चुनाव चर्चा
कर्नाटक विधान सभा के चुनाव
कर्नाटक विधान सभा के चुनाव में कांग्रेस के पीठ देवार से लागल बा. हालात पहिलहूं से खराब हो गइल बा जब सन् २००४ में कांग्रेस चुनाव हार गइल रहुवे बाकिर बाद में गठजोड़ करिके केहू तरह सरकार बना लिहले रहुवे.
बाद में ऊ सरकार गिर गइल जब देवगौडा के बेटा भाजपा से हाथ मिला लिहले. वायदा रहुवे कि आधाआधा टाइम दुनू पार्टी के मुख्यमंत्री बनिहन. बाकिर आपन हिस्सा के सरकार चला लिहला का बाद मक्कारी देखा दिहल लोग आ भाजपा के सरकार ना चले दिहल लोग.
अतना सब कुछ होखला का बाद कर्नाटक में भाजपा का पक्ष में सहानुभूति के लहर बहि जाव त अचरज ना होखी. आ पहिलका हालि कवनो दक्खिनी राज्य में भाजपा के सरकार बन जाई.
कांग्रेस के मुशीबत बा कि ओकरा पार्टी में आपसी मतभेद बहुते बा. उपर से तमिलानाडू का साथे हाल के होगेनक्कल पेयजल परियजना विवाद से ओकर हालत साँप छछून्दर वाली हो गइल बा. नइखे विरोध करत त कर्नाटक में लोग ओकरा खिलाफ हो जाई, विरोध करो त केन्द्र के सरकार चलावल मुश्किल हो जाई.
दोसरे एस एम कृष्णा के कर्नाटक का राजनीति में वापिस ले आ के कांग्रेस बड़हन जोखिम ले लिहलसि. अब ऊ लोग जे मुख्यमंत्री का दौड़ में रहुवे कांग्रेस से छटके के शुरु कर दिहले बा लोग. बसपा अलगे कांग्रेस का नाक में दम कइले बिया. कर्नाटको में हर सीट पर उम्मीदवार खड़ा करिके बसपा कांग्रेस के तम्बू उखाड़े मं पूरा सहायता कर दी.
भाजपा का खिलाफ अगर सब पार्टी एक जुट ना हो पवलन, जवना के उमेदे नइखै, त भाजपा के जीते से केहू रोक ना सकेला. अब देखल जाव कि २५ मई के केकर सरकार बने के मुहुर्त निकलत बा!

