पुरवइया आ भोजपुरी लेखक संघ के भोजपुरी कविता संगोष्ठी

Eklavya-Gosthi
पिछला दिने 23 नवंबर के दिल्ली के पालम में बोलावल गइल भोजपुरी कविता गोष्ठी के अध्यक्षता करत डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना जब आपन पंक्ति सुनवनी कि,
राजघाट पर गीता कुरान लेके जे किरिया खाई
उहे लोग सत्ता पाई, उहे लोग सता पाई !
त सभे लोग वाह वाह कर उठल आ कविता गोष्ठी के मचान अउरी ऊँच हो गइल.

त नवल किशोर निशांत के कविता में भ्रूण हत्या रोके के गोहार ‘हमहूँ दिलवे के टुकड़ा तोहार ऐ मइया’ सुन के माहौल भावुक बन गइल.

गोष्ठी में डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना के भोजपुरी खंडकाव्य ‘एकलव्य’ पर बोलत रमेश कुमार सिंह कहलन कि एह खंड काव्य में मस्ताना जी जवन नजरिया पेश कइले बानी तवन हिंदीए ना दोसरो भाषा में बमुश्किले भेंटाई.

डिफेंडर पत्रिका के संपादक धनञ्जय कुमार सिंह एह गोष्ठी में जानकारी बँटले कि अब उनकर पत्रिका डिफेंडर भोजपुरीओ में अलग से निकलल करी. कहलन कि उनकर एगो सपना एह तरह पूरा होखे जात बा.

लोक सभा में अधिकारी आ हिंदी, मगही के विद्वान उपेन्द्र नाथ भोजपुरी संस्था से जुड़ल लोगन से निहोरा कइलन कि भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता दिआवे खातिर सभे मिल के काम करे ना कि अलग-अलग आपन निजी प्रचार-राग से जुड़ल रह के.

भोजपुरी रंगमच के लोकप्रिय नाम संजय ऋतुराज गोष्ठी में आपन भोजपुरी हास्य व्यंग कविता सुना के सभके हँसा दिहलन.

गोष्ठी के संचालन संतोष कुमार कइलन आ आपन दू गो नया भोजपुरी कवितो सुनवलन ‘गरीबी’ आ ‘जननायक’

भाषानुवादक राजेश कुमार ओझा के कहना रहे कि भोजपुरी के बढ़न्ती से हिंदी कमजोर ना होखी बलुक अउरी मजबूते होई.

एह गोष्ठी में तीन गो भोजपुरी पत्रिकन के विमोचन भइल. ई रहली सँ भोजपुरी, इंग्लिश आ हिंदी भोजपुरी के पत्रिका ‘भोजपुरी ज़िन्दगी’ (संपादक – संतोष कुमार), डिफेंडर (संपादक – धनञ्जय कुमार सिंह), आ ठेठ भोजपुरी पत्रिका ‘लकीर’ ( जमशेदपुर से – सम्पादक – गंगा प्रसाद अरुण) .

गोष्ठी में एकमत से फैसला भइल कि संविधान के अठवीं अनुसूची में भोजपुरी के शामिल करावे ला प्रधानमंत्री समेत मंत्रियन आ सांसदन के चिट्ठी लिखल जाव जेहसे संसद के शीतकालीन सत्र में भोजपुरी से जुडल बिल पास हो सके.

एह गोष्ठी में ‘प्रवासी शक्ति’ पत्रिका से राज कुमार, ‘पुरवैया’ से सचिव नागेन्द्र सिंह, क्षितिज, हर्ष, रंजू, योगेश कुमार, भाई बी के सिंह ( संचालक – श्री ज्ञान गंगोंत्री विकास संस्था) वगैरह लोग शामिल रहल.

कार्यक्रम के समापन ‘पुरवैया’ संस्था के प्रेसिडेंट राजदीप सिकदर के धन्यवाद ज्ञापन से भइल.


(हिंदी में मिलल रिपोर्ट के भोजपुरी अनुवाद)

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