आजु अँजोरिया के सफर के सात साल पूरा हो गइल आ एह मौका पर अँजोरिया अपना हर पाठक पाठिका, शुभचिन्तक, मित्र, अमित्र के अभिवादन करत बिया. रउरा लोग का सहयोग से ई सात साल कब आ कइसे गुजर गइल पते ना चलल.

नयका पाठक लोग के शायद ई बात पता ना होई कि अँजोरिया भोजपुरी में पहिलका वेबसाइट हिय. एकर शुरुआत जब भइल रहे तब दू तीन गो साइट अंगरेजी में भोजपुरी पर जरुर रहे बाकिर फान्ट का लफड़ा का चलते केहू भोजपुरी में साइट चलावे के ना सोचले रहे. अँजोरिया ओह दौर से गुजरल फेर जब यूटीएफ फान्ट सुलभ हो गइल तब एकरा के अपनावे में तनिको देरी ना लगावल गइल. अब त पूरा दुनिया का हर कम्प्यूटर पर देवनागरी भा दुनिया के हर भाषा में साइट उपलब्ध बा बाकिर पहिलका होखे के उल्लास आ अनुभूति कुछ दोसरे होखेला.

अँजोरिया के दोसरका शुरुआती दिक्कत झेले के पड़ल नाम का चलते. भोजपुरी भा ओहसे मिलत जुलत नाम खोजल छोड़ हम एगो साहित्यिक नाम चुन लिहनी. बस एहिजे मार खा गइल अँजोरिया! एकरा लगे ना त तकनीकि ज्ञान रहे, ना कवनो समूह, ना मार्केटिंग के जानकारी. कबो केहू कवनो पुरस्कारो से ना नवाजल अँजोरिया के! वइसहूँ भोजपुरी में दोसरका के पुरस्कार बड़ा बेमने से दिहल जाला. अँजोरिया के आत्म संतोष अतने बा कि एकरा पुरस्कार के साधो ना रहल. हँ एक बात के अरमान जरुर रहल कि भोजपुरी खातिर काम करे वाला लोग एकरा के एगो पहचान जरुर देव, एकरा के आपने समुझो.

आशा बा कि भोजपुरिया समाज अँजोरिया के आपन प्यार दुलार देबे से वंचित ना राखी. आजु एही का साथे हम फेर रउरा सभ के अभिवादन करत बानी. एह मौका पर मशहूर भोजपुरी कवि मोती बी॰ए॰ के कविता उद्धरित करे से अपना के रोक नइखीं पावत…

अँजोरिया

मोती बी॰ए॰

जइसन अँजोरिया तोहार हे भइया
ओइसने अँजोरिया हमार ह….

झारल बहारल टिकुर आ चीकन
चन्नन छिरिकला से लागत बा नीमन
पूजा के चउका नियर बलिवेदी
आहुति से मँहके दुआरे ले आँगन.

जवन अँजोरिया तोहार हो भइया
ऊहे अँजोरिया हमार ह…
बड़हन तपेसवा से ई दिन भेंटाइल
नगर नगर गाँव गाँव नेवता दियाइल
सोहर आ झूमर आ कजरी गवाइल
आजु फेनु पोथी पुरनका खोलाइल
जवनि अछरिया तोहार हो भइया
ऊहे अछरिया हमार ह…

ईहे अछरिया नूं बरम्हा कहाला
सबके करमवा विधान बनि जाला
एक एक जिउवा के लागे ठेकाना
ई बाति कहला से कबो ना ओराला
जवन मँजिलिया तोहार हो भइया
ऊहे मँजिलिया हमार ह…

मिली जुलि अन्हरिया के होली जरवलीं
क्रान्ति के लुकारी सरेहे घुमवलीं
खून आ पसीना से लोना बनवली.
ओकरा प आँसू के दीया सजवलीं
जवन ललसवा तोहार हो भइया
ऊहे ललसवा हमार ह…

सब जाने हिलिमिल के घर ई उठवलीं
नइया के खेके किनारे लगवलीं
आदिकाल से हम चलत चलि अइलीं
पोसनी सपनवा आ धूनि रमवलीं
जइसन सपनवा तोहार हो भइया
ओइसने सपनवा हमार ह..

जइसन अँजोरिया तोहार हे भइया
ओइसने अँजोरिया हमार ह….

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