– अमितेश कुमार

दुपहरिया में अचानके एगो कार्यक्रम में पहुँच गइनी. वइसे कार्यक्रम के सूचना रहे लेकिन जाये के इरादा ना रहे. बाकिर पहुँचनी. मौका रहे भिखारी ठाकुर राष्ट्रीय प्रतिष्ठान के तत्वाधान में आयोजित ‘भिखारी ठाकुर के सामाजिक चेतना’ विषय पर संगोष्ठी के. संगोष्ठी में बोले वाला महत्त्वपूर्ण वक्ता रहलें, संजीव (भिखारी ठाकुर के जीवनी “सूत्रधार” के लेखक), मैनेजर पांडे (हिन्दी आ भोजपुरी के प्रसिद्ध विद्वान), नित्यानंद तिवारी (हिन्दी आलोचक), महेन्द्र प्रताप सिंह (भोजपुरी रंगकर्मी), आ मनोज भावुक(कवि). एह वक्ता लोगन के हम जानत रहनी आ ई लोग पहिले से भोजपुरी ला कार करता लोग. बाकिर जवन वक्ता के हम पहिले से ना जानत रहनी ओमे रहलें रविकांत दुबे (बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष) अउर अजीत दुबे (दिल्ली में भोजपुरी के सक्रिय कार्यकर्ता). श्रद्धा कुमारी आ संतोष पटेल अपन पर्चा पढलक लोग. कार्यक्रम में लोग के उपस्थितिओ संतोषजनक रहल.

बीज वक्त्व्य संजीव देहलें जेमें ऊ विस्तार से भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व आ कृतित्व के चर्चा कइले. महेन्द्र मिसिर के आगे भिखारी के कमतर समझे वाला संजीव अंततः भिखारी नाम के पसरत बाढ के पानी में समा गइले. कहलें कि हमनी अइसन लेखक पोथी के पोथी रंग डालऽता लोग लेकिन समाज जहां बा उहें बा. आ भिखारी अनपढ़ो होके समाज के झकझोर देहलन. रंगश्री संस्था के संचालक महेन्द्र प्रताप सिंह कहलें कि कलाकार समाज के अभिभावक होला. भिखारी पर लागल आरोप के जवाब में ऊ कहलें कि भिखारी सीधा सीदा आजादी के लड़ाई पर ना लिखलें काहे कि उनका अंग्रेज के गुलामी से बड़हन उ गुलामी लागल जवन समाज के जकड़ले रहे. भिखारी ओही समाज के अंग रहले एसे ऊ बड़हन समाज के मुक्ति के बात कइले. जेमें दलित आउर स्त्री शामिल रहे.

भिखारी ठाकुर आ भोजपुरी समाज के लेके सबसे मारक बात मैनेजर पाडे जी कहनी. एगो खिस्सा सुना के बतवनी कि हमनी के भोजपुरी के ले के सारा प्रण खाली संगोष्ठी तक ना रख के घरहू ले जाये के पड़ी. ऊ कहले कि भोजपुरी समाज के नौटंकी से बाहर आके समाज के शक्तिशाली बनावे के होई. काहे कि समाज ओकरे बात सुनेला जे शक्तिशाली होला. भोजपुरी के ले के उनकर महत्त्वपूर्ण सुझाव रहे कि भोजपुरी में साप्ताहिक, मासिक पत्र-पत्रिका के साथ साथ अखबारो निकाले के चाहीं. ऊ बतवले कि भिखारी ठाकुर के मंडली में सवर्ण तबका के लोग ना रहे. ऊ प्रयत्नपूर्वक बहुजन समाज के जागरूकता लेल काम करत रहले. पांडे जी कहलन कि हमनी के भिखारी के सबसे बड़हन सम्मान तब दिहल जाई जब उनका संदेश के जीवन में उतारल जाई. आजुओ भोजपुरी समाजे में बहुजन समाज पिछड़ल बा, मेहरारू सब के दुर्दशा होता, लोग आपन देस छोड़े ला बेबस बा.

रविकांत दुबे जी अपना वक्त्व्य में भोजपुरी के ले के इंटरनेट पर सक्रिय लोग के उपदेश देहलन कि एह लोग के समझे के चाही के भोजपुरी के दुनिया खाली इंटरनेट के नइखे. बहुत लोग कम्प्युटर नइखे जानत लेकिन भोजपुरी ला आपन जीवन होम क देलक. भोजपुरी में गाना बजाना खुब हो गइल अब एहमें बौद्धिक कार्यक्रम होखे के चाहीं.

(संगोष्ठी के उद्घाटन)


अजीत दुबे भोजपुरी के आठवीं अनुसूची आउर प्रतियोगिता परिक्षा में शामिल करावे ला आंदोलन के बात कइले. भोजपुरी के तिरस्कार पर ध्यान खींचत कहले कि एह भाषा के सम्मान दिलावे खातिर मेहनत करे के होई. कवि मनोज भावुक भिखारी ठाकुर के आजु का समय में का प्रासंगिकता बा एह पर बात कइलन आ वक्ता लोग के सामने कुछ प्रश्न रखले.

आपन अध्यक्षीय भाषण में नित्यानंद तिवारी जी कहलन कि भिखारी ठाकुर के मतलब एगो विकल्पात्मक समाज के संभावना बा. स्थानीय विविधता के रक्षा पर ऊ जोर देहलन काहे कि विविधता में रचे के क्षमता होला एकरूपता मशीनी होला. संजीव के उपन्यास “सूत्रधार” के अंश पढ के सुनावत उनकर नाटक के ताकत के बारे में बतवले.

सम्मेलन में लोग निकहा संख्या में जुटल रहल. जरूरत बा सम्मेलन के आगे बढा के बौद्धिक अभ्यास के प्रोत्साहन देवे के. साथ में ओह सगरी औपचारिकतो के छोड़ला के जरुरत बा जे पुरान हो गइल बा. कार्यक्रम में बहुत समय पुष्प गुच्छ से सम्मानित करे में गंवावल गइल. ई सब कर्मकांड एगो बिमारी का रूप में बौद्धिक समाज में देखल जाला. खाली नाम लेइयो के सम्मान देखावल जा सकऽता. आ जरुरी इहो बा कि सामाजिक चेतना टाइप घिसल पिटल विषय से ऊपर उठल जाव. भिखारी ठाकुर के साथ साथ भोजपुरी जगत के दोसर कला विधा, हस्तीओ पर गंभीर विमर्श कइल जाव.

मिलाजुला के कार्यक्रम सफ़ल रहल. बौद्धिक सत्र के समाप्ति बाद गजाधर ठाकुर के गवनई भइल. कार्यक्रम राजेंद्र भवन दिल्ली में आयोजित रहल.


अमितेश कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी में पी॰एचडी॰ कर रहल बाड़े.
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