बलिया के बापू भवन सभागार में काल्हु अतवार का दिने विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई आ भोजपुरी दिशाबोध के पत्रिका पाती के आयोजन में भोजपुरी के तीन गो मूर्धन्य साहित्यकारन – बरमेश्वर सिंह, श्रीकृष्ण कुमार आ विजय मिश्र – के पाती अक्षर सम्मान से सम्मानित कइल गइल.

दिन भर चलल एह कार्यक्रम के शुरुआत वीणावादिनी का सोझा दीया जरा के भइल. एकरा बाद ओमप्रकाश आ रसराज जी स्वागत गायन परोसनी. तब शुरु भइल ‘भोजपुरी के रचनात्मक आंदोलन’ विषय प विचार गोष्ठी. एह गोष्ठी में पाती पत्रिका के सम्पादक आ सम्मलेन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अशोक द्विवेदी कहनी कि भोजपुरी के रचनात्मक आंदोलन पिछला चालीस बरीस से चल रहल बा. एह आन्दोलन में भोजपुरी के अनेके संस्थन अ पत्र-पत्रिकन के सराहे जोग अवदान रहल बा.

विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय आ अंतर्राष्ट्रीय सचिव डॉ. अरुणोश नीरन बतवनी कि भोजपुरी के रचनात्मक उन्नति ला सम्मेलन पिछला पन्द्रह बरीस से बहुत कुछ कइलसि. आजु देश के अनेके विश्वविद्यालयन में भोजपुरी के पढ़ाई हो रहस बा. भोजपुरी के मांग अब हर जगहा से उठे लागल बा.

गोष्ठी में डॉ. प्रकाश उदय (वाराणसी), डॉ. जयकांत सिंह (मुजफ्फरपुर, बिहार), डॉ. रघुवंशमणि पाठक, भगवती द्विवेदी, डॉ. ब्रजभूषण मिश्र वगैरह अनेके वक्ता भोजपुरी के रचनात्मक विकास आ अलग अलग देशन में अनेक क्षेत्रन में भोजपुरी के मिलल उपलब्धियन के बखान कइलें.

गोष्ठी के संचालन केके सिन्हा कइलन जबकि आखिरी सत्र में भइल कवि सम्मेलन के संचालन शशिप्रेमदेव कइलन. कवि सम्मेलन में अनिल ओझा नीरद, डॉ. कमलेश राय, दयाशंकर तिवारी, विजय शंकर पांडेय, मिथिलेश गहमरी, अक्षय कुमार पांडेय, जेपी द्विवेदी, गुरविन्दर सिंह, हीरालाल हीरा, नवचंद्र तिवारी, कन्हैया पांडेय, शिवजी रसराज, अशोक तिवारी, शत्रुध्न पांडेय, डॉ. राजेन्द्र भारती, राजेन्द्र राय वगैरह आपन कविता सुनवलन. कवि सम्मेलन के अध्यक्षता त्रिभुवन प्रसाद प्रीतम कइनी.
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