नायक ना खलनायक हईं …

हाथ-पैर सलामत रहे त परदा पर हीरो के कूट-पीट के केहु विलेन बन जाव. लेकिन जब विलेन अपंग होखे आ एकरा बावजूद हीरो के मन में दहशत पैदा हो जाव तब नू भइल असल खलनायकी ! गिरीश शर्मा एगो अइसने विलेन बाड़न जे परदा पर उतरते शो लूट ले जालें. लमहर-चाकर कद-काठी वाला गिरीश शर्मा बने के त हीरोओ बन जइतन बाकिर उनुकर तमन्ना रहे कि लोग उनुका के परदा पर हीरो के पीटत आ पिटात देखसु. आ उनुकर ई तमन्ना पूराइयो गइल.

फिल्म “प्यार करेंगे पल-पल” से शुरू उनुकर सफ़र 40 पड़ाव का बाद दीपक सावंत के आवेवाली फिल्म “गंगादेवी” ले आ पहुंचल बा. अब ले दर्जनों फिल्मन में काम कर चुकल गिरीश शर्मा के “मल्लयुद्ध” रिलीज होखे वाली बा, त “धमाल कइलस राजा” आ “काली” ले शूटिंग एह घरी जोर पर बा. “भीमा” आ “गंगादेवी” में अपंग बाकिर खूंखार खलनायक बनल गिरीश शर्मा के एगो अउरी तमन्ना ईहो बा कि लोग उनुका के भोजपुरिया मोगेम्बो का रूप में जानसु. माने कि जल्दिये मोगेम्बो के तकिया कलाम बदले वाला बा … “मोगेम्बो खुश भईल”


(स्रोत : स्पेस क्रियेटिव मीडिया)