उत्तर प्रदेश में सफलता का परचम लहरा रही भोजपुरी फिल्म ‘केहू हमसे जीत ना पाई’ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अच्छी फिल्म बने तो दर्शक इसे ज़रूर देखना चाहेंगे। ‘केहू हमसे जीत ना पाई’ का निर्देशन किया है जाने माने निर्देशक एम.आई. राज ने। इस फिल्म से एम.आई. राज की हैट्रिक भी हो गयी है। एम.आई. राज ने इसके पूर्व सुपर डुपर हिट फिल्म ‘आपन माटी आपन देश’ तथा ‘दिल’ जैसी फिल्म दर्शकों को दी है। ‘आपन माटी आपन देश’ की सफलता पर फिल्म के निर्देशक एम.आई. राज की पूरे गोरखपुर में जबरदस्त चर्चा है। गोरखपुर के हर समाचार पत्रों में इस फिल्म की कहानी निर्देशन और कैमरावर्क तथा रवि किशन, रिंकू घोष, सुशील सिंह, राजीव दिनकर तथा मनोज टाईगर और शाहबाज खान की भूमिका की भी जबरदस्त तारीफ हो रही है। इस फिल्म के निर्माण के लिए डा. विजाहत करीम तथा सुरोहिता करीम की भी जमकर तारीफ हो रही है। एम.आई. राज को गोरखपुर के समाचार पत्रों ने नंबर वन निर्देशक लिखा है और साफ तौर पर लिखा गया है कि रिंकू घोष का नया लुक तथा निर्देशक एम.आई. राज की मेहनत, सधी कहानी तथा बेहतरीन संपादन इस फिल्म के प्लस प्वाइंट हैं। इस फिल्म की सफलता का आलम यह है कि हर जगह से निर्देशक एम.आई. राज को बधाई मिल रही है। उत्तर प्रदेश के मल्टीप्लैक्सों में पहली बार कोई भोजपुरी फिल्म लगी है। इसका श्रेय भी निर्माता डा. विजाहत करीम तथा निर्देशक एम.आई. राज को जाता है। इस फिल्म में ंिरंकू घोष और भोजपुरी सुपर स्टार रवि किशन का पानी में आग लगाने वाला दो हॉट गाना है। गाना भी ऐसा कि बस जो भी रिंकू घोष को इस हॉट लुक में देखेगा कुर्सी छोड़कर कूद पड़ेगा। इस फिल्म ‘केहू हमसे जीत ना पाई’ की स्क्रीनिंग मल्टी मल्टीप्लेक्स थियेटर में रखा गया तो जिसने भी फिल्म देखी सबको रिंकू घोष का ये हॉट लुक आश्चर्य में डाल रहा था। निर्माता डा. विजाहत करीम और सुरोहिता करीम तथा निर्देशक एम.आई. राज के मुताबिक वे रिंकू घोष की परंपरागत इमेज को तोड़ना चाहते थे। एम.आई. राज के मुताबिक रिंकू घोष जैसी कोऑपरेटिव एक्ट्रेस के लिए ये फिल्म ‘केहू हमसे जीत ना पाई’ काफी महत्वपूर्ण है। इस फिल्म में भोजपुरी सुपर स्टार रवि किशन और रिंकू घोष के ऊपर पानी में आग लगाने वाला गाना ‘जींस के ऊपर टाईट कुर्ती टूटे ना बटनिया’ के लिए संगीतकार सतीश अजय को जब बताया गया कि ये गाना रिंकू घोष और रवि किशन के ऊपर फिल्माया जायेगा तो खुद सतीश-अजय भी चौंक गये।


(स्रोत – शशिकान्त सिंह, रंजन सिन्हा)

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