घात मीत के, बात प्रीत के,
खेल कहानी हार जीत के,
सबका के बतलाईं कइसे?
गीत नया हम गाईं कइसे?

दोसरा के का बाति चलाईं
अनकर के का दोष देखाईं
अपने हार सुनाईं कइसे ?
गीत नया हम गाईं कइसे ?

अपने चिन्ता, अपने फिकिरे
कोल्हू के सभ बैल बनल बा.
आपन बोझ उतारीं कइसे ?
गीत नया हम गाईं कइसे ?

एने देखनी, ओने देखनी,
घर बाहर के कोना देखनी.
सबके बावे ओरहन हमसे ?
गीत नया हम गाईं कइसे ?

कहीं मिलल ना केहू साथी
चलनी हर दम राह अकेले
मन के पीर देखाईं केहसे ?
गीत नया हम गाईं कइसे ?


– ओमप्रकाश

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