PM-NaMo-at-UNGA

माननीय अध्यक्ष महोदय, आ खासमखास प्रतिनिधि लोग, आ दोस्त सभे,

सबसे पहिले हम संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वाँ सत्र के अध्यक्ष चुनइला पर रउरा ला हृदय से बढ़िया कामना करत बानी. भारत के प्रधानमंत्री का रूप में हमरा पहिला बेर रउरा सभे के संबोधित करे ला (मिलल मौका) हमरा ला सनमान के बाति बा. हम भारतवासियन के आस आ मनसा से भरियाइल बानी. ओही तरह हमरा एहू बाति के पूरा भान बा कि दुनिया के सवा खरब लोगन से का उमेद बा. भारत उ देश ह जहाँ मानवता के छठवाॅ हिस्सा आबाद बा. भारत अइसन बड़हन पैमाना प आर्थिक आ सामाजिक बदलाव से गुजरत बा, जइसन उदाहरण इतिहास में मिलल मुश्किल बा. हर राष्ट्र के, दुनिया के अवधारणा ओकरा सभ्यता आ ओकरा दार्शनिक परंपरा के आधार पर बनेला. भारत के हमेशा से चलल आवत विवेक पूरा दुनिया के एगो कुटुम्ब का रूप में देखेला. आ हम जब ई बाति कहत बानी त हम साफ कइल चाहत बानी कि देश के आपन एगो फिलोसोफी होला, हम आइडियोलाॅजी के बात नइखी करत, आ देश ओह फिलोसोफी का प्रेरणा से आगे बढ़ेला.

भारत एगो देश ह जवना के वेदकाल से परंपरा ‘वहुधैव कुटुम्बकम’ के रहल बा. भारत एगो देश ह जहाँ प्रकृति से संवाद, जहाँ प्रकृति से कवनो लड़ाई नइखे. ई जीवन के हिस्सा ह. आ एकर कारण ओह फिलोसोफी के ओह जीवन दर्शन का तहत आगे बढ़त आइल बा. भारत एगो अइसन देश ह जवन सिरिफ अपने ला ना बलुक दुनिया भर ला न्याय (जस्टिस), गरिमा (डिग्निटी), अवसर (अपोर्चुनिटी), आ समृद्धि (प्रास्पेरिटी), के हक में आवाज उठावत आइल बा. अपना विचारधारा का चलते हमनी के मल्टीलेटरिज्म, बहुआयामवाद, में विश्वास होला.

आजु एहिजा खड़ा हो के हम एह महासभा के आशा आ उमेद का बारे में पूरा से सजग बानी. जवन पवित्र विश्वास हमहन के एकजुट कइले बा, हम ओकरा से बहुते प्रभावित बानी. बहुते बड़हन सिद्धांतन आ नजरिया का आधार पर हमनी का एह संस्था के बनवले रहीं जा. एह भरोसा के मानत कि अगर हमनी के भावी जुड़ल बा, त शान्ति आ सुरक्षा, मानव अधिकार, आ दुनिया भर के आर्थिक बढ़न्ती खातिर हमनी के साथे मिल के काम करे के पड़ी.

तब हमनी का इकावन देश रहीं जा, आजु 193 गो आजाद देशन के झंडा एह भवन पर फहरात बा. हर नया देश, एही भरोसा आ उमेद ले के एहिजा आवेला. हमनी का पिछला सत्तर बरीस में बहुत कुछ हासिल कइले बानी जा. अनेके लड़ाई खतम करवले बानी जा. शान्ति बनवले रखले बानी जा. कई जगहा आर्थिक बढ़न्ती में मदद कइले बानी जा. गरीब बचवन के भावी सुधारे में मदद दिहले बानी जा. भूखमरी हटावे में सहयोग दिहले बानी जा. आ एह धरतिओ के बचावे ला हमनी का सभे साथ मिल के जुटल बानी जा. 69 गो शान्ति बनवले राखे वाला मिशन में दुनिया में ब्लु हेलमेट के शांति के रंग के पहचान दे दिहले बा.

आजु सगरी दुनिया में लोकतंत्र के एगो लहर चलल बा. अफगानिस्तान में शान्ति का साथे राजनीतिक बदलाव इहो देखावत बा कि अफगान जनता के शान्ति के कामना हिंसा प विजय जरूर पाई. नेपाल युद्ध से शान्ति आ लोकतंत्र का तरफ आगे बढ़ल बा. भूटान के नया लोकतंत्र में एगो नया ताकत नजर आवत बा. पछिमि एशिया आ उत्तर अफ्रीका में लोकतंत्र का पक्ष में आवाज उठवला के कोशिश हो रहल बा. ट्यूनिशिया के सफलता देखावत बा कि लोकतंत्र के ई सफर संभव बा. अफ्रीका में ठहराव, शान्ति, आ बढ़न्ती ला एगो नया दमखम आ जगरम लउकत बा. हमनी के एशिया अउर ओकरा पूरा समृद्धि के जागल देखले बानी जा जवना का नींव में शान्ति आ ठहराव के ताकत समाइल बा. बहुते संभावना से भरल महादेश लैटिन अमेरिका ठहराव आ समृद्धि खातिर साझा कोशिश में एकजुट होखे लागल बा. ई महादेश दुनिया वालन खातिर एगो खास सहारा देबेवाला खंभा साबित हो सकेला.

भारत अपना बढ़न्ती खातिर एगो शान्तिभरल आ ठहराव वाला दुनियावी माहौल के उमेद राखेला. हमनी के भावी हमनी के पड़ोस से जुड़ल बा. एही चलते हमार सरकार पहिलके दिन से पड़ोसी देशन से दोस्ती आ सहयोग बढ़ावे पर पहिला धेयान रखले बिया. आ पाकिस्तानो खातिर हमार इहे इरादा बा. हम पाकिस्तान से दोस्ती आ सहकार बढ़ावे ला पूरा मन लगा के शान्ति का माहौल में, आतंक के परछाईं बिना, दू फरीक वाला बातचीत कइल चाहत बानी. बाकिर पाकिस्तानो के ई जवाबदेही बा कि उ सही माहौल बनावे आ पूरा मन से दू फरीक वाला बातचीत खातिर सामने आवे. आ एह मंच पर बाति उठवला से मामला सलटावे के कोशिश कतना सफल हो पाई एह पर बहुते लोग के शक बा.

आजु हमनी के बाढ़ के आफत झेलत कश्मीर के लोगन के सहायता करे प धेयान देबे के चाहीं. जवन हम भारत में बड़हन पैमाना पर करत बानी आ हम एकरा ला बस भारते वाला कश्मीर के धेयान क के ना रुकनी. हम पाकिस्तानो के कहनी काहे कि ओहू इलाका में बाढ़ के असर रहल. हम उनहनो के कहनी कि हम जवना तरह कश्मीर में बाढ़ झेलत लोगन के सेवा करत बानी ओही तरह हम पाकिस्तानो में बाढ़ झेलत लोगन के सहायता करे के प्रस्ताव दिहले रहीं. हम आगा बढ़त दुनिया के हिस्सा हईं बाकिर हम अपना सीमित संसाधन के ओह सगरी लोग का साथ साझा करे के सोचत बानी जिनका एकर बेहद जरूरत बा.

दोसरा तरफ आजु दुनिया बड़का तनाव आ हउँच-पउँच के हालात से गुजरत बा. बड़का लड़ाई नइखे होखत बाकिर तनाव आ लड़ाई साफे नजर आवत बा. बहुते बा. शान्ति के कमी बा. आ भावी ला उहापोह बा. आजुओ गरीबी बहुते पसरल बा. एक होखत एशिया प्रशान्त क्षेत्र, एगो खास इलाका अबहींओ समुद्रकिनारे के सुरक्षा, जवन एकरा भावी ला बहुते जरूरी बा, ले के बहुते चिन्तित बा. यूरोप का सोझा नया बॅटवारा के खतरा मँडरात बा. पछिमि एशिया में बाँटेवाली रेघारी आ आतंकवाद बढ़त बा. हमरा अपने इलाका में आतंकवाद के हालात बिगाड़े वाला खतरा से जूझल जारी बा. हमनी का पिछला चालीस बरीस से एह आफत के झेलत बानी जा.

आतंकवाद नया नया रूप आ नाँव ले के सामने आवत जात बा. एकरा खतरा से छोट भा बड़, उत्तर में होखो भा दक्खिन में, पूरब में होखो भा पछिम में, कवनो देश छूटल बाचल नइखे. हमरा इयाद बा जब हम बीस बरीस पहिले दुनिया के कुछ नेता लोग से मिलत रहीं, आ आतंकवाद के चरचा करत रहीं त ओह लोग के ई बाति घोंटात ना रहुवे. उ लोग कहत रहे कि ई त कानून आ व्यवस्था के समस्या ह. बाकिर गँवे-गँवे आजु पूरा दुनिया देखत बा कि आतंकवाद कवना तरह के पसार कइले जात बा. बाकिर का हमनी का सचहूँ एह ताकतन से निपटे ला मिलजुल के मजगर दुनियावी कोशिश करत बानी जा? आ हम मानत बानी कि ई सवाल बहुते गंभीर बा. आजुओ अनेके देश आतंकवादियन के अपना इलाका में पनाह देत बाड़े. आ आतंकवाद के अपना नीति के औजार मान के चलत बाड़े. आ जब गुड टेररिज्म आ बैड टेररिज्म के बाति सुने के मिलत बा तब त आतंकवाद से लड़े के हमनी के निष्ठो पर सवालिया निशान खड़ा होखत बा.

पछिम एशिया मे आतंकवाद के पाशविकता भरल वापसी आ नजदीक आ दूर के देशन पर एकरा असर के धेयान में राखत मिलजुल के होखेवाला कार्रवाई के स्वागत करत बानी. बाकिर एहमें इलाका के सगरी देशन के भागीदारी आ समर्थन जरूरी बा. अगर हमनी का आतंकवाद से लड़ल चाहत बानी जा त सभकर भागीदारी काहे ना होखे? काहे ना सभकर साथ होखे आ काहे ना एह बाति पर जिदियाइल जाव? समुद्र (सी), स्पेस आ साइबर स्पेस. साझा समृद्धि का साथे साथ लड़ा‎ई के रंगमंच बनल बाड़े. जवन समुंदर हमेशा जोड़त रहे ओही समुन्दर से आज टकराव के खबर आवल शुरू भइल बा. जवन स्पेस हमनी के सिद्धियन के एगो अवसर बनत रहे, जवन साइबर हमनी के जोड़त रहे, आजु एह महत्वभरल इलाकन में नया संकट लउकत बा. ओह अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता के जवना के नींव पर संयुक्त राष्ट्र के स्थापना भइल, जतना जरूरत आजु बा ओतना एकरा से पहिले कबो ना रहे. आजु हम एक दोसरा पर निर्भर दुनिया, इंटर डिपेन्डेन्ट वर्ल्ड, कहीले त का हमनी के आपसी एका बढ़ल बा? हमनी के सोचे के जरूरत बा कि का कारण बा कि यूएन जइसन बढिया मंच हमनी का लगे रहला का बादो हमनी का अनेके जी-समूह बनावत गइनी जा. आजु हमनी का अनेके जी के बात करीलें, जवना के नंबर बदलत रहेला. कबो जी – 4 होखी, कबो जी – 7, कबो – 20 होखी. हमनी का बदलत रहीले. आ चाहीं भा मत चाहीं हमहूँ ओह समूहन से जुड़ल बानी. भारतो जुड़ल बा. बाकिर का जरूरी नइखे कि हमनी का जी-वन से आगा बढ़ि के जी-आॅल का तरफ डेग बढ़ाईं. आ जब यूएन आपन सत्तर बरीस मनावे जा रहल बा तब एह जी-आॅल के माहौल कइसे बने? फेर एक बेर इहे मंच हमहन के समस्या के सलटावे के अवसर कइसे बन सके, एकर भरोसापन कइसे बढ़े, एकर बेंवत कइसे बढ़े? तबहिए जा के, हम एहिजा संयु्क्त बात करीले बाकिर टुकी टुकी में छीटा जानी स ओकरा से हमनी का बच पाईं.

एक तरफ त हमनी का ई कहीले कि हमहन के नीति सभ एक दोसरा से जुड़ल बाड़ी सँ, आ दोसरा तरफ आ हमनी का ‘जीरो सम गेम’ का नजरिया से सोचीले जा. अगर ओहसे ओकरा फायदा होखत बा त हमार नुकसान होखत बा. कवन केकरा फायदा में बा, कवन केकरा नुकसान में बा, एही मानदंड का जमीन पर हमनी का आगा बढ़त बानी. निराशावादी भा आलोचनावादी बन के कुछुओ नइखे बदले वाला. एगो बहुते बड़ समूह बा जेकरा मन में बा कि ‘छोड़ यार अब कुछ होखे वाला नइखे’. ई जवन निराशावादी आ आलोचनावादी माहौल बा, ई कहल आसान बा बाकिर अगर हमनी का अइसन करत बानी त हमनी का अपना जिम्मेदारियन से भागे के जोखिम उठावत बानी जा. आ अपना समहर भावी के हमनी का खतरा में डालत बानी जा. आईं, हमनी का अपना समय के माँग का हिसाब से अपना आप के ढालीं जा. हमनी का असल शान्ति ला काम करीं. कवनो एक देश भा कुछ देशन के एगो समूह एह दुनिया के धारा तय ना कर सके. असली अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी बनावल समय के माँग बा, जरुरी बा.

हमनी के देशन का बीच सार्थक बातचीत आ सहयोग होखल तय करावे के बा. हमहन के कोशिश के शुरुआत एहीजे संयुक्तराष्ट्र में होखे के चाहीं. संयुक्तराष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार ले आवल, एकरा के अधिका जनतांत्रिक आ भागीदारी भरल बनावल हमनी ला बेहद जरूरी बा. बीसवीं सदी के जरूरतन के झलकावे वाली संस्था सभ एकसवीं सदी में प्रभावी ना हो सकऽ सँ. एकनी का सोझा बेमतलब बन जाए के खतरा पेश हो गइल बा. आ हम जोरदार निहोरा करत कहल चाहत बानी कि पिछला सौ-साला के जरूरतन का हिसाब से जवना बातन पर हमनी का जोर दिहनी जा, जवन नीति-नियम बनवलीं जा, इकसवीं सौ-साला में दुनिया में बहुत बदल गइल बा, बदलत बा, आ बदलला के रफ्तारो बहुते तेज बा, अइसनका में ई बेहद जरूरी हो जात बा कि हमनी का समय का साथ अपना आप के बदलीं, बदलाव ले आईं, नया सोचावट पर जोर लगाईं. अगर हमनी का ई कर पाईं तबहिए जा के हमहन के रेलिवेन्स (उपयोगिता) बनल रह पाई. हमनी के अपना सगरी मतभेदन के हटावत आतंकवाद से लड़े ला मिलजुल के अंतर्राष्ट्रीय कोशिश करे के चाहीं.

हम रउरा सभ से निहोरा करत बानी कि एह कोशिश के मूर्ति का रूप में रउरा सभे ‘कम्प्रीहेन्सिव कनवेंशन आन इंटरनेशनल टेररिज्म’ के पारित करीं. ई बहुते दिन से लटकल चलल आवत बा. एह पर जोर लगवला के जरूरत बा. टेररिज्म का खिलाफ लड़े के हमहन के ताकत के परिचय देबे वाला होई ऊ. आ एहसे हमार देश, जवन आतंकवाद के बहुते संकटन से गुजरल बा, ओकरा हर-हमेश लागेला कि जबले यूएन एहमें इनिसिएटिव नइखे लेत आ जबले हमनी का ‘कम्प्रीहेन्सिव कनवेंशन आन इंटरनेशनल टेररिज्म’ के पारित नइखी करत, हमनी का उ भरोसा ना जगा पाइब. एहसे फेरू एक बेर भारत का तरफ से एह आदरजोग सभा का सोझा बहुते जोरदार निहोरा करत हम आपन बाति बतावल चाहत बानी. हमनी के आउटर स्पेस आ साइबर स्पेस में शान्ति, ठहराव, आ व्यवस्था तय करे के पड़ी. हमनी के मिलजुल के काम करत ई तय करा लेबे के बा कि सगरी देश अंतर्राष्ट्रीय नियमन के, मानदंडन के पालन करसु.

हमनी के यूएन पीस कीपिंग के पुनीत काम खातिर पूरा ताकत देबे के चाहीं. जवन देश अपना सेना के टुकड़ी एह काम में लगावेलें उनुका के फैसला लेबे के काम में शामिल करे के चाहीं. फैसला करे के काम में शामिल कइला से उनुकर हौसला बुलन्द होखी. ऊ बहुत बड़हन संख्या में त्याग करेके, बलिदान देबे खातिर तइयार बाड़े, आपन ताकत आ आपन समय खरचा करे ला तइयार बाड़े, बाकिर अगर हमनी का फैसला लेबे का प्रक्रिया से उनही के अलग कर देब त कब ले हमनी का यूएन पीस कीपिंग फोर्स के ताकत दे सकब, जियतार राख सकब? एहू पर गंभीरता से सोचला के जरूरत बा.

आईं हमनी का सार्वभौमिक वैश्विक निशस्त्रीकरण आ अप्रसार खातिर अपना कोशिशन में दुगुना ताकत लगाईं जा. आजु का मुकाबले अधिका ठहराव वाला आ समावेशी विकास खातिर बिना रुकले काम करत रहीं जा. वैश्वीकरण विकास के नया ध्रुवन, नया उद्योगन, आ रोजगार के नया स्रोतन के जनम दिहले बा. बाकिर एकरा साथे अरबो लोग गरीबी आ मुफलिसी का कगारो पर जियत बा. अनेके देश अइसन बाड़े जे दुनिया में बहत आर्थिक तूफान से बहुते मुश्किल से बच पावत बाड़े. बाकिर एह सब में बदलाव ले आइल जतना संभव आजु लउकत बा ओतना पहिले कबो ना लागल रहुवे. तकनीकि बहुते कुछ संभव करा दिहले बा. एकरा के मुहैया करावे में लागे वाला खरचो में बहुते कमी भइल बा. यदि रउरा सगरी दुनिया में फेसबुक आ ट्विटर के पसार के गति में, सेलफोन के पसार के गति का बारे में सोचब त रउरो विश्वास करे के चाहीं कि विकास आ ताकत दिहला के गति में अतने तेज बढ़ाव कइल संभव बा. जाहिर बा कि हर देश के आपन राष्ट्रीय उपायो करे के पड़ी. प्रगति आ विकास के ताकत देबे ला हर सरकार के आपन जिम्मेदारी निबाहे के पड़ी. संगही हमनी ला एगो सार्थक अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी के जरूरत बा. एक स्तर पर एकर मतलब भइल नीतियन के बेहतर समन्वय. जेहसे कि हमनी के कोशिश आपसी सहयोग के बढ़ावा देव आ दोसरा के नुकसान मत करावे. ई ओकर पहिला शर्त ह कि दोसरा के नुकसान मत चहुँपावे. एकर मतलब इहो बा कि जब हम अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संबंधन के रचना करीं तब हमनी के एक दोसरा के चिंता आ हितो के धेयान राखे के चाहीं.

जब हमनी का दुनिया में मुफलिसी के स्तर का बारे में सोचीलें त बेसिक सेनीटेसन अढ़ाई अरब लोगन के पहुँच का बहरी बा. आजु 1.3 अरब लोग ला बिजली नइखे. आ आजु 1.1 बिलियन लोग के पिए ला साफ शुद्ध पानी नइखे. त साफ लउकत बा कि बेसी पसरल आ इकट्ठा जुट के अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई करे के बहुते जरूरत बा. हमनी का सिरिफ आर्थिके बढ़न्ती खातिर इन्तजार ना कर सकीं. भारत में, हमरा विकास के एजेन्डा के सबले खास पहलू एही मुद्दन पर घुरियाइल बा. आ हम मानीले कि हमनी के 2015 का बाद के विकास का एजेन्डा में एही बातन पर घुरियाए के चाहीं आ ओहनी पर धेयान देबे के चाहीं. आ रहे खातिर संभवे ना, टिकाऊ सस्टेनेबुल दुनिया खातिर हमनी का काम करीं जा. एह मुद्दन पर बहुते सगरी विवाद आ दस्तावेज मौजूद बा. बाकिर हमनी का अपना चारो ओर अइसनका अनेके चीज देखीलें जवना से हमनी के चिन्तित आ आगाह हो जाए के चाहीं. आ अइसनो चीझ बाड़ी सँ जवना के देखला से हमनी का अउरी चिन्तित होखल जात बानी. जंगल, पशु-पक्षी, साफ नदी सभ, झील आ नीला आसमान. हम तीन गो बात कहल चाहब.

पहिला बात, हमनी के चुनौतियन से निबटे ला अपना जिम्मेदारियन के निबाहे में इमानदारी बरते के चाहीं. दुनिया के लोग समिलात कार्यवाही के सुन्दर संतुलन के सकरले बा. जवना के स्वरूप कामन बट डिफरेंसिएटेड रिस्पान्सिबिलिटिज के बा आ एकरा के लगातार काम करत रहे के जमीन बनावे के पड़ी. एकर मतलब इहो ह कि बढ़-गइल देशन के फंडिंग आ तकनीकि हस्तांतरण के अपना प्रतिबद्धता के जरूर पूरा करे के चाहीं.

दुसरका बात. राष्ट्रीय कार्यवाहियो बेहद जरूरी बा. तकनीकि बहुते कुछ संभव कर दिहले बा. जइसे फेरु से नया बनावे जोग उर्जा रिन्यूएबल इनर्जी प्रौद्योगिकी आ तकनीक. जरूरत बा त सृजनशीलता आ प्रतिबद्धता के. भारत अपना तकनीक आ बेंवत के साझा करे ला तइयार बा. जइसन कि हमनी का हालही में सार्क देशन ला एगो मुफ्त सेटेलाइट के एलान कइले बानी जा.

तिसरका बाति. हमनी के अपना जिए के तरीका बदले के जरूरत बा. जवना उर्जा के इस्तेमाल ना भइल होखो उ सबले साफ उर्जा होले. एकरा से आर्थिक नुकसान ना होखी. अर्थ व्यवस्था के एगो नया दिशा मिली. हमनी के भारतवर्ष में प्रकृति खातिर आदरभाव आध्यात्म के अलग ना हो सके वाला हिस्सा ह. हमनी का प्रकृति के देन के पवित्र मानीले. आ आजु हम एगो अउर विषय पर धेयान खींचल चाहत बानी. जब हमनी का जलवायु में बदलाव के बाति करींले, होलिस्टिक हेल्थ केयर के बाति करीलें, प्रकृति से जुड़े के बाति करीलें, जब बैक टू बेसिक के बात करींले, तब हम ओह विषय पर खास क के रउरा सभे से एगो बाति कहल चाहत बानी.

योग हमनी के पुरातन पारंपरिक अमूल्य देन ह. योग मन आ शरीर, सोच आ काम, संयम आ उपलब्धि के, एकात्मकता के आ मानव अउर प्रकृति का बीच सामंजस्य के मूर्त रूप ह. ई स्वास्थ्य आ कल्याण के समहर नजरिया ह. योग सिरिफ व्यायामे ना हो के अपना आप से आ विश्व आ प्रकृति का साथ एकरस होखे के माध्यम ह. ई हमनी के जिए का तरीका में बदलाव ले आ के आ हमनी में जागरुकता पैदा क के जलवायु बदलाव से लड़े में सहायक हो सकेला. आईं हमनी का एगो अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनावे के शुरूआत करीं जा.

आखिर में, हमनी का एगो ऐतिहासिक क्षण से गुजरत बानी जा. हर युग अपना खासियत से जानल जाला. हर पीढ़ी एह बाति से इयाद कइल जाले कि ऊ अपना चुनौतियन के सामना कवना तरह कइलसि. अब हमनी का सोझा चुनौतियन का सामने खड़ा होखे के जिम्मेदारी बा. अगिला साल हमनी का (राष्ट्रसंघ) सत्तर साल के हो जाइब जा. हमनी के अपना से पूछे के पड़ी कि का हमनी का तबले तिकवीं जा जब हमनी का अस्सी भा सौ बरीस के हो जाईं? हम मानत बानी कि यूएन खातिर अगिला साल एगो अवसर बा. जब हमनी का सत्तर बरीस के सफर का बाद लेखा जोखा करे बइठीं कि कहाँ से निकलल रहीं जा, काहे ला निकलल रहीं जा, कवन मकसद दे के निकलल रहीं जा, कवन राह रहे, कहाँ चहुँपनी जा, कहाँ चहुँपे के बा? इकइसवीं सौ-बरीसा के कवन प्रकार बा, कवन चुनौती बा, ओह सब के धेयान में राखत पूरा एक साल विस्तार से विचार-मंथन होखे. हमनी यूनिवर्सिटिज के जोड़ीं, नयका पीढ़ी के जोड़ीं, जवन हमनी के पिछलका कार्यकाल के बढ़िया से मूल्यांकन करे. ओकर अध्ययन करे. आ हमनी के उहो लोग आपन विचार देव कि नयकी पीढ़ी के हमनी का अपना नयका यात्रा ला कइसे जोड़ सकीलें जा. आ एहसे हम कहत बानी कि सत्तरवाँ साल अपना आप में एगो बहुते बड़हन अवसर बा. एह अवसर के हमनी का काम में ले आवल जाव, ओहके काम में ले आ के एगो नया उर्जा का साथ, नया जीवट का साथ, नया उमंग आ उछाह का साथ, आपुस में नया विश्वास का साथ, हमनी का यूएन के सफर के एगो नया रूपरंग दीं जा. एहसे हम समुझत बानी कि सत्तरवाँ साल हमनी ला एगो बहुत बड़ मौका बा.

आईं, हमनी का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार ले आईं जा. सुधार ले आवे के अपना वादा के निभाईं जा. ई बात लमहर समय से चलल आवत बा लेकिन ओह वादन के पूरा करे के बेंवत हमनी का भुला दिहले बानी जा. आ एहसे हम फेरू से जोरदार निहोरा करत बानी कि हमनी का एह बारे में गंभीरता से सोचीं जा. आईं, हमनी का अपना पोस्ट-2015 एजेन्डा खातिर अपना प्रतिबद्धता के पूरा करीं जा.

आईं, साल 2015 के हमनी का विश्व के प्रगति प्रवाह के एगो नया मोड़ देबे वाला साल का रूप में यादगार बनाईं. साल 2015 एगो बहुते नया सफर के शुरुआती बिन्दु का रूप में मानव इतिहास में दर्ज होखे आ ई हमहन के समहर जिम्मेदारी बा. हमरा भरोसा बा कि एह समहर जिम्मेदारी के हमनी का पूरा से निभाएब जा. रउरा सभे के बहुते बहुत धन्यवाद!

नमस्ते!

राष्ट्रसंघ के आमसभा में दिहल नरेन्द्र मोदी के संबोधन (भोजपुरी में)


(Full text, in Bhojpuri, of Indian P.M. Narendra Modi speech at the United Nation General Assembly 2014)

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