– पाण्डेय हरिराम

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी चुनावी मौसम में जनता के सौगात दिहले बाड़न. वित्त वर्ष 2011-12 के बजट पेश करत प्रणब मुखर्जी वेतनभोगियन, उद्यमियन, किसानन का साथेसाथ आम उपभोक्ताओ के कुछ-ना-कुछ राहत दिहले बाड़न. ई उनुकर छठवाँ बजट ह. वित्त मंत्री के नजर देश के पांच राज्यन, असम, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, केरल अउर पश्चिम बंगाल, में जल्दिये होखे वाला विधानसभा चुनावन पर बा. एकरा के नजर में राखत इनकम टैक्स छूट के सीमा मौजूदा 1.60 लाख से बढ़ा के 1.80 लाख रुपिया कर दिहले बाड़े. मानल जात बा कि बजट में नौकरीपेशा लोग अउर किसानन के एही चलते राहत मिलल बा. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी इनकम टैक्स देबे वालन खातिर बजट में कई गो सुविधा बढ़वले बाड़न. अब वइसनका वेतनभोगी, जेकरा लगे आमदनी के दोसर जरिया नइखे, अलग से टैक्स रिटर्न भरे के ना पड़ी. वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स छूट के सभका खातिर बढ़ा दिहले बाड़न, औरतन ला अलग से कवनो बदलाव नइखे कइल गइल. हँ सीनियर सिटिजन खातिर टैक्स छूट के सीमा 2,40,000 से बढ़ाके 2,50,000 रुपिया कर दिहल गइल बा. साथ ही अब 60 साल से ऊपर के लोग सीनियर सिटिजन का दायरे में आ जाई. एकरा साथे 80 साल से ऊपर के सीनियर सिटिजन खातिर एगो नया टैक्स स्लैब बनावल गइल बा आ ओह लोग खातिर पाँच लाख रुपिया तक के आमदनी पर टैक्स ना लागी. वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में उमेद जतवले बाड़न कि अगिला वित्तीय वर्ष में मंहगाई दर कम होई आ आर्थिक तरक्की के दर नौ फीसदी पर बनल रही. आर्थिक विश्वलेषकन के कहना बा कि एह बजट में विधानसभा चुनावन के धेयान में राखल गइल बा आ बजट घाटा में कमी करे खातिर कवनो खास कदम नइखे उठअवल गइल, भ्रष्टाचार आ करिया कमाई पर लगाम कसे के कवनो ठोस उपाय नइखे सुझावल गइल.

गरीबी रेखा से नीचे रहे वालन के केरोसिन तेल अउर रसोई गैस में मिले वाला रियायत नकद राशि का रुप में दिहल जाई. एकरा के सरकार के सब्सिडी पॉलिसी में एक बड़हन बदलाव आ बोल्ड कदम का रुप में देखल जा रहल बा. वित्तमंत्री एह प्रक्रिया के जल्दी से जल्दी लागू करवावे खातिर एगो टास्क फोर्स बनावहू के एलान कइले बाड़न.

वित्त मंत्री के मानना बा कि अबही मुख्य चुनौती उच्च विकास दर बनवले राखे के, विकास में पूरा देश के शामिल करे के आ सरकारी कार्यक्रमन के बेहतर बनावे के बा. जहां ग्रामीण इलाकन में घर कर्जा कोष के अब 3,000 करोड़ रूपिया ले बढ़ावल जा रहल बा. पहिले ई 2,000 करोड़ के रहुवे. ओहिजे कमजोर वर्गन के दिहल कर्जा के बीमा खातिर मार्गेज रिस्क गारंटी फंड बनावल जा रहल बा.

भुखमरी आ कुपोषण से निपटे खातिर वित्त मंत्री एगो राष्ट्रीय फूड बिल संसद में पेश करे के बरोसा दिहले बाड़न. उनकर कहना बा कि सकल घरेलू उत्पाद के दर 8.6 प्रतिशत रही आ उमेद बा कि कृषि क्षेत्र में विकास दर 5.4 प्रतिशत आ सेवा क्षेत्र में 9.6 प्रतिशत के होखी. उद्योग क्षेत्र में विकास दर 8.1 प्रतिशत होखे के उमेद बा. एह सगरी सुनहुला सपनन का बीचे इहे देखे के पड़ी कि सरकार हमनी से वसूलल रुपिया खरच कइसे करत बोया.

लोग के टैक्स अदा करे खातिर मनावे खातिर बनवावल विज्ञापनन में सरकार इहे कहेले कि टैक्स के इस्तेमाल ओहि लोग का भलाई पर होई बाकिर साँच कुछ दोसर बा. सरकार आम लोग से सीधे तौर पर वसूलल कर (प्रत्यक्ष कर) के अधियो रकम सामाजिक क्षेत्र में खरच नइखे करत. वित्त वर्ष 2010-11 का अप्रैल से जनवरी तक 3,17,501 करोड़ रुपये के राजस्व सिर्फ प्रत्यक्ष कर से मिलल बा जबकि सरकार लोग का हित में, सामाजिक क्षेत्र में, सीधा तौर पर महज 1.37 लाख करोड़ रुपिया खरचले बिया. देश के मिले वाला कर के बड़हन हिस्सा रक्षा बजट में चल जाला. हालाँकि रक्षा खरच घुमा फिरा के सामाजिके हित में मानल जा सकेला.

बीतल अप्रैल से जनवरी तक एकर वसूली पिछला साल का तुलना में 20 फीसदी बढ़ल बा बाकिर एह दौरान एकरा से कहीं बेसी रकम घोटालन के भेंट चढ गइला के जानकारीओ उजागर भइल बा. भारत सरकार सामाजिक क्षेत्र पर मात्र 1.37 लाख करोड़ रुपिया (1370 अरब रुपिया) खरचत बिया जवन वित्त वर्ष 2010-11 खातिर तय सालाना बजट के करीब एक तिहाईए बा. एहमें से स्वास्थ्य पर करीब छह फीसदी आ शिक्षा पर करीब 9 फीसदी खरच कइल जा रहल बा. दोसरा कई देशन का तुलना में एह मद में होखे वाला ई खरच बहुते कम बा.


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ ई लेख उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखले बानी. अँजोरिया के नीति हमेशा से रहल बा कि दोसरा भाषा में लिखल सामग्री के भोजपुरी अनुवाद समय समय पर पाठकन के परोसल जाव आ ओहि नीति का तहत इहो लेख दिहल जा रहल बा.अनुवाद के अशुद्धि खातिर अँजोरिये जिम्मेवार होखी.

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