सियासत में भाई भतीजावाद

– ‍हरिराम पाण्डेय

उत्तर प्रदेश एह घरी भारत के सियासत के ड्राइंगबोर्ड बन के बइठल बा. एकरा अलग अलग हिस्सा पर अलग अलग गोल तरह तरह के चित्र बनावे में लागल बाड़ें. कांग्रेस प्रगतिशील उदार ब्राह्मणवाद के हवा देत बिया, त भाजपा कट्टरहिंदूवाद के चित्र बनावत बिया. मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपना छवि के आकार बढ़ावे में लागल बाड़ें.

अबहीं हाले में अखिलेश यादव मुख्तार अंसारी के गोल कौमी एकता दल के सपा में घोराइल रोकवा के सचहू अपना चाचा आ कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के नाराज कर दिहलां बाकिर आपन खुद के छवि पहिले से तनिका बड़हन बढ़ा लिहलन. एह घटना का बाद उभरल ताजा सियासी तस्वीर के बहुते महत्व दीहल जात बा आ कुछ लोग के कहना बा कि एकर सीधा असर उत्तर प्रदेश के चुनाव पर पड़ी. शिवपालसिंह यादव, जे उत्तर प्रदेश सपा के चुनाव प्रभारीओ हउवन, मुख्तार अंसारी के गोल के सपा में घोरा जाए ला राजी करवले रहन. उनकर मानना रहल कि एहसे चुनाव में फायदा होखी सपा के. खास क के वाराणसी में जहवां से कौमी एकता दल के मुख्तार अंसारी खुदे खड़ा होलें. एह घोर मट्ठा बनावे में उनकर साथ दिहले रहन एगो अउर मंत्री बलराम यादव. एह पूरा वाकया में जवन सबले रहस्य वाली बात रहल ऊ ई कि घोर मिलवनी के प्रस्ताव पेश होखे से पहिले ले मुख्यमंत्री के एह समझौता के भनको ना लागल रहुवे आ उनुका के पूरा अलोता में राखल गइल रहुवे.

जइसहीं अखिलेश यादव के एह घोर मिलवनी के पता चलल ऊ तुरते अपना पिता आ सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से राय विचार क के बलराम यादव के बर्खास्त क ​दिहलन. एकरा बाद सपे संसदीय दल के बइठक बोलवा के मुलायमसिंह सभका के अखिलेश यादव के नाराजगी के कारण बताके एह घोर मिलवनी के प्रस्ताव रद्द क दिहलन. बाद में मुलायम सिंह आ शिवपाल सिंह अखिलेश के समझवले बुझवलें त बलराम यादव का 26 जून के भइल राज्य मंत्रिमंडल विस्तार में फेरू सरकार में शामिल क लिहल गइल.

एह वाकया से बुझात बा कि अखिलेश यादव के राजनीतिक लाभ ​भेटाई आ चुनाव बेरा आम जनता में संदेश जाई कि मुख्यमंत्री आपराधिक तत्वन से अपना के अलगा राखल चाहत बाड़न. अइसहीं 2012 में ऊ डी पी यादव से किनारा क के अपना गोल के चुनाव में फायदा चहुँपवले रहन. अखिलेश उत्तर प्रदेश में आपन छवि सुधारे में लागल बाड़न. पहिलहूं एक बेर जब राजा भईया – रघुराज प्रताप सिंह – के नाम एगो पुलिस अधिकारी के खून होखे से जुड़ला प उनुका के हटा दिहले रहलन. अइसन क के ऊ लगातार संदेश देत बाड़न कि ऊ राज्य के कांडन आ अपराधियन के चंगुल से निकालल चाहत बाड़न. इहे ना, एकरा से इहो सनेशा जात बा कि अपना चाचन से घेराइल होखला का बावजूद ऊ आपन छवि बरियार बनावेला चउकस बाड़न. चचा भतीजा के रस्साकशी उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी का सियासत में धीरे धीरे रंग ले आवल बावे.

अबे कुछ महीना पहिले मुख्यमंत्री के चाचा शिवपाल सिंह यादव अखिलेश यादव के दू गो विश्वस्तन – आनंद भदौरिया अउर सुनील यादव – के अखिलेश यादव से बिना पूछले सपा से निकाल बाहर क दिहले रहन. एह बात से खिसिया के अखिलेश सैफई महोत्सव में शामिले ना भइलन. बाद में हाई कमान बीच बचाव क के ओह दुनू के फेरू वापसे ना ले आइल, एमएलसीओ बना दिहलसि. एही बीचे दू जने विवादास्पद राजनीतिज्ञ – बेनी प्रसाद वर्मा अउर अमर सिंह – के पार्टी में ले अवला आ राज्य सभा के सांसद बनवला से अखिलेश के नाखुश बतावल जात बा. काहे कि एहुमें शिवपाल सिंह यादव के भूमिका रहल आ उहो गँवा गँवे आपन वर्चस्व बढ़ावे में लागल बाड़ें.

बिहार चुनाव का बेरा महागठबंधन होखला से अखिलेश के विरोध का बावजूद शिवपाल सिंह बिचवनिया बलनल आ ओहिजा के सभन में भाषणो दिहलन. अतने ना, शिवपाल सिंह यादव के चुनाव प्रभारी बनवलो से अखिलेश नाराज बतावल जात बाड़न.

12 सितम्बर से अखिलेश आपन विकास रथयात्रा निकलीहें. ओह घरी चाचा भतीजा के अंदरूनी मनमुटाव चरम पर पहुंच सकेला. चाचा भतीजा के ई अंदरूनी रस्साकशी चुनावो में आपन असर देखाई. अब भाजपा आ कांग्रेस के व्यूह रचना में ई असर कतना रंग देखाई, इहो देखे वाली बात होखी.


पाण्डेय हरिराम के खोज-खबर 7/18/2016 07:44:00 PM से उल्था कइल.

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