– शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा

सिकन्दर खान उन अभिनेताओं में शुमार किये जाते हैं जो अपना मुकद्दर खुद लिखने में यकीन करते हैं. वाराणसी के दानगंज चोलापुर के रहनेवाले सिकन्दर खान ने अब तक ‘होश’, ‘दुकान’, ‘सिंदूर की सौगंध’, ‘ज्वाला डाकू’, ‘क़ैदी’, ‘गुरु महागुरु’, ‘क़ोहराम’, ‘मेरी अदालत’, ‘मेंहदी’ तथा ‘भारत भाग्य विधाता’ जैसी चर्चित हिन्दी फिल्मों के अलावा भोजपुरी की सुपर डुपर हिट फिल्में ‘पूरब पश्चिम’, ‘तू हमार हऊ’, ‘पांडव’, ‘बिहारी माफिया’, ‘हम हई मुन्ना भईया’ आदि में अपनी जबरदस्त भूमिका से लोगों का दिल जीता है. सिकन्दर खान निगेटिव भूमिकाओं में जहां लोगों की गालियां सुनते हैं, वहीं पॉजिटिव भूमिका कर लोगों की तालियां भी बटोर ले जाते हैं. सिकन्दर खान को बचपन से ही गाने का शौक था. झंकार कम्पनी बनायी. लोगों की वाहवाही मिली तो वर्ष 1988 में मुंबई आ गये. कड़े संघर्ष के बीच तपकर निकले सिकन्दर खान कहते हैं मुझे किसी ने सपोर्ट नहीं किया. मैं मां बाप की दुआवों से यहां तक पहुंचा. पहला ब्रेक दिया चर्चित निर्देशक इकबाल बख्श ने फिल्म ‘होश’ में. इकबाल बख़्श की सिकन्दर खान जमकर तारीफ करते हैं. वे कहते हैं इकबाल जी अच्छे इंसान और काफी अच्छे निर्देशक भी हैं. दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन और सुनील दत्त की फिल्मों से प्रभावित सिकन्दर खान अपने को वर्सेटाइल एक्टर मानते हैं. भोजपुरी सिनेमा के मौजूदा दौर पर बात करने पर सिकंदर कहते हैं हर भोजपुरी फिल्म निर्माता टेबल पर नुकसान उठा रहा है. भोजपुरी के दिग्गज कलाकारों की झोली भर रही है. ये सुपर स्टार जब तक अपनी कीमत कम नहीं करते भोजपुरी सिनेमा का भविष्य अधर में है. सिकन्दर खान की आनेवाली फिल्मांे में शुमार हैं हिन्दी फिल्म ‘चोरों की बारात’, ‘दर्द ए डिस्को’, ‘मैड’ और ‘क़यामत ही क़यामत’. जबकि भोजपुरी फिल्म ‘दिल तोहरे प्यार में पागल हो गईल’, ‘चिंगारी’ और ‘रामलखन’ में मुख्य खलनायक की भूमिका में सिकन्दर खान लोगों की वाहवाही बटोरते नज़र आयेंगे. साफ दिल के सिकन्दर वाकई दिल से भी सिकन्दर हैं. वे किसी का दुख नहीं देख सकते इसलिए वे सबके प्रिय हैं. आधी रात को भी सिकन्दर खान को याद कीजिए, वे आपके हर सुख दुख में मौजूद रहेंगे. तभी तो भोजपुरी या हिन्दी सिनेमा जगत में सिकन्दर खान का नाम काफी अदब से लिया जाता है.

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