KaviSammelanBalliaJan14विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई आ भोजपुरी के चर्चित पत्रिका ‘पाती’ का सहभागिता में बलिया के श्रीराम बिहार कालोनी में पाती कार्यालय का सभाकक्ष में एगो स्तरीय सरस काव्य उत्सव के आयोजन भइल.

मऊ पी॰जी॰ कॉलेज के डा॰ राम निवास राय का आतिथ्य में आ डा॰ शत्रुघ्न पाण्डेय के अध्यक्षता में भइल एह कवि गोष्ठी के शुरुआत शिवजी पांडेय रसराज के सरस्वती वंदन आ गीत पाठ से भइल. डा.कमलेश राय आ डा॰ अशोक द्विवेदी का गीतन में गँवई संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना आ प्रेम के तरलता भाव विभोर कइलस. उहवें मिथिलेश गहमरी, शशि प्रेमदेव आ मोइन हमदम के जीवन धर्मी धारदार गजलन से एगो नया समाँ बन्हा गइल. कमलेश जी के ई लाइन सुमधुर वातावरण तइयार कइलस – “सकुची सकुचि उगे सुरुज किरिनिया, फुलवा पंखुरियो न खोले, सवेरे भोरे अब त चिरइयो न बोले..’. डा.अशोक द्विवेदी के प्रेमसिक्त उद्रेक के रचना शिल्प एगो नये अन्दाज में उभरल – “उहे धरती, उहे सुरुज चान, ओइसहीं बा दिल अभी नादान, हम का लिखीं दूसर ?” “प्यार धरती के गहे आकाश ओलरल, मीठ चितवन में लसल ठहराव के पल. फूल पतई हवा बा हैरान, हम का लिखीं दूसर?”

कन्हैया पाण्डेय, त्रिभुवन सिंह प्रीतम आ हीरा लाल हीरा, पारिवारिक आ सामाजिक विसंगति में मानवी मूल्य खोजत लउकल त विष्णुदेव तिवारी आ राम निवास राय के मुक्त छन्द में दिल दिमाग झकझोरत कविता सुने के मिलल. शंकर शरण, शत्रुघ्न पाण्डेय, कंचन जमालपुरी, रामेश्वर सिंह, नवचन्द्र तिवारी, फतेह चन्द बेचैन, डा॰ जनार्दन राय आफि कवियन के रचना गोष्ठी का फलक के विस्तार देत लउकल.

मिथिलेश गहमरी के शेर पर खूब वाहवाही मिलल – “जरूर चाँदनी विहँसी, सुतार होखे दीं, उदास चान के गरहन से पार होखे दीं”. शशि प्रेमदेव संचालन कइलन आ डा॰ श्रीराम सिंह धन्यवाद प्रकाश में “कविता उत्सव” के उपलब्धियन के बखान कइलन. ई गौर करे वाली बात बा कि “पाती” का ओर से बलिया शहर में हर महीना अइसने उत्कृष्ट साहित्यिक सांस्कृतिक आयोजन होला जवन सांस्कृतिक साहित्यिक रचनाकर्म के प्रोत्साहन का साथ, सार्थक सामाजिक हस्तक्षेप करेला.

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