‘भोजपुरी संगम’ के 77वीं ‘बइठकी’

baithaki-77
बीतल 10 जुलाई 2016, अतवार का दिने गोरखपुर के भोजपुरी लिखनिहारन के संस्था ‘भोजपुरी संगम’ के 77वीं ‘बइठकी’ संस्था के संस्थापक रहल स्व. सत्तन जी के मकान पर, खरइया पोखरा, बसारतपुर (मेडिकल रोड पर), गोरखपुर में आयोजित भइल.

कार्यक्रम क शुरुआत सुधीर श्रीवास्तव के सरस्वती वंदना से शुरु भइल. एकरा बाद उहां के आपन रचना सुनवनी. एकरा बाद राज कुमार सिंह के कविता ‘माटी के करज चुकइह तू’ में राष्ट्र खातिर आपन कृतज्ञता जतावल गइल. कुमार नवनीत के कविता गीत ‘कठकरेजी भइल समईया पल पल बदलत दांव’ में गाँव से शहरन का तरफ होखत पलायन पर चिन्ता जतावल गइल. राम समुझ सांवरा के गीत ‘चल हो सखी बीन लेईं पाकल जमुनिया’ में नारी भावना सहजता से परोसल रहल त बागीश जी के कविता ‘चुवे लगल मँड़ई बरसात हो गइल’ में गाँवन के दुर्दशा देखावल गइल.

जगदीश खेतान के रचना में मोबाइल के महत्ता बतानल गइल. ओन प्रकाश पाण्डेय आ अवधेश शर्मा नन्द सवैया सुनवनी. अरविन्द अकेला, वीरेन्द्र मिश्र दीपक, राजेश राज, हरिवंश शुक्ल हरीश, सूर्यदेव पाठक, अउर आरडीएन श्रीवास्तवो आपन आपन रचना सुनवनी जा.

भोजपुरी संगम के संरक्षक आ बइठकी के अध्यक्ष ई. राजेश्वर जी रचनाकारन के मजगर मौजूदगी ला खुशी जतवनी. आभार ज्ञोपन अभिनीत कइनी आ कार्यक्रम के सफल संचालन धर्मेन्द्र त्रिपाठी जी कइलीं.

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