अतवार २३ जनवरी के बक्सर में आयोजित भोजपुरी संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में बिहार के पूर्व मंत्री श्री अवधेश नारायण सिंह जी के द्वारा “भोजपुरी जन-जागरण अभियान” के चऊथा चरण के उदघाटन करल गईल. उहाँ के एह कार्यक्रम के महत्ता आ गंभीरता बतावत कहनी कि भोजपुरी के विकास खातिर आ एकर महत्ता खातिर एह तरह के कार्यक्रम में उहाँ के पहिला बेरा सम्मिलित हो रहल बानी. एह महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आपन उपस्थिति के बारे में उहाँ के कहनी कि उनका खातिर ई गर्व के विषय बा कि अईसन कार्यक्रम में आवे के मौका मिलल. बिहार भोजपुरी अकादमी के एह प्रयास के प्रशंसा आ उत्साहवर्धन करते हुए उहाँ के अकादमी के अध्यक्ष आ संयोजक के एह आयोजन खातिर धन्यवाद भी दिहनी.

कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रविकांत दुबे जी कहनी कि बिहार भोजपुरी अकादमी भोजपुरी के विकास आ महत्ता खातिर दृढ-संकल्पित बा आ एह विषय में सबका जागरूक करे खातिर आ भागीदारी खातिर, गाँव-क़स्बा आ ग्रामीण-शहरी क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करके आ खुद जाकर के लोग के जागरूक कर रहल बा. संगोष्ठी के विषय “हिंदी कहानी के सामने खाड़ भोजपुरी कहानी” पर उहाँ के कहनी कि आज हिंदी कहानी के लोग समृद्ध मानेला जबकि भोजपुरी कहानी आपन समृद्धि में हिंदी कहानी के सामने कहीं से भी कम नईखे. भोजपुरी कहानी बोली के रूप में परिवार में दादा-दादी, नाना-नानी इत्यादि के मूंह से हज़ारों साल पाहिले से ही एक पीढ़ी से दूसरा पीढ़ी में, संस्कार के रूप में समृद्ध होत चलल आ रहल बा. ई बात अउर बा कि एकर लेखन काल देर से शुरू भईल. लेखन काल के समृद्ध करे के प्रयास अकादमी के द्वारा करल जा रहल बा आ एह विषय में भोजपुरी लेखक आ साहित्यकार लोग के जागरूक आ उत्साहित करल जा रहल बा. आज करल जा रहल ई जागरूकता अभियान आ उत्साह के परिणाम बहुत जल्दी ही सामने देखे के मिली आ भोजपुरी साहित्य लेखन के आधार पर भी हिंदी साहित्य के सामने आपन समृद्धि प्रमाणित कर दिही.

कार्यक्रम के मुख्य-वक्ता डॉ. गुरचरण सिंह आ डॉ. नंदजी दुबे रहीं. डॉ. गुरुचरण जी के वक्तव्य में एक महत्वपूर्ण बात उभर के सामने आईल कि हिंदी कहानी के अपेक्षा भोजपुरी कहानी में ग्रामीण चरित्र, परिवेश आ संस्कार से भरल बा. जेकरा माध्यम से भोजपुरी-संस्कृति आ संस्कार पल्लवित होखेला. उहाँ के कहनी कि आज के समय में भोजपुरी कहानी, हिंदी कहानी से कवनो तरह से भी कमजोर नईखे.

“भोजपुरी कहानी” पत्रिका के सम्पादक आ वयोवृद्ध भोजपुरी साहित्यकार श्री गिरिजा शंकर राय “गिरिजेश” जी कहनी कि हाल ही के दशक में भोजपुरी कहानी पर केन्द्रित अईसन महत्वपूर्ण संगोष्ठी पूरा देश में ना भईल रहल ह. एह संगोष्ठी से जहाँ भोजपुरी साहित्य के बल मिली, वहीँ भोजपुरी साहित्यकार आ लेखक लोग के उत्साहित होखे के प्रेरणा मिली. अकादमी के द्वारा करल जा रहल ई प्रयास बहुत ही महत्वपूर्ण बा आ ई जानकार के प्रसन्नता हो रहल बा कि अकादमी के द्वारा अईसन संगोष्ठी करवावल जा रहल बा.

संगोष्ठी में वक्ता के रूप में “भोजपुरी कहानी” पत्रिका के सम्पादक आ वयोवृद्ध भोजपुरी साहित्यकार श्री गिरिजा शंकर राय “गिरिजेश” जी उपस्थित रहनी. विशेषरूप से एह कार्यक्रम में भाग लेवे खातिर पटना से श्री भगवती प्रसाद दिवेदी जी भी उपस्थित रहनी, इहाँ के भोजपुरी कथाकार आ लेखक हईं. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर (भोजपुरी विभाग) के पूर्वाध्यक्ष डॉ. गदाधर सिंह जी भी उपस्थित रहनी. एह कार्यक्रम के संगोष्ठी सत्र में राष्ट्रिय महामंत्री आ बिहार भोजपुरी अकादमी के कार्यसमिति के सदस्य प्रो. डॉ. गुरुचरण सिंह जी, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर (हिंदी विभाग) के पूर्वाध्यक्ष प्रो. डॉ. नंदजी दुबे, भोजपुरी साहित्यकार अउर “पाती” पत्रिका से जुडल श्री विष्णुदेव प्रसाद, कथाकार अतुल मोहन प्रसाद, डॉ. दीपक राय लोग के द्वारा आपन शोधपत्र आ आलेख पढ़ल गईल. एह संगोष्ठी के विषय-प्रवर्तक श्री भगवती प्रसाद दिवेदी जी रहीं. संगोष्ठी में भाग लेवे वाला हरेक वक्ता के द्वारा भोजपुरी कहानी के अउर अधिक समृद्ध करके के पाठ्यक्रम आधारित पुस्तक अकादमी द्वारा प्रेरित, प्रकाशित आ संकलित करे पर बल दिहल गईल.

एही कार्यक्रम के मंच से श्री भगवती प्रसाद दिवेदी जी के द्वारा आपन कथा-संग्रह “ठेंगा” पुस्तक के लोग के बीच प्रस्तुत करल गईल.

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कार्यक्रम के संयोजक श्री रामेश्वर प्रसाद सिन्हा “पियूष” जी के द्वारा ई अनुरोध करल गईल कि भोजपुरी साहित्य आ विकास से जुडल संगोष्ठी के आयोजित करे के एक बार फिर से मौका देहल जाओ, जेह से कि भोजपुरी से जुडल अउर भी गंभीर मुद्दा पर उद्देश्यपूर्ण चर्चा-परिचर्चा करके भोजपुरी के सही दशा आ दिशा निर्धारित करल जा सको.

आज के एह संगोष्ठी में उपस्थित दर्शक लोग शुरू से अंत तक विषय से जुडल रहले आ प्रश्नोत्तर-काल में कई दर्शक लोग के माध्यम से भोजपुरी साहित्य विकास आ महत्ता पर कई प्रश्न आ जिज्ञासा व्यक्त करल गईल. प्रश्नोत्तर काल में उठल जिज्ञासा के समाधान विशेषग्य लोग के द्वारा दिहल गईल. उत्साहित दर्शक लोग एह कार्यक्रम से जहां भोजपुरी साहित्य के विकास आ महत्ता के प्रति जागरूक भईले वहीँ उनकर एह कार्क्रम से जुडाव एह बात के साबित करत रहल ह कि “जन-जागरण अभियान” के उद्देश्य पूरा तरह से आपन सही दिशा पर चल रहल बा आ एह सही दिशा के माध्यम से ही भोजपुरी विकास आ महत्ता के सही दशा मिलत चल जाई.

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