेबसाइट भोजपुरी सिनेमे का सहारे चलत रहुवे. कुछ लोग खबर का सहारे, एहमें हमहूं शामिल रहनी, रोज-रोज कवनो ना कवनो पोस्ट डाल के रोज के कोटा पूरावत रहुवे.

खबर के दुनिया अब बहुते खतरनाक हो गइल बा. अपना मन के बात कहे से पहिले सौ दफा सोचे के पड़त बा. हर कोई जुबैर त ना हवे जेकरा के पूरा आजादी दे दीही सुप्रीम कोर्ट. दोसरा तरह के लोग पर त अदालत अइसन अइसन बकचोदी कर दी कि कुछ कहते ना बनी. आ अगर ओह पर सोशल मीडिया कुछ कहे लागी त महामहिम लोगन के प्रवचन शुरु हो जाई. अवमानना के धमकी त आम बाति बा. महामहिम त कहिए दिहलन कि मीडिया सम्हर के चले के आदत डाल लेव, एकरा पहिले कहीं बाहर के दखलअंदाजी ना शुरु हो जाव. महामहिम लोग के त अतना फिकिर बा कि देश के विपक्ष कमजोर होखल जा रहल बा. माने इहो उनुका जबाबदेही में शामिल बा कि सरकार के विपक्ष बरियार बनो, बरियार बनल रहो.

त अब अगर रउरा सोचीं कि रोजे कुछ ना कुछ पर आपन एगो पोस्ट डालल करीं त कवन राह बा ? इमरजेन्सी वाला जमाना के स्टाइल अपनाईं त या त ब्लैंक पोस्ट डालीं बाकिर वेबसाइटन पर ब्लैंक पोस्ट डलला के कवनो मतलब नी रहि जाव.

त बाच गइल साहित्य. अब एकरो पर कुछ विचारल जाव. भोजपुरी के खासियत रहल बा कि ई मुँहामुँही के भाषा का रुप में बढ़ल बा. भोजपुरी बोलल-लिखल त बहुते सहज होला बाकिर भोजपुरी पढ़ल बहुते कठिन होला ओह लोगन ला जिनका एकर आदत नइखे. एगो रास्ता हो सकेला कि ऑडियो किताब भा पत्रिका निकालल जाव. वेबसाइटन पर पोस्ट के ऑडियओ जोड़ल जाव. बाकिर तब वेबसाइटन के भार अधिका होखे लागी आ अधिकतर प्रकाशक ओकर बोझा ना उठा सकसु.

बोझा त अब हमरो से नइखे उठ पावत. बीमारी का चलते अपना अध्यवसाय से अलगा भइला का बाद से आर्थिक अवलम्ब नइखे रहि गइल. इलाज आ देखरेख के खरचा उपर से. इलाज आ देखरेख त परिवार हँसी-खुशी सम्हार लिहले बावे बाकिर अब ओकरा पर अपना भोजपुरी प्रेमो के बोझा डालल न्याय संगत ना कहल जा सके. बीच में रउरा सभे से निहोरो कइनी कि अगर संभव हो सके त अँजोरिया के कुछ आर्थिक सहायता कर दीं. एह ला कवनो हजार लाख के उमेद नइखे, दू-चारो-पाँच सौ के मदद बहुते बड़हन होखी. बाकिर देखनी कि केहू का कान पर कुछ रेंगल ना. त निहोरा हटा दिहनी कि अन्हरा का आगे रोवला से आपन दीदा खोवला से अधिका कुछ भेंटावे वाला नइखे.

एने त लिखनिहारो लोग मुँह मोड़ लिहले बा. अगर लिखनिहारो लोग कुछ ना कुछ लिख के भेजत रहो त ओकरो से अँजोरिया के साहित्य भंडार बढ़ सकेला. अगर रउरा सभे में से कुछ लोग आपन लिखलका अँजोरिया पर डालल चाहो त ओकरो इंतजाम कइल जा सकेला. ओह हालत में रउरा सीधे आपन लिखल अँजोर कर पाएम आ संपादक का लगे भेजला के जरुरत ना रहि जाई. बाकिर ओकरा ला कम से कम दू गो रचना अँजोरिया पर पहिले से होखल जरुरी रही.

बाकिर लिखला के का पूछीं जब लोग एक भा दू लाइन मे आपन बात टिपलो से गुरेज करत बा. कमेंटना लिखला के त लोग किरिआ खा लिहले बा. अगर गलत कहत बानी त आजु एही लेख पर आपन कमेंट टीप के देखीं. अगिला दिने ऊ जरुर नजर आई. काहे कि अनर्गल टीपन से बचलो ओतने जरुरी बा. अगर राउर संपर्क के जानकारी सही-सही रजिस्टर कइल गइल बा त रउरा टीपनी के आजाद क दीहल जाई आ टीपते ऊ अँजोर हो जाई.

By Editor

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