रामजन्मभूमि पर बनावल बाबरी मस्जिद के लेके जतना विवाद जतना दिन से चल रहल बा तवना के समाधान २४ सितम्बर के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसला से हो जाई. अगर केहू ई सोचत होखे त ओकरा से सोझबउक खोजल मुश्किल होखी.

अदालत के फैसला जतना समाधान निकाली ओकरा से बेसी सवाल पैदा कर जाई काहे कि एह मामिला में दुनु पक्ष एके राय के बा कि बतिया पंचे के रही खूंटवा रहिये पे रही. केहू एह में सही बाति माने के तइयार नइखे. सवाल आस्था के बना दिहल गइल बा जवना में कानून के कवनो बिसात ना बिछावल जा सके. कानून बस अतने फैसला दे सकेला कि ओह जमीन के मौजूदा मलिकान केकरा लगे बा. ना एह से कम ना एह से बेसी. बाकिर अतनो बतावल अतना आसान नइखे. हम ई सगरी बाति आजु एह से लिख रहल बानी कि हमरा बात के अदालत के निर्णय पर टिप्पणी मत समुझल जाव आ दोसरे आजु के कहल कवनो बात से अदालत के काम काज में दखलन्दाजीओ ना कहल जा सके, काहे कि फैसला लिखल जा चुकल बा, बस ओकरा के सुनावल बाकी बा.

पूरा दुनिया में एकहू हिन्दू देश नइखे. एगो रहुवे नेपाल तवनो के सेकूलर देश बना दिहल गइल बा. बाकिर दुनिया में सैकड़ौ ईसाई भा मुस्लिम देश बाड़ी सँ. जानत बानी काहे ? एहसे कि हिन्दू अपना सुभावे से सेकूलर होले. उनका मानस में, उनका संस्कार में सर्वधर्म समभाव रचल बसल बा. हिन्दुस्तान में जे भी आइल ओकरा के पूरा आजादी रहल अपना मजहब अपना रिलीजन के माने के काहे कि हिन्दुस्तान कवनो रिलीजन में विश्वास ना करे ओकर विश्वास धर्म में बा जवन कि हमेशा शाश्वत होला. जवन कवनो संप्रदाय, भा खास पूजा पद्धति से जुड़ल नइखे. हिन्दू कहाये खातिर ना त जन्म के दरकार बा, ना कवनो कर्मकाण्ड के. अगर रउरा अपना के हिन्दू कहत बानी त उहे पर्याप्त बा. हिन्दू कवनो मजहब, संप्रदाय, भा रिलीजन ना ह, बलुक एगो जीवन पद्धति ह.

अब एह पृष्ठभूमि में आईं रामजन्म भूमि के बात कइल जाव. का ई सही बात नइखे कि हिन्दूस्तान के बहुसंख्यक समुदाय ओह जमीन पर रामजन्मभूमि के अस्तित्व मानेला ? का ई सही बात नइखे कि मन्दिर मस्जिद गिरजाघर कतनो आ कतही हो सकेला बाकिर जेरुसलम, मक्का, अयोध्या हर जगह ना हो सके ? का हो जाई अगर ओह विवादित जगहा पर मस्जिद होखे के बनावे के दावा छोड़ दिहल जाव ? हम त इहे मानीले कि अगर मुस्लिम समुदाय एकमत से, भा बहुमत से ओह जगहा पर से आपन सही भा गलत दावा हटा लेसु त देश के साम्प्रदायिक सौहार्द में खुशनुमा बदलाव आ जाई. तब हिन्दू मुसलमान के बीच के एगो बड़हन खाई पाटे में सहूलियत हो जाई. ना त लड़त रही अपना दावा खातिर, बहावत रही खून, कुछुओ नइखे बदले वाला. दुश्मन के खतम करे वाला हर कोशिश नाकाम रहेला जबले दुश्मनी खतम करे के अभिलाषा ना होखे. दुश्मनी खतम कर दीं त दुश्मन त अपने आप खतम हो जइहें.

का एह देश में अतनो राजनीतिक सूझबूझ नइखे कि एह समस्या के समाधान कानून के दुआरे गइले बिना सलटअवल जा सके ? का हर बलिदान हिन्दूवने से मांगल जाई ? देश के बँटवारा मजहब का आधार पर भइल रहे. मुसलमान अपना खातिर पाकिस्तान माँग लिहले आ बहुतेरे लोग पाकिस्तान चलियो गइल. ओहिजा रहे वाला हिन्दू अपना मर्जी से हिन्दूस्तान ना आवल चाहत रहले त ओह लोग के जबरिया भगावल गइल. जनसंख्या के एह बदलैन का दौरान लाखो लोग के जान चल गइल. लाखो लोग आपन सब कुछ गँवा दिहले.

गर्व के बात बा कि ओह बँटवारा का बादो हिन्दूस्तान मजहबी मुल्क ना बनल आ सम्प्रदायनिरपेक्षता का अपना सुभाव पर अटल रहल गइल. दुर्भाग्य के बात त ई रहल कि कांग्रेस अपना राजनीतिक फायदा खातिर देश के दीर्घकालीन हित के नुकसान चहुँपा दिहलसि. मुसलमानन के त कवनो फायदा ना दिहलसि सिवाय ओह लोग में एगो डर बइठावे के कि अगर ऊ कांग्रेस का साथे ना रहीहें त देश के बहुसंख्यक हिन्दुवन से उनका खतरा बा. ना त साठ साल का इतिहास में बहुते कुछ बदलल जा सकत रहे. मुसलमान समुदाय आज जवना मजबूरी के, उपेक्षा के जिनिगी जी रहल बा तवन ना जियत रहित आ ओकर देश के मुख्य धारा में विलय हो गइल रहित. अगर राजनीतिक फायदा के बात ना रहित त एह देश के राजनीतिक दल आजु अयोध्या के समाधान बहुते सहजता से निकाल लिहले रहते. बाकिर सगरी “सेकूलर” पार्टी जान बाड़ी स कि जवना दिने हिन्दू मुसलमान का बीचे एकता हो जाई ओहि दिन ओह लोग के अस्तित्व पर खतरा आ जाई.

काल्हु आवे वाला अदालती फैसला के अतना बड़ हउव्वा खड़ा कर दिहल गइल बा कि सगरी देश दहशत में समय काट रहल बा. बेर बेर केन्द्र सरकार के अपील एह आग के बुताये नइखे देत बलुक अउरी सुनगा देत बा. सबका मन में कवनो अप्रत्याशित अनहोनी के अनेसा बन गइल बा. जबकि बेसी उमेद एही बात के बा कि काल्हु सब कुछ शान्ति से गुजर जाई. एकाध जगहा छिटपुट घटना हो जाव त अलगा बाति बा. देश के आम जनता अपना समुझदारी के उदाहरण कई बेर दे चुकल बिया अबकियो दे के देखा दीहि.

एही आसविश्वास का साथे,
राउर
संपादक, अँजोरिया

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