हमार प्रिय भारतीय मिता लोग,

भठियरपन का खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरु हो गइल बा. हमनी का कवनो पार्टी का खिलाफ नइखी स. हमनी का व्यवस्था में सुधार करावल चाहत बानी जा. हमनी का भठियरपन से मुक्त भारत चाहत बानी जा. आखिर जनता चाहते का बिया – एगो मजगर भठियरपन विरोधी कानूने नू जवना से दोषियन का खिलाफ तय समय सीमा में आ ईमानदारी से जाँच पूरा करा लिहल जवना से दोषियन के जेल भेजल जा सके, घोटाला से अरजल ओकर संपत्ति जब्त कइल जा सके, आ ओकरा के नौकरी से निकालल जा सके ? हमनी का बहुते बेसी माँगत बानी जा ? दू महीना हमनी का सरकार से बतियवनी जा. आ सरकार भठियरपन का खिलाफ एगो छोटहनो डेग उठावल नइखे चाहत. सरकार एह मामिला में गंभीर नइखे बुझात.हमनी का हर राजनीतिक दल का नेतृत्व से बात कर चुकल बानी. हमनी का हर संभव कोशिश कर लिहनी. अब अउरी का कइल जाव ? जब हम 16 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन के बात कहनी त सरकार धमकवलसि कि हमरो के ओही तरह कचार दिहल जाई जइसे बाबा रामदेव के शान्तिपूर्ण आन्दोलन के कचार दिहल गइल.

मिता, ई एगो एतिहासिक मौका आइल बा.हमनी के हार के जोखिम ना उठा सकी जा. हमनी का आखिर तक लड़े के तय कर लिहले बानी. ऊ लोग अगर हमनी के गिरफ्तार करत बा त हमनी का शान्ति से अपना के सँउप देब जा. अगर ऊ लोग लाठी गोली के इस्तेमाल करी, त हमनी का खुशी खुशी आपन जान दे देब जा बाकिर जगहा ना छोड़ब जा. हमनी का लाठी गोली के जबाब ना देब जा. ई एकदम से शान्तिपूर्ण अहिसक आन्दोलन होई. “अगर तू 16 अगस्त से अनशन कइलऽ त तोहरा के कचार दिहल जाई” – ऊ लोग इहे कहत बा. “जन्तर मन्तर पर धारा 144 लगा दिहल जाई.” – ऊ लोग इहे सोचत बा. बाकिर हम कहत बानी कि अगर एह देश के हर नागरिक 16 अगस्त का दिने अपना काम से छूट्टी ले लेत बा, अपना घर का सामने सड़क पर आ जात बा, चौराहा पर तिरंगा ले के “भारत माता के जय” कारा लगावत भठियरपन का खिलाफ नारा लगावत बा त सरकार का लगे लाठी-गोली के कमी पड़ जाई. सरकार एगो अन्ना के त गिरफ्तार कर सकेले बाकिर सवा सौ करोड़ अन्ना हजारे के कइसे गिरफ्तार कर पाई ? ऊ लोग जंतर मंतर पर धारा 144 लगा सकेला बाकिर पूरा देश पर कइसे धारा लगा पाई ? आ हम बता दिहल चाहत बानी, दैश के सुरक्षो बल हमनी का साथे बा. सड़क के ट्राफिक सिग्नल पर ऊ लोग हमरा के रोक के आपन समर्थन बतावेला, राजघाट पर पुलिस वाले दिल खोल ले हमनी के चंदा दिहले !

त का रउओ 16 अगस्त का दिने अपना काम से छूट्टी लेब ? रउओ हमरा संगे सड़क पर उतरब ? एह साल पूरा देश 16 अगस्त के इन्तजार करत बा, एकजुट हो के.

धन्यवाद का साथ,

अन्ना हजारे


सरकारी लोकपाल बिल अतना खतरनाक बा !

सरकार के लोकपाल बिल ओह लोग का खिलाफ बा जे भठियरपन का खिलाफ आवाज उठाई, ओह लोग के ना जे भठियारा बा.

सरकार के लोकपाल बिल बस पाँच फीसदी सरकारी सेवकन के अपना दायरा में रखले बा, बाकिर आम जनता के हर समूह, हर संस्था, चाहे ऊ पंजीकृत होखे भा ना, के अपना दायरा में राख लिहले बा. एहसे एगो बड़हन सवाल उठत बा — लोकपाल का असल निशाना पर बावे के ? देश में सवा करोड़ सरकारी कर्मचारी बाड़े, एहमें से बमुश्किल 65,000 ग्रुप ए केन्द्रीय कर्मचारी लोकपाल का दायरा में रहीहे आ नीचे के सगरी अधिकारी कर्मचारी मुक्त रहीहे. एकर साफ मतलब इहे भइल कि आम आदमी जवन अपना अनदिना में रोज थाना, कचहरी, कार्यालय, उद्योग, सड़क, रेल, लाइसेंस, परमिट, म्यूनिसपैलिटी, राशन, अस्पताल, पढ़ाई, पेंशन, प्रविडेंट फंड में भठियरपन झेलत बा ओकरा खातिर कवनो उपाय नइखे कइल गइल. दोसरा तरफ एह लोकपाल का दायरा में सगरी एनजीओ, ट्रस्ट, संस्था, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, छोट बड़ सगरी, पंजीकृत भा अपंजीकृतो, चाहे उनुका सरकार से धन मिलत होखे भा ना ओकरा के गाँव स्तर तक लोकपाल का दायरा में राख दिहल गइल बा. मान ली कि नागरिकन के कवनो समूह सरपंच भा बीडीओ का खिलाफ भठियरपन के मामिला सामने ले आवत बा ओकरा मे सरपंच भा बीडीओ का खिलाफ त लोकपाल कुछ ना कर पाई बाकिर आवाज उठावे वाला लोग के जरूर गिरफ्तार करा सकी. हर तरह के संस्था संगठन ओकरा दायरा में राख दिहल गइल बा, इहाँ तक कि दुर्गापूजा समिति, रामलीला कमिटी ले लोकपाल का दायरा में बाड़े. एह बाति से कवनो विरोध ना हो सके कि भठियरपन के रोग बहुते सभा सोसाइटी संस्थो के लाग गइल बा बाकिर ओकरा खातिर बहुते कानून पहिले से मौजूद बाड़ी सँ. लोकपाल के माँग त एह खातिर भइल रहे कि सरकारी सेवा से भठियरपन हटावल जाव.आखिर जब हर संस्था संगठन के एह लोकपाल का दायरा में राखल गइल बा त ई सगरी कंपनी, बिजनेस, राजनीतिक दल, मीडिया हाउसन के अपना दायरा में काहे नइखे करत ?

साफ बा कि सरकारी लोकपाल भठियारन के छतरी बन के रही !

लोकपाल बिल के प्रावधान भठियारा अफसरान का पक्ष में बा. एह में प्रावधान राखल गइल बा कि ऊ भठियारा अधिकारी लोकपाल किहाँ भइल शिकायत का खिलाफ अदालत में जा सकेला, आरोप लगावे वाला पर मुकदमा कर सकेला. सरकार ओह अधिकारी के मुफ्त अधिवक्ता मुहैया कराई एह खातिर कि आरोप लगावे वाला के गलत ठहरावल जा सके, जबकि ओह आदमी के आपन मुकदमा खुद का खरचा पर लड़े के पड़ी. आ जे कहीं ओकर आोप गलत साबित हो गइल त ओकरा के कम से कम दू साल खातिर जेल के सजा दे दिहल जाई. एकरा ठीक उलट अगर आरोप सही साबित हो गइल त सरकारी सेवक के अधिका से अधिका छह महीना के जेल हो पाई !

एह हालत में का कवनो नागरिक भठियरपन का खिलाफ आवाज उठावे के सोचियो सकी ?

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