NaMo-speaking
आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,
भाजपा के ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार आ मुख्‍यमंत्री, गुजरात

विषय: बनारस समेत पूरा पूर्वांचल ला ‘भोजपुरी’ भाषा के संवैधानिक मान्‍यता देबे के एलान क के एकरा के खास मुद्दा बनाईं. बीस करोड़ लोग पर एकर सीधा आ सकारात्‍मक असर पड़ी.

महाशय,
मैकिन्‍से ग्‍लोबल इंस्‍टीट्यूट पिछला 20 फरवरी 2014 के भारत के गरीबी पर एगो बड़हन शोध पत्र जारी कइलसि जवना में कहल गइल कि देश के 126 गो जिलन के आबादी सबले अधिका गरीब आ सुविधन से वंचित बावे. एह पिछड़ा जिलन में देश के सांस्‍कृतिक राजधानी बनारस समेत पूरा पूर्वी उत्‍तरप्रदेश,‍ बिहार आ झारखंड के जिला शामिल बाड़ी सँ.

ताज्‍जुब के बात त ई बा कि एह पिछड़ा जिलन के महतारीभाषा ‘भोजपुरी’ आजु ले संवैधानिक मान्‍यता ला तिकवत बिया. पिछला दसियन साल से हम हमार साथी सब का संगही उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली से भाजपा उम्‍मीदवार आ भोजपुरी सिने स्‍टार मनोज तिवारीओ भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता दिआवे ला लड़ाई लड़त बानी जा, लेकिन बार-बार भरोसा दिहला का बादो कांग्रेस संचालित यूपीए सरकार हमनी बीस करोड़ लोगन के भाषा से मजाके कइले बिया.

21 फरवरी 2014 का दिने देश के प्रमुख अखबारन में एगो खबर छपल रहे. केंद्रीय मंत्रिमंडल उड़िया के शास्‍त्रीय भाषा के दरजा देबे के प्रस्‍ताव पारित कइले रहे. उड़िया संविधान के अठवीं अनुसूची में पहिलही से शामिल बिया. उड़िया के शास्‍त्रीय भाषा के दरजा दिहल जाव, एकरा से केकरो मनाही नइखे आ होखहुँ के ना चाहीं ! अब एह मंजूरी का बाद उडिया संस्‍कृत, तेलुगू, तमिल, कन्‍नड़ आ मलयालम जइसन विशिष्‍ट भाषा श्रेणी में शामिल हो गइल बिया. बाकिर बीस करोड़ लोग के भाषा भोजपुरी खातिर यूपीए सरकार अतनो गंभीर ना भइल कि उ एकरा के संवैधानिक मान्‍यतो दे दीत.

भोजपुरी ला सरकार के उदासीनता 21फरवरीए के 15 वीं लोकसभा के आखिरी दिने साफ हो गइल. संसद के आखिरी दिन शून्‍य काल में कुछ सांसद आवाज उठवलें कि संसद के पटल पर भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता देबे का बारे में सरकार अब तक पांच बेर भरोसा दे चुकल बिया, बाकिर अबही ले भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता देबे के बिल पेश नइखे कर सकल. 15वीं लोकसभा में भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता मिले ला तनिका उम्‍मीद जागल रहुवे बाकिर एकरा समापन का साथही उ उम्मीदो मर गइल.

साल 2009के बात ह. एक दिन हमरा लगे पुरनिया पत्रकार राधाकांत भारती जी के फोन आइल. उ हमरा से उमिर में नाहियो त दस साल बड़ होखीहें. कहलीं कि, ’अजीत तुमने दैनिक जागरण अखबार में ‘आठवीं अनुसूची से क्‍यों दूर है भोजपुरी’ शीर्षक से जो लेख लिखा था, वह संसद के पुस्‍तकालय में संदर्भ लेख के रूप में उल्‍लेखित हो रहा है।’

दरअसल भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्‍यता दिआवे के कोशिश कवनो हमही करत बानी भा ई कोशिश कुछे बरीस पहिले शुरू भइल होखे, अइसन नइखे. साल 1969में चउथा लोकसभा में सांसद श्री भोगेंद्र झा प्राइवेट बिल के रूप में एह सवाल के संसद में उठवले रहीं. तबहियें से लगातार एकरा ला कोशिश जारी बा.

भोजपुरी समाज, दिल्‍ली के एगो प्रतिनिधि मंडल2फरवरी 2007के संप्रग अध्‍यक्षा सोनिया गांधी से एही मांग लेके मिलल रहुवे. 22मई2009के भोजपुरी समाज नई दिल्‍ली के कांस्‍टीट्यूशन क्‍लब में 15वीं लोकसभा में चुनाइल भोजपुरी आ पूर्वांचल इलाकन के सांसदन के अभिनंदन समारोह क के ओह लोग से निहोरा कइले रहे कि उ सभे लोकसभा में अपना भाषा के संवैधानिक मान्‍यता दिआवे ला कोशिश करसु. अब15वीं लोकसभो खतम हो गइल आ यूपीए सरकार के उदासीनता से हालात जस के तस बनल रह गइल बा.

रउरा ई जान के अचरज होखी कि 14जून2011के मॉरिशस सरकार ओहिजा भोजपुरी भाषा के संवैधानिक भाषा घोषित क दिहलसि.

अब अगिला 16वीं लोकसभा के भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से हमहन के पूरा उम्‍मीद बा कि उ भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता दिआवे ला कदम उठइहें. बाकिर ओहू से पहिले जरूरी बा कि रउरा जवना काशी से चुनाव लड़े जात बानी, ओहिजा एह मुद्दे के जोर दे के उठाईं. काशी समेत पूर्वांचल के 32जिलन प एकर बड़हन असर होखी. एह सगरी जिलन के भाषा भोजपुरीए हिय. राउर उठावल एह सवाल प रउरा के प्रधानमंत्री बनावे ला सड़कन पर लड़ाई लड़े वाली जनता के हौसला बढ़ी.

उम्‍मीद बा कि रउरा अपना लोकसभा क्षेत्र आ देश के सांस्‍कृतिक राजधानी बनारस के भाषा के एगो प्रमुख मुद्दा बनाएब. वइसहूं रउरा जहें जानी ओहिजा के लोकल भाषा में सबले पहिले बतियाइलें. एहसे बीस करोड़ भोजपुरियन के पूरा उम्‍मीद अब बस रउरे प बा.

रउरा के बहुते धन्‍यवाद !

– अजीत दुबे
* पूर्व कार्यकारी निदेशक (वित्‍त),नागर विमानन मंत्रालय
* उपाध्‍यक्ष,मैथिली एवं भोजपुरी अकादमी,दिल्‍ली सरकार
* अध्‍यक्ष,भोजपुरी समाज,दिल्‍ली

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