आजुकाल्हु राष्ट्रपति के उम्मीदवार चुने में भाजपा के जवन फजीहत होखत बा ओहसे लागत बा कि ओकरा आपन प्राथमिकता तय करे के समय आ गइल बा. का चाहीं ओकरा, एन केन प्रकारेण सत्ता में चहुँपे के जोगाड़ आ कि अपना तय लक्ष्य के प्राप्ति?

राम मन्दिर आन्दोलन का बाद बनल एनडीए सरकार में भाजपा आपन सब कुछ गँवा दिहलसि. सरकार में बनल रहे खातिर हर तरह के समझौता कइलसि आ परिणाम सभका सामने बा. एनडीए के हालात आजुओ उहे बा. एह गठबन्हन में शामिल हर दल, भाजपा छोड़ के, अपना नीति पर कायम बा आ ओकनी के सटवले राखे खातिर भाजपा सगरी अंगुरियावल महटिया के बरदाश्त कइले जात बिया. कवना फायदा खातिर कवना सोच में?

राष्ट्रपति का चुनाव में लड़े के बा त आपन मजगर उम्मीदवार देव ना त मैदान छोड़ देव. एह मजगर उम्मीदवारन में या त शरद यादव के उम्मीदवार बने खातिर तइयार करावे भा खुद लालकृष्ण आडवाणी के आपन उम्मीदवार घोषित करे. शरद यादव बनीहें ना काहे कि ऊ हारल बाजी पर दाँव चढ़े ला तइयार ना होखीहें. बाकिर लालकृष्ण आडवाणी के उम्मीदवार बनवला से बहुते कुछ संदेश जनता आ अपना सहयोगियन के दे सकेले भाजपा. आडवाणी के राष्ट्रपति चुनाव लड़वा के भाजपा देखा दी कि ऊ एह लड़ाई के मजाक नइखे बने दिहल चाहत आ अपना पूरा ताकत से लड़े के इरादा राखत बिया. हो सकेला कि ओह सूरत मे एनडीए के बाकी दलो पूरा मन से उनुका पक्ष में खड़ा हो जासु. अगर ना खड़ा भइलें त मान लेबे के चाहीं भाजपा के ई संहतिया ना हउवें बलुक संगे रहि के घात करे वाला हउवें. तब अइसनका लोग से दूरी बनाइए लिहला में भलाई होखी भाजपा के.

अगर आडवाणी के एह पर आपत्ति होखे त उनुका के समुझावल जा सकेला कि देश के कवनो कानून राष्ट्रपति के चुनाव लड़े वाला के बाद में सांसद भा प्रधानमंत्री बने से ना रोके. अबहीं राष्ट्रपति के चुनाव फरियावे के बा संसद के चुनाव दू साल बाद देखल जाई.

आजु का राजनीति में देश के सबले बडका समुदाय के पक्षधर केहू नइखे. इहाँले कि ओह समुदाए में विभीषण आ जयचन्दन के भरमार हो गइल बा. आपन राज बचावे खातिर हमलावर के आपन बेटी सँउपे वाला राजा ना रहतें त का देश अतना दिन ले गुलाम रहल रहीत? जे लड़ाई से भागत रहेला ऊ बाद में लड़े लायक ना रहि जाव. भाजपा के हालत इहे हो गइल बा. हमेशा मिमिंयात आ दोसरा के बात मान लेबे वाला के सम्मान केहू कइसे करी?

टटका बात बा नीतीश कुमार के बयान जेहमें ऊ कहले बाड़न कि भाजपा के चाहीं कि आपन प्रधानमंत्री के उम्मीदवार तय कर लेव जेहसे सहयोगी फैसला कर सकसु कि उनुका का करे के बा. नीतीश अपना हिसाब से बिल्कुल सही कहले बाड़न बाकिर का भाजपा में अतना बेंवत रहि गइल बा कि ऊ अपना हिसाब से सही बात कहि सको ? हम ना त भाजपा के सदस्य हईं ना कवनो अधिकारी बाकिर भाजपा के शुभचिन्तक अपना के जरूर मानीलें काहें कि देश में अकेला भाजपे बिया जे कांग्रेस के गलत नीतियन के मुकाबला कर सकेले आ देश के बड़हन जमात के हित के रक्षा कर सकेले अगर करे के चाहे. बार बार नरेन्द्र मोदी के खिलाफ होखे वाला बयान बाजी के विरोध कइल ओतने जरूरी बा. साबित हो चुकल बा कि गुजरात दंगा में नरेन्द्र मोदी के कवनो हाथ ना रहे. हँ ओह दंगा के समय पर काबू कर लेबे के सम्मान उनुका के जरूर दिहल जा सकेला. बाकिर ओही नरेन्द्र मोदी के देश के सेकुलर जमात बार बार गरियावत रहेले आ भाजपा चुपचाप सुनत रहि जाले. भाजपा के ई मान लेबे के चाहीं कि देश के कल्याण सेकुलरिज्म से नइखे होखे वाला सर्व धर्म समभाव से होखे वाला बा. जहवाँ कवनो धर्म भा मजहब के ना त बेजा बढ़ावा दिहल जाव ना बे जरूरत निंदा कइल जाव.

दोसरे का दिक्कत बा भाजपा के आपन नेता चुन लेबे में? पूरा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बइठे आ तब ले बइठावल जाव जब ले कवनो एक आदमी भा महिला के नेता चुन नइखे लिहल जात. एक बेर भाजपा तय कर लेव त जनतो के सहूलियत हो जाई आपन राय तय करे में. अगर भाजपा कांग्रेस के बी टीम बनल चाहत बिया त बनो ई ओकरा फैसला होखी बाकिर जनतो तब बी टीम के काहे समर्थन करी काहे ना सीधे ए टीम के करी? अगर भाजपा ओही राहे चली जवना पर देश के सेकूलर जमात चलत बा त का जरूरत बा ओकर?

दोसरे भाजपा के इहो तय कर लेबे के चाहीं कि के ओकर स्वाभाविक सहयोगी हो सकेला आ के कवनो फायदा का लालच में ओकरा से सटे वाला बा. अपना स्वाभाविक सहयोगियन के भलही चिंता कर लेव भाजपा बाकिर लालची सहयोगियन खातिर आपन विचारधारा तजल ठीक ना कहाई. याद करे भाजपा जब ओकरा लगे संसद में बस दू गो सीट बाँचल रहि गइल रहे? ओकरा बाद ओकर वापसी ओकरा विचारधारा का चलते भइल रहुवे जवना के अटल बिहारी बाजपेयी के भलमनसाहत में गँवा दिहलसि भाजपा आ बढ़िया सरकार चलवला का बावजूद अगिला चुनाव हार गइल रहे. अगर भाजपा आपन कोर्स करेक्शन ना करी त २०१४ का चुनाव का बाद भाजपा के हालत अउरी पातर हो जाई. समय आ गइल बा जब भाजपा छाती ठोक के आपन नेता तय कर लेव आ कह देव सहयोगियन के कि जेकरा रहे के बा से रहे जेकरा जाए क बा से जाय.

– संपादक, अँजोरिया वेबसाइट समूह

कुछ त कहीं...

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