ठाकरे विवाद
कुछ लोग के शिकायत हो सकेला कि राज ठाकरे, आ बाद में बाल ठाकरे, के बयान पर अँजोरिया कवनो कड़ा रूख ना अपनवलसि. कारण साफ बा कि कि हम अइसनका कवनो विवाद के हिस्सा ना बन सकी जवना देश के तूड़त होखो. कुकुर हमरा के काटी त हमहूं कुकुर के काटे ना धउड़म. कटहवा कुकुरन के लाठी मारल जाला, हबकल ना जाला!
दोसरे हर बाति का पाछा लाठी लेके दउड़लो ठीक ना होखे. बात समुझीं. देखीं कि सामने वाला के का गलती बा. ताली एके हाथ से ना बाजे. दूसरका हाथ कुछ नाहियों करे त सामने पड़ल रहेला. हिन्दी भाषी भा भोजपुरिहा भाषी के खिलाफ अगर मराठी मानुष खड़ा भइलन त का कारण बा. का खाली सामनहीं बाला दोषी बा? हमार कवनो दोष नइखे?
पहिले त आईं राज ठाकरे का बाति पर. राज ठाकरे अतने कहलन कि छठ का बहाने मुम्बई में शक्ति प्रदर्शन हो रहल बा. पूजा में नेतवन के हाजिरी बजवला के कवन काम बा. दोसरे महाराष्ट्र में रहे वाला, कमाए वाला के मराठी भाषा आ संस्कृति के आदर करे के चाहीं. एहमें कवन बात गलत बा? रउरा एक त हमरा घरे आएम, खाएम पसरेम, सूतेम, आ हमार कवनो खयाल ना करेम त हम कव दिन ले रउरा के बरदाश्त कर सकीलें? राज ठाकरे इ त ना कहलन कि बिहार यूपी में रहे वाला मराठियन के बिहार यूपी के भाषा आ संस्कृति के सम्मान ना करे के चाहीं.
काश्मीर में, पूर्वोत्तर का राज्यन में देश का बाकी क्षेत्र का लोग कई कारण से बस ना सके. सबले बड़ कारण बा सुरक्षा के सवाल. काश्मीर से पूरा हिन्दू जमात के चहेट के बाहर निकला दिहल गइल, ओह लोग के बेटी बीबी के इज्जत लूटल गइल. आजु ले ऊ लोग दिल्ली, जम्मू आ दोसरा जगहा रिफ्यूजी बनल मारल मारल फिरत बा लोग. निकलल कहियो लालू मुलायम के बोली?
ना! निकलबो ना करी. काहे कि सवाल देश के एकता आ बिहार यूपी वालन के सम्मान के नइखे. सवाल बा वोट के, वोट बैंक के पालिटिक्स के. मेरे जिगर के टुकड़ों कह के बिहार के शिक्षा व्यवस्था के चउपट कइल? यूपी में बोर्ड परीक्षा में नकल करे के पुरा छूट देके यूपी के शिक्षा व्यवस्था के चउपट कइल? बिहार में कर्पूरी डिविजन का चलते लड़िकन के पढ़ाई के खराब कइल? राज ठाकरे आ कि उनकर चाचा बाल ठाकरे? इहे लालू आ मुलायम जइसन नेता बिहार यूपी के कंगाल बना के राख दिहलन. ओहनिये का पाछा पाछा दउड़ल जाई का फेर?
आज शत्रुघ्न सिन्हा, मनोज तिवारी वगैरह के आलोचना कइल जा रहल बा. काहे? एही खातिर नूं कि ऊ लोग लालू मुलायम के हँ में हँ नइखे मिलावत? हम त आजुवे ना बार बार हर बार कहेम कि जहाँ रहे के बा, जहाँ कमाए के बा, ओहिजा के लोग के भाषा के संस्कृति के सम्मान देबे के पड़ी. जेतना सम्मान हम अपना भाषा अपना संस्कृति के दिहिले ओतने हर कोई अपना भाषा आ संस्कृति के देबेला.
के रोकले रहे लालू मुलायम वगैरह के बिहार यूपी में ढंग के उद्योग धंधा, ढंग के स्कूल कालेज खोले से? बाकिर ना. ओह लोग के जाति के राजनीति से फुरसत नइखे. अपहरण के उद्योग ओह लोग का राज में खुल के फइलल. आजु ले ऊ कमजोर नइखे पड़ल जबकि राज लालू आ मुलायम का हाथ से निकल के नीतीश आ मायावती के हाथ में आ गइल बा. बिहार यूपी में कतना बढ़िया माहौल बा ई ओहिजा रहहीं वाला जानत बूझत बाड़न. दूर के ढोल सुने में सबका बढ़िया लागेला. तनी बिहार आ यूपी में नया उद्योग शुरु कर के देखीं तब बुझाई! एगो साधारण सड़क त बने नइखे देत लोग. तुरते रंगदारी माँगे चहुँप जात बा लोग.
हो सकेला कि हमार बाति कुछ लोग के फेर खराब लागो. बाकिर दोसरा के दोष देबे से पहिले अपने चेहरा शीशा में देखे लोग. केकरा चलते, कवना चलते आजु बिहार यूपी के लोग जेने तेने छितराइल चलत बा. उ कारण हटावऽ लोग. नाराबाजी आ गाँधीगिरि के बाते से काम ना चली, कामो करे के पड़ी.
बेमतलब के बात
कुछ लोग कही कि इ सब बेमतलब के बाति बा तबहियों हम ई बतावल चाहत बानीं कि भोजपुरी के नव गो सबले अधिका लोकप्रिय वेबसाइटन में से तीन गो अँजोरिया परिवार से बा!
विनय पाण्डे जी आ शशिभूषण राय जी के शुरुआत कइल काम के अँजोरिया मजगर तरीका से बढ़वलसि आ इण्टरनेट पर भोजपुरी के मजबूत मौजूदगी दर्ज करवलसि.
कुछ व्यक्तिगत कारण से हम सभा सम्मेलन में ना जा पाइलां, काहे कि हमार जिनिगी रिक्शावाला जिनिगी हऽ, रोज कमाए के बा रोज खाए के बा. दूइयो चार दिन के छुट्टी लिहल हमरा खातिर असम्भव जइसन हो जाला. परिणाम इ होला कि भोजपुरी के सभा सम्मेलन करे वाला लोगन खातिर हमार अस्तित्वे नइखे. हमरा ओकर कमी ना बूझाला, कमी एह बाति के बुझाला कि सभा सम्मेलन के खबर हमेशा हमरा तीसरा पक्ष से मालूम होला आ कई हालि खबर बीत गइला का बाद!
अँजोरिया के शुरुवे से परम्परा रहल कि हर नवागन्तुक भोजपुरिहा के स्वागत कइल. जब जवना साइट का बारे में पता लागल ओकर खबर, ओकर लिंक हम अँजोरिया पर जरुर दिहनी. तबो हमरा का मिलल? लोग राजा भोज बनि गइल आ हम गंगूआ तेली!
अगर रउरा लोगन में से केहू के सम्पर्क भोजपुरी के कवनो संस्था से होखे त रउरा से निहोरा बा कि अपना संस्था के खबर, गतिविधि का बारे में अंजोरिया के जरुर सूचित करीं. ओकरा के प्रकाशित प्रचारित करिके हमरा बहुते खुशी होखी, आ रउरा कवनो नुकसान ना होखी!
भोजपुरी के लेखक, कवि, प्रकाशक लोग से भी निहोरा बा कि आपन रचना का बारे में, प्रकाशन का बारे में अँजोरिया के सूचित करीं ताकि हम ओकरा के स्थायी जगहा दे सकीं. अँजोरिया हमार प्यार हऽ धंधा ना हऽ. रउरा इहो कह सकेली कि मिले त मारीं ना त बाल ब्रह्मचारी! जइसे कि सरकारी कर्मचारियन का बारे में कहाला कि उहे इमानदार बा जेकरा मउका ना मिलल भा जेकरा हिम्मत ना भइल! भोजपुरी धंधा लायक भाषा हो जाव त एहले बढ़के दोसर कवनो खुशखबरी ना होखी. काहे कि दुनिया पइसा के भाषा बुझेला,प्यार के ना! बाकिर अँजोरिया चाही कि दुनिया में कहीं कतहूँ केहू भोजपुरी खातिर कुछ करो त हम दुनिया के ओकरा बारे में बता सकीं. भोजपुरी के कतना विश्व संगठन बाड़ी स हमरा पता नइखे, बाकिर हर चार छह महना पर कहीं ना कहीं कवनो विश्व सम्मेलन जरूरे आयोजित होखेला. हम हर सम्मेलन का बारे में जाने चाहत बानीं, बतावत चाहत बानीं.
सम्पादक,
अँजोरिया
बाजऽ ए बाजा बाजऽ
बाजऽ ए बाजा बाजऽ, अनका के घर बाजऽ
एक बेरि बजलऽ हमरा घर, हम जोतीं अनका के हर.
ई लाईन बेटी का शादी का चलते करजा में डूबल एगो किसान तब कहले रहुवे जब खेत में हर जोतत ओकरा एगो बारात के बाजा सुनाइल रहे.
भोजपुरी के वेबसाइटन पर शोध करे के शशिभूषण राय जी के योजना सुनि के हमरा उहे लइनवा याद आ गइल. अबहीं हालही में हम एह गलती से निकलल बानीं फेर एहमें अझूराए नइखी चाहत. बाकिर जब बात निकलल बा त बतिया कहइबे करी.
सितम्बर २००६ में हम एगो लेख लिखले रहीं. रउरा ओह लेख के पढ़ सकीलें.
शशिभूषण राय जी वेब पर भोजपुरी के पुरनिया हईं, दोसर हईं विनय पाण्डेय जी, ई दुनू आदमी के हम हमेशा इज्जत करेनी आ करत रहेम. ईंहा लोग से हमरा कबो कवनो बाति पर विरोधो नइखे भइल. साँच कहीं त एक आदमी छोड़ के दोसर कवनो वेबवाला से हमरा मनमुटाव नइखे भइल. जेकरा से भइल बा ओकरो से हमरा अनजाने में भइल बा. नीयत के खोट आ नियति के दोष अलग अलग चीज होला!
खैर जवन भइल तवन भइल. बीत गइल से बात गइल. चलल जाव अपना राह पर.
आपन बाति
एने कइ दिन से हम अँजोरिया के व्यवस्थित करे में लागल बानीं. पांच साल से अँजोरिया के बहुते तरह के वेश पहिरावल गइल. हालत इ हो गइल बा कि एक रुपता नइखे रहि गइल. पांच सात गो स्टाइलशीट बन गइल बा. कोशिश बा कि समूचा साइट के एकही स्टाइलशीट का नियन्त्रण में ले आईं. एहमे टाइम आ मेहनत दूनो बहुते लागत बा.
एही बीच अँजोरिया के लिखनिहार के सूचीबद्ध करे के कामो कर डलनी. एकाध केहू कहीं छूटल फटकल होई तऽ हम माफी चाहत बानीं. जहाँ भी गलती होखे बताईं. अँजोरिया के दूतरफा संवाद बनावे लायक बनाईं. रउरा लोगन का सक्रिय सहयोग बिना अँजोरिया के अँजोर ना कइल जा सके.
लिखनिहारन के सूची दिहला से एगो फायदा हो गइल कि कुछ पन्ना कोना आँतर में दबा गइल रहली हा स से सामने आ गइल बा. एकाध गो भुलाइलो रचना मिल गइल जेकरा के फेर से सामने ले आयेब. तबले रउरा सभे धीरज धरीं.
अँजोरिया के अइसन माध्यम बनावे के कोशिश कर रहल बानीं कि भोजपुरिहा लोगन के हर रूचि के व्यंजन परोसल जा सके. तबहियों अपना सीमा के ज्ञान हमरा बा. मुम्बई के फिल्मी दुनिया आजुकाल्ह भोजपुरी सिनेमा से गहगह बा बाकिर हमरा लगे अइसनका केहू नइखे जे भोजवुड के खबर आ फोटो वगैरह पठा सको. भोजपुरी रंगमंचो पर बहुते काम हो रहल बा. ओकरो कवनो खोज खबर हम नइखिं दे पावत. रउरा सभ में केहू एह सब कमी के पूरा करि सको त हमरा बहुते खुशी होखी.
इन्टरनेट के प्रकृति विचित्र हऽ. एहिजा अधिका लोग ह्वैम बैम थैंक यू मैम का फेर में पड़ल रहेला. कुछेक लोग गुननिहार बा जे आवेला आ कूड़ा करकट में लुकाइल हीरा के तलाश में कबाड़ के खोरि खोरि के खोजत रहेला. ओहू लोगन खातिर अँजोरिया पर सामग्री जुटावल जा रहल बा जेहसे भोजपुरी भाषा पर शोध करे वालन के भी कुछ काम लायक सामग्री मिल जाव.
अँजोरिया के खोरत रहेम त कुछ काम लायक सामग्री रउरो भेंटा जाई. नइखे भेंटात त शिकायत करीं. कोशिश करेम कि जहाँ तक हो सके राउर निहोरा पूरा कइल जा सके. हम नियमित रुप से लेखन करे वाला लोगके भी नेवता देत बानी कि आईं सभे आ अँजोरिया पर आपन सामग्री प्रकाशित कराईं. अगर देवनागरी लिपि में यूटीएफ फान्ट में टाइप कइल सामग्री मिल जाव त बहुते आसानी होखी. ना त रोमन में लिखल सामग्री के देवनागरी में बदले में कई हालि गलती हो जाला आ कुछ के कुछ हो जाला. रउरा लिखम घोर आ हम गलती से लिप्यान्तर कर देम घोड़. त आ ट, र आ ड़ के रोमन में अलगा अलगा लिखल मुश्किल काम हऽ. ढ़ लिखल त आउरियो. कइ हालि हम रउरा लोग से एगो बहस खातिर निहोरा कइनी कि रोमन लिपि में भोजपुरी ध्वनियन के मानकीकरण करे का दिसाईँ कवनो प्रयास कइल जरुरी बा. हो सकेला कि रोमन भोजपुरी तब आउरियो फइल पसरि जाव.
राउर,
अँजोरिया सम्पादक
एने दू तीन दिन से कुछ व्यस्तता, कुछ असकत आ कुछ तकनीकि गड़बड़ी का चलते नया सामग्री नइखे दिया पावत.
तबहियों एह मौका के उपयोग हम अँजोरिया के व्यवस्थितत करे में लगवले बानीं. कुछ बदलाव तऽ रउरो लउकले होखी. आशा करत बानीं कि ई परिवर्तन रउरा नीक लागल होखी.
बहुत दिन से एगो समस्या से परेशान रहत रहीं. भोजपुरी के स्तरीय आ प्रतिनिधि सामग्री जुटावला में बड़ा दिक्कत होत रहुवे. जे लिखेवाला बा ऊ इन्टरनेट पर आवत नइखे, आ जे आवत बा से लिखत नइखे. दू लाइन के फीडबैक खातिर त हम छछन के रह जानीं.
भोजपुरी के प्रतिष्ठित आ प्रतिनिधि पत्रिका पाती के सहयोग से हमार ऊ समस्या हल हो गइल बा. अब नियमित रूप से रउरा के भोजपुरी के साहित्य पढ़े के मिलल करी. शोध करेवालन खातिर भी ढेरे सामग्री के जुटान होखी. बस हमेशा के तरह रउरा आपन नेह छोह बनवलें राखीं.
रउरा नेह छोह का बदौलत हम आपन सब दुख तकलीफ भुला के, अपना व्यक्तिगत संकट के एक ओर फरका राखि के अँजोरिया के उजियार करे में लागल बानीं आ ओकर परिनामों देखे के मिल रहल बा. प्रतिष्ठित साहित्यकारन का नजरि में अँजोरिया आ गइल बा.
हमार हमेशा से कोशिश रहल बा कि अँजोरिया पर स्तरीय सामग्री दिआव, अब ऊ कोशिश सफलीभूतो होखेलागल बा. एह सब खातिर हम मनोज भावुक जी, अभय त्रिपाठी जी, नीरज चतुर्वेदी जी, शैलेश मिश्रा जी, सियाराम सिंह, सुधीर भाई, शशिशेखर सिंह जी, निराला तिवारी जी, बिनय पाण्डे जी, शशिभूषण रायजी, एके उपाध्याय जी, डा॰राजेन्द्र भारती जी, आ परिचय दास जी वगैरह के आभारी बानीं. ऊहाँ लोग से समय समय पर मिलल उत्साह, दिशा निर्देश, नैतिक समर्थन, सहयोग, विरोध, कटाक्ष, आ आशीर्वाद से आजु अँजोरिया लोकप्रियता के शिखर का तरफ गतिमान होके बढ़ि रहल बा.
सबले बढ़िके हम डा॰अशोक द्विवेदी जी के आभारी बानीं कि अपना नेह छोह आ आशिर्वाद से अँजोरिया खातिर प्रतिनिधि साहित्य उपलब्ध करवनीं.
सम्पादक
वेबसाइट बनावे के अगिला कड़ी आ देवनागरी फान्ट का बारे में अपना पाठकन के सवाल पर कोशिश करेम कि जल्दिये कुछ कह सकीं.अकेला आदमी एने तोपेला तले ओने उघार हो जाला. हम तऽ सोचत रहीं कि अतना पाठक लोग में से कुछ लोग लिखनिहारो भेंटा जाईत तऽ कुछ बोझा हलुक करित लोग आ संगही संगही कुछ नया विचारो भेंटाइत.
कई दिन से अपना पाठकन के अभिरूचि के जानकारी लिहला का बाद हमरा बूझात बा कि यदि हम समाचार वाला हिस्सा हटा देईं, भा ओकरा के सीमित कर देईं तऽ जवन समय बाँची ओकर कुछ बेहतर इस्तेमाल भोजपुरी के ज्यादा सामग्री देके कइल जा सकेला.
समाचार संकलन में समय बहुत अधिका लागेला. चिरई के जान जाला आ खवईया के सवादो ना आवे. मुश्किल से एक चौथाई पाठक समाचारन के देखे के जहमत उठावेलें. ओकरा बदले यदि हम सामयिक लेख दींहि तऽ शायद ऊ अधिका प्रभावी होखी.
राउर का विचार बा ?
जहाँ तक रहल बाति समाचारन के तऽ ओकर कमी हम समाचारन के लिंक देके पूरा करेके कोशिश करम. जे जवना जिला के बा तहवाँ के समाचार देखि सकेला. अन्तर अतने भर पड़ी कि समाचार हिन्दी में होखी.
आजु रउरा अतने भर करीं कि सामने दिहल फीडबैक वाला जगहा पर हमरा विचार से सहमति खातिर YES आ असहमति खातिर NO लिख के भेज दीं.
दू चार दिन तकले एह फीडबैक मिलला से करीब करीब सबकर विचार से अवगत हो जायेम आ ओहि हिसाब से आगे काम करब.
राउर,
अँजोरिया सम्पादक

