बात के दू गो मतलब

भोला बाबू बाजारे गइल रहलन. बाजार से गुजरत घरी उनका कान में एगो औरत आ एगो मरद के बात सुनाई दिहलसि. थोड़ देर रुक के ऊ सुने लगलन.

मेहररुआ कहलसि – का हो आज ना लेबऽ का?

जवाब में मरदा बोललसि – ना. तोर रोजे फाट जाता.

आजु ले के देख लऽ ना, आजु ना फाटी.

पूरा पढ़ीं

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7 Comments

  1. माननीय ओम जी

    आप लोग किसी चीज को ऐसा घुमा के रख देते है की मतलब सामने वाला जो है वो कंफ्युज हो जाय आप लोगो के चक्करो मे । कन्यादान के समय डोमकच नही होता है , गारी जो है विदाई के समय नही गाई जाती है । हर चीज का विषय वस्तु है । सालो भर जो गीत गाया जाता है वो ना डोमक्च है और ना ही गारी । गारी किसी विशेष परिस्थिति मे गाई जाती है और डोमकच भी ।

    जितना आप गांव पे रहे है ( पता नही कौन सा आपका गांव है जहा इंटरेंट और बिजली की तगडी सुविधा है ) लेकिन हम ऐसे नही है कि आपके घुमा फिरा के बतियाने मे टहल जाय ।

    Prostitute आपको नही कहा गया है जो तुरत फुरत मे आप अपने उपर चिपका लिये । बात यहा तर्क की है और तर्क दिया गया है की क्या गलत है और क्या सही । हर समाज हर वातावरण और हर स्थिति के हिसाब से चीजे होती है । अब आप कही भी डोमक्च और गारी देंगे तो लोगवा सब पागले समझेगा और नही तो फिर उल्टे गारी गलौज करेगा ।

    हम मसरख मे रहे या फिर मसरख मे रहे यह आपका सोचना नही है , आपके साईट पे आया आपने एक लेख लिखा है उसको देखा और उसको देखने के बाद हमने अपने विचार लगे लेकिन एक बात जो आपके दो कमेंट से दिखाई दे रहे है वो बता रहे है कि आप को बात लगी है और सही लगी है और लगना भी चाहिये । क्योकि सही चीज लगती बहुत जबरजस्त है ।

    चली भोजपुरी मे हम लिख देत हई

    ओपी जी वल्गर के परिभाषित ना कई के जवन हो रहाल बा वोह के देखी , अश्लीलता खातिर एगो शब्द वल्गर नईखे अश्लीलता खातिर कई गो शब्द बा आ वोह मे फिल्दी भी एगो शब्द हवे । आप जईसन लोग भोजपुरी के गंवार के भाषा बुझी के भोजपुरी खातिर नीमन नईखे करत । आ जे कहत बा की भोजपुरी गंवार के भाषा हवे उ आदमी जड बा ओकरा भाषा के ज्ञान नईखे एह से रवुआ से निहोरा बा की आपन तर्क के मजबुत करे खातिर डोमकच आ गारी जन गाई । ई डोमकच आ गारी वाला समय ना हवे ।

    मुद्दा जवन बा वोह पे देखी , हम एगो उदाहरण देहनी हा एह गीतन के त आपके एतना घाव लागल बा की आप हमरा उपर बिखिया के आरोप लगा रहल बानी जबकि आप खुदे मुद्दा के भंसारी मे झोक देहनी ।

    चोली के नीचे के तर्क देत बानी अरे महाराज एजुगा बच्चा कहा से आ गईल जी , हुक खोल दी ए राजाजी त रवुआ का करब ? जा के कुरता खुंटी पे टांगब का ? लगनी समझावे । एजुगा चोली उठावल जात बा रिमोट से बच्चा के दुध पियावे खातिर ना । काहे उठावल जात बा अब रवुआ बुझी , अब कही रउवा बच्चा बन गईल बानी त वोह खातिर कुछ कहाल ना जा सकेला ।

    रवुआ डाक्टरी अब झारे लगनी एजुगा डाक्टरी झारे के जरुरत नईखे ओपी साहब , हो सकेला रवुआ डाक्टर होखब लेकिन एजुगा साफ सपाट बात बा जवन आंखि के सोझा लउकत बा ।

    देखि राउर जवन विचार बा उ राउर बा वोह के रउवा पब्लीश कईले बानी त हम वोह पे लिखत बानी अब जब रवुआ लागत बा की हमार लिखल उचित नईखे आ हमरा बात के जवाब देबे मे रउवा घोर असुविधा बुझात बा ( फिलहाल त उहे लागत बा ) त फेरु मत पोस्ट करी , डिलीट कई दी । लेकिन हम ना गारी ( जवन की रवुआ खातिर आम बात बा ) देत बानी आ नाही डोमकच ( जवन की रउवा खातिर सामान्य बा ) करत बानी ।

    फेरु फेरु जनि कहब की भोजपुरी न हिन्दी आ अंग्रेजी । अंग्रेजी छांटि छंटि के अर्थ रवुआ बनावत बानी आ हमरा के कहत बानी हई ना हउ ।

    लेकिन एक बात अवश्य जान लिजिये जो उस क्षेत्र का है उस क्षेत्र मे जिसने नाम किया है वो एक बार दो बार तीन बार गलत हो सकता है लेकिन हर बार गलत नही हो सकता है , अगर वो हर बार गलत होता है तो फिर उस क्षेत्र मे वो सिरमौर या बडा क्यो है ? आप तो सीधे सीधे भरत शर्मा , शारदा सिन्हा के काबिलियत पे अंगुली उठा दिये । मतलब आप अश्लीलता के इतने बडे समर्थक है की आप अच्छाई को और जो अच्छा या सही कह रहे है उनको भी गलत साबित करेंगे ? बहुत सही .. अब हमे समझ मे आया की हमने गलत किया था यहा पे कमेंट लिखकर ।

    और अब आप सही मायने मे डोमकच और गारी दोनो दे रहे है ।

    आप हमारे इस कमेंट को कैसे लेते है यह आपके उपर है लेकिन आप जिस तरिके से फनफना के गुस्सा करके जवाब दे रहे है वो बिल्कुल सही नही है ।

    अंजोरिया को आप चला रहे है यह के नेक काम है और हमने पहले ही कहा की हम इस साईट पे हमेशा विजिट करते है । आप क्यो चला रहे है कैसे चला रहे है बन्द कर देंगे आदि चीजो से हमारा कुछ नही लेना देना फिर भी एक भोजपुरी क्षेत्र का निवासी होने के नाते हम नही चाहेंगे की यह बन्द हो और आपको किसी भी तरह का तकलीफ हो ।

    आज के बाद हम कमेंट नही करेंगे क्योकि आप कमेंट सुनने के आदी नही है और वो भी गलत चीजो पे ।

    धन्यवाद

    आपका
    संजय पांडे
    मसरख

    और अंजोरिया का एक शुभचिंतक !

    • संजय जी,

      देर से जवाब देबे खातिर माफी चाहब,

      हम बिखियात नइखीं. बिखीयाइल रहतीं त राउर पोस्ट के डिलीत कर दिहल आसान रहुवे. बाकिर डिलीट कइल अँजोरिया का पाठकन से अन्याय होखीत. ओह लोग के बात के दोसरा पक्ष से अलगा राखल होखित.

      विचार के मतभेद हर समाज में, हर विधा में, हर क्षेत्र में हमेशा रहेला, रहत आइल बा. रहल बाति शारदा सिन्हा वगैरह के त हम ओह लोग के उपलब्धि के नइखी नकारत, ना हमरा नकरला से कवनो अन्तर पड़े के बा. बस हम एगो खास विषय पर ओह लोग के विचार से सहमत नइखीं. सिरमौर त अपना क्षेत्र में मनमोहनो सिंह बाड़े, बाकिर मनमोहन सिंह के हम आदर्श ना मानीं आ हमरा जइसन बहुते लोग होई जे एह बाति से सहमत होखी. अब केहू मनमोहन सिंह के एहसे विरोध जन करे कि ऊ बहुत बड़ अर्थशास्त्री हउवन त ई देश का प्रति अपना जवाबदेही से भागल होखी. आ हम नइखीं समुझत कि हमरा विरोध से ओह लोग के सेहत पर भा रुतबा पर कवनो असर पड़े जा रहल बा.

      समाज के अगर आगा बढ़े के बा त हर तरह के विचार के सामने आवे देबे के पड़ी. रउरा अउर कुछ ना त अतना त मानबे करब कि अतना मुखर आलोचना बर्दाश्त करे के ताकत बहुते कमे जगहा मिली. हम रउरा पूरा लेख में कहीं कतर ब्योंत नइखी कइले.

      बाकिर असल मुद्दा हर बेर अलगा छूट गइल बा. रउरा अश्लीलता आ फूहड़पन के बीच के अन्तर भुला देत बानी. फूहड़पन के विरोध करीं बाकिर फूहड़ तरीका से ना. राउर विरोध बहुत तरीके से रहुवे एहसे ओकरा के सामने आवे देवे में हमरा कवनो दिक्कत ना रहे. ना आवे देतीं त अपना पाठकन से अन्याय करतीं.

      रउरा जवन अश्लील लागत बा जरुरी ना ऊ सभके अश्लील लागो. आ दोसरा के पसन्द नापसन्द पर जब लोग आपन पसन्द नापसन्दी थोपी त ओहीसे तालिबान, आ श्रीराम सेना जइसन तत्व पनपेलें जे केहू के हित में नइखे.

      हम हमेशा भोजपुरी के हिन्दीयावे के विरोध करब, करत रहब. भोजपुरी के जाँचे के पैमाना बस भोजपुरी हो सकेले कवनो दोसर बाति ना.

      आखिर में, एगो निहोरा. रउरा आपन टिप्पणी देत रहीं एही में हमार खुशी बा. काहे कि हमनी का बहुत कुछ मामिला में एकमत बानीं. फूहड़पन के विरोध हम अपना तरीका से करीलें रउरा अपना तरीका से करत रहीं.

      राउर
      ओम

  2. आपका विचार आया , आप मेरे आरोप पे बुरा माने , क्योकि यह आपके घर पे किया गया था ।

    अशलीलता के नाव पे जो परोसा जा रहा है उन दुअर्थी चीजो को आप समझाने के लिये कह रहे है जबकि आपको खुद मालुम है पुरा कहानी ।

    चोली हमार उठा द , चढ जा हमरा उपर , और यह सब एक लडकी लडके को कह रही है फिर भी आप कह रहे दु अर्थी है ।

    आजकल कई जगह चर्चा हो रही है अश्लीलता की और स्थिती यह है की अब तो यह हद पार कर वेश्यावृति पे चली गई है ।

    बुरा न मानियेगा लेकिन आक्स्फोर्ड वाला बोलता है सब –

    Prostitution

    the practice or occupation of engaging in sexual activity with someone for payment

    the unworthy or corrupt use of one’s talents for personal or financial gain.

    आप समझदार है किसी जगह देखा किसी ने आपको यह कहा है कि आप नवयुवको को मात दे रहे है तो फिर आपको बताने का जरुरत नही कि

    चढा जा राजाजी , करेंट मारे गोरिया , रिमोट से चोली उठा देब ,अईहा सईया रतिया मे बोल के पिछुली कोठारीया मे बईठल रहनी खोल के और भी बहुत सारे है ।

    अब क्या आपको यह पता नही है की राजाजी को किसके उपर चढाया जा रहा है या फिर वो गोरी कौन है जो करेंट मार रही है और फिर रिमोट से चोली और लहंगा उठाया जा रहा है , या फिर क्या खोल के वो बैठी है ।

    आज लडकियो के उपर इन सब चीजो को ध्यान मे रख के लडका लोग क्या क्या बोलता है वो सब आपको दिखाई नही देता ।

    गाना तो गाना अब तो दिखा भी रहे है सब और आप जैसे लोग देख नही रही है । चोली के नीचे क्या है वो दुअर्थी मे समझ मे आ रहा था लेकिन चोली और लहंगा उठा देब इसको भी आप वही डंडे से हांक रहे है ।

    ओपी जी कम से कम जरा सही और खुली नजर से देखिये ।

    हम क्षमा चाहते है उस उदाहरण के लिये जिसमे हमने आपकी बेटी जैसा सम्बोधित किया क्योकि आपकी बेटी हमारी बहन जैसी होगी लेकिन आप सोचिये जरा , गम्भीर दिमाग से सोचिये ।

    समर्थन करना चाहिये लेकिन जब बात संस्कार और संस्कृति की हो तो समर्थन और सोच को एक सही लगाम देने की जरुरत होती है ।

    आपकी साईट कौन देखता है पता नही लेकिन मै देखता हुँ और यह लेख ऐसा लेख है जो हमे मजबुर किया लिखने के लिये ।

    भरत शर्मा , शारदा सिन्हा , अभिमन्यु सिंह , और भी कई लोग है जो ऐसी चीजो का विरोध कर रहे है । क्यो कर रहे है ये लोग ? क्या आपसे कम जानकार है ? नही ऐसा नही है क्योकि वो लोग देख रहे है ।

    हम उम्मीद करते है कि आप भी देखेंगे और सही से देखेंगे ।

    माफ किजियेगा अगर कुछ भी गलत दिया होगा तो ।

    आपका
    संजय पांडे

    • संजय जी,

      बहुत बहुत धन्यवाद.

      रउरा बाति के आगा बढ़वले बानी. सीधे त ना बाकिर तनी घुमा के हमरा के prostitute तक कह दिहले बानी. ना त हम अतना बेवकूफ हईं ना रउरा कि अतनो ना समुझ सकीं. रहल बाति शारदा सिन्हा, भरत शर्मा, अभिमन्यु सिंह के, त ऊ लोग बड़का नाम हऽ. ओह लोग से हम मुकाबिला ना करब. बाकिर कतहीं नइखे लिखल कि जे जानल मानल लोग कहे भा करे से सब ठीक, कवनो छोटका आदमी कहे त गलत.

      हम बहस छेड़े खातिर ई पुरान लेख फेर से सामने ले आइल बानी. अँजोरिया पर खोजब त एकरो से बढ़ के मसाला मिल सकेला रउरा. पता ना रउरा मशरख में रहेनी कि मशरख के हईं. बाकिर अगर गाँवे रहल होखब त सुनले होखब डोमकच के बाति. फगुओ आ चइतो सुनले होखब. ऊ सब कइसन लागेला रउरा ?

      कुछेक जगहा राउर बाति सीमा का पार चलि गइल बा बाकिर पाठकन का सोझा सगरी बाति जस के तस रख देबे के चहनी काहे कि बहस जब होखे त खुल के होखे के चाहीं.

      हम अश्लील शब्द के बाति अपना एगो साथी से आजुवे उठवले रहीं त ऊ कहलें, कर के देखिये इतनी गाली पड़ेगी कि आप भी समझ जाइयेगा. हम सोचनी कि चलीं बात उठाइये दिहल जाव देखल जाव कतना गारी पड़त बा ! हम त शादी बिआह के गारी सुन चुकल बानी जवन पूरा समाज पूरा परिवार का सोझा दिहल जाले.

      हम बस अतने कहब कि, भोजपुरी अश्लील भाषा हऽ ओकरा के अश्लीले रहे दीं सरकार !

      अब एहसे पहिले कि रउरा फेर से कुछ लिखे बइठ जाईं तनी रुक लीं. देखीं कि वल्गरिटी भा अश्लीलता कहल कवना चीज के जाला ? अश्लील के मतलब होला जवना में श्लील ना होखे, श्लील माने शिष्ट ना होखे. वल्गर कबो अंगरेजियो के कहल जात रहे. एहीसे लैटिन शब्द वल्गस से वल्गर बनल. वल्गर मतलब जवन आम आदमी से जुड़ल होखे. भईया, शिष्ट लोग, शिक्षित सुसंस्कृत लोग भोजपुरी काहे बोली, सुनी ? ई त हमनी गँवारन के भाषा हऽ, हमनिये के रहे दीं. रउरा हिन्दी भा अंगरेजी से आपन काम चला लीं.

      हँ बाकिर अश्लीलता के समर्थन फूहड़पन के नइखे जवना के उदाहरण रउरा कई जगहा दिहले बानी. जवना रचना पर ई विवाद उठल बा ओकरा के मेडिकल के ब्लॉट टेस्ट लेखा लीं. ओह टेस्ट में मरीज के स्याही के कुछ धब्बा देखावल जाला आ ओकरा से पता चलावल जाला कि ओह आदमी के मनोदिशा केने जा रहल बा. का उधेड़बुन ओकरा मन में चल रहल बा.

      असल में नंगई आदमी के दिमाग में होला. ना त कवनो बच्चा से पुछ लीं कि चोली के नीचे का होला ? त ओकर जवाब इहे रही, दुध्धू ! हमनी का सयान हो गइल बानी. सब कुछ जाने लागल बानी आ एही से चोली का नीचे के बात हमनी के दोसरा तरफ ले जाले. डाक्टर का टेबल पर पूरा शरीर उघाड़ के देखल जाला, ओकरा में त कतहीं वासना के निशानी ना रहे. बाल बच्चा लंगटे घुमेलें ओह में त वासना ना लउके. ऊ त नंगई का परिधि में ना आवे. फूहड़पन के विरोध जरुर होखे के चाहीं बाकिर फूहड़पन से ना.

      हम हमेशा से कहले बानी कि दु गो सभ्य आदमी के हमेशा असहमत होखे पर सहमत रहे के चाहीं. हम रउरा विचार के सम्मान करत बानी. ऊ राउर आपन विचार हऽ. हम कबनो ना चाहब कि रउरा बिना सोचले विचरले हमार बात मान लीं. ठीक ओही तरह रउरो ई बात माने के चाहीं कि हमार विचार हमार विचार ह, आ हमरा के बिना सोचले विचरले राउर बाति के माने खातिर बाध्य ना करे के चाहीं.

      हम सीमा में रहि के आपन बात कहत बानी रउरा बर्दाश्त करे के चाहीं. हमार राय विचार ठीक ना लागे त रउरा ओकरा के सुने पढ़े के कवनो तरह से मजबूर नइखीं. अंजोरिया हमरा तरह से चली आ जहिया ना चला पाएब तहिया बन्द कर देब.

      अनन्त शुभ कामना के साथ,
      राउर,
      ओम

  3. का महाराज , आप तो नरके कर रहे है ।

    एक चीज बताईये कोई आपका दोस्त आपके घर पे फोन करेगा और कोई आपके घर की औरत फोन उठायेगा तो उधर से आपका दोस्त बोलेगा

    का हो देबु ना

    आप बताईये इस पर आप कहेंगे

    और उसका मतलब असल मे रहेगा

    का हो ओम प्रकाश जी के फोन ना देबु

    मान्यवर ऐसी चीजो को बढावा नही देना चाहिये । हम अंजोरिया देखते है लेकिन ये पहला पोस्ट ऐसा लगा जैसे की आप अश्लील चीजो को बढाना चाह रहे है ।

    शर्म किजिये साहब आप , आपका नाम आदर से लिया जाता है लेकिन ऐसा नही किजिये भाई

    आपका अपना

    संजय पांडे
    मसरख

    • संजय पाण्डे जी,

      पहिला बाति त ई कि रउरा सीधे हमरे घर पर हल्ला बोल दिहनी.
      दोसर ई कि अगर वइसनका फोन आई त पहिला सवाल ई होखी, ‍ का ? के बोलत बा ?

      मानलीं कि केहू अपना कमरा में रात के पढ़ाई करत बा आ तले ओह कमरा में ओकर बहिन नंग धड़ंग चहुँप जात बिया. त ओकरा का करे के चाहीं ?

      सबसे पहिले गोदी में उठा के अपना महतारी का हाथ में दे देबे के चाहीं कि देखऽ ई लंगटे घूमत बिया. अगर केहू का मन में दोसर बाति आवत बा त ऊ ओकर मन के विकार देखाई, दोसर कुछ ना.

      आ, ई रचना आजु से ना जमाना से बा. अश्लीलता बहुत विरोधाभासी शब्द ह. कवनो शब्दकोष में ओकर अर्थ देख के देख लीं.

      तीसर ई कि हम बाल बच्चेदार आदमी हईं आ हमार बेटा बेटी दुनु ई वेबसाइट देखत रहेलें. हम वइसन कवनो बाति देइये ना सकीं जे फूहड़ होखे. एह रचना से इहे जतावे के कोशिश कइल गइल बा कि कवनो बाति के मतलब सुने पढ़े वाला निकालेला, आ ओकरा तब तक कवनो मतलब ना निकाले के चाहीं जबले ऊ पूरा बाति ना सुन लेव.

      बहुत पहिले एगो गीत सुनले रहीं,
      गोदिये में अइनी, गोदिये में गइनी.
      गोदिये में रहि गइल पेट.
      ए सासु जी तोहरे किरिया
      सईंया से भइल ना भेंट.

      अब एकर मतलब सोच के देख लीं.

      रउरा टिप्पणी के स्वागत बा. ई चर्चा आजु हम जानबूझ के छेड़ले बानी कि सीमा में रहत एह पर बहस होखो, बेटि बहिन के बाति मत करे केहू. वइसहूं सभ्य आदमी डाँड़ का नीचे आ चेहरा पर वार ना करे.

      राउर,
      ओपी

  4. नीमन लागल ,बड़ी नीमन लागल !मेहररुआ आ मरदा के सवाल जवाब !
    धन्यवाद !
    ओ.पी.अमृतांशु

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