भोला बाबू बाजारे गइल रहलन. बाजार से गुजरत घरी उनका कान में एगो औरत आ एगो मरद के बात सुनाई दिहलसि. थोड़ देर रुक के ऊ सुने लगलन.

मेहररुआ कहलसि – का हो आज ना लेबऽ का?

जवाब में मरदा बोललसि – ना. तोर रोजे फाट जाता.

आजु ले के देख लऽ ना, आजु ना फाटी.

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