भोजपुरी फिल्मों एवं गीत-संगीत का मौजूदा छवि सभ्य समाज में पसंद नहीं किया जा रहा है; परन्तु संगीतकार छोटे बाबा का भगीरथ प्रयास इस हालात को बदलने हेतु जारी है. गाँव, बस्ती, कैमूर (ममुआ) बिहार के निवासी संगीतकार छोटेबाबा को बचपन से ही संगीत का माहौल मिला, इनके पिताजी सभी वाद्ययन्त्र बखूबी बजा लेते हैं. होश संभालते ही संगीत की शिक्षा विरासत में मिलने की वजह से संगीत सुनते सीखते स्नातक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद संगीत जगत में कुछ नया करने हेतु दिल्ली के थियेटर में संगीत की शुरूआत किया. दिल्ली के कई थियेटर – एल.टी.जी, कामायनी, श्री राम कला सेन्टर इत्यादि नाट्यगृहों में कई शो करने के बाद मुंबई मायानगरी में आते ही कई बड़े टी.वी. चैनल, सोनी, जी टीवी., स्टार प्लस, कलर्स इत्यादि के कई हिट धारावाहिक संगीत तैयार किया. मगर भोजपुरिया प्रेम की वजह से हिन्दी की बजाय भोजपुरी फिल्मों में ही संगीत देना शुरू किया और पहली फिल्म ‘करंट मारे गोरिया’ से उन्होंने भोजपुरी संगीत जगत में बतौर संगीतकार कैरियर की शुरूआत की.

छोटे बाबा कहते हैं कि मैं सच में चाहता हूँ कि भोजपुरी संगीत का स्तर ऊँचा हो. मेरा प्रयास जारी है आज नहीं तो कल ये संभव हो जायेगा, क्योंकि भोजपुरी से बड़ा कोई दर्शक व श्रोता नहीं है और उन्हें भी अच्छा संगीत सुनना पसंद है. मेरी आने वाली हर फिल्मों का संगीत श्रोता व दर्शक अपने करीब ही पायेंगे.

इनकी आने वाली फिल्में हैं, चून्नूबाबू सिंगापूरी जिसमें भोजपुरिया ‘फोक’ के अलावा पहली बार रैंप का प्रयोग किया गया है. हमार मेहरारू नं. वन, तांडव तथा कुछ अनाम फिल्में भी हैं. गजब सीटी मारे सइंया पिछवारे, धर्मपत्नी इत्यादि.


(स्रोत – रामचंद्र कुंदन)

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कुछ त कहीं...

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