बहुत दुख का साथ बतावे पड़त बा कि सिनेमा भोजपुरी से जुड़ल हर खबर, भा प्रचारक लोग से मिलल हर रपट के प्रकाशित ना कइल जा सकी. काहे कि सामग्री के भोजपुरी अनुवाद करे में लागे वाला मेहनत के कवनो फायदा नइखे लउकत. मानत बानी कि हमरा भोजपुरी से लगाव बा आ एह चलते भोजपुरी से जुड़ल सामग्री पाठकन ले चहुँपावल हमार मकसद होखे के चाहीं. बाकिर जब चार गो काम में से एके गो काम पर सगरी समय लाग जाव त कुछ ना कुछ करही के पड़ी. एहसे भोजपुरी के साहित्य के प्रकाशन पर बेसी ध्यान दिहल जाई आ फिलिम से जुड़ल समाचार में काट छाँट कइल जाई.

कारण चाहे जवन होखे बाकिर भोजपुरी प्रकाशन, प्रिंट मीडिया में भा नेट पर, चलावल आर्थिक नजरिया से फायदेमंद नइखे. लाख चाहीं कि एगो दू गो टाइपिस्ट राख के काम चलावल जाए बाकिर ओकर खरचा कहाँ से आई? आ कतना दिन ले आपन धनदाह जारी राखल जा सकेला?

प्रचारक लोग के धन्यवाद देत अनुरोध करब कि अँजोरिया पर प्रकाशित करे ला या त भोजपुरी में सामग्री भेजीं, यूनिकोड में भा कृतिदेव में. दोसरा फांट पर भा स्कैन कर के, भा पीडीएफ फार्मेट में आइल सामग्री छाँट दिहल जाई अगर ओकर कवनो समाचार अहमियत नइखे. दोसरे अगर कवनो फिलिम निर्माता चाहत होखस कि उनका के पूरा महत्व मिले त जइसे प्रचारक से अनुबन्ध होला ओही तरह अँजोरियो से अनुबन्ध कर लीं.

कवनो कलाकार से जुड़ल प्रचार तब ले मत भेजीं जबले ऊ खबर ना होखे. आ खबर के परिभाषा होला कि जवना बात के केहु छिपावल चाहे ऊ खबर होला आ जवना बात के छपवावल चाहे ऊ विज्ञापन. आ विज्ञापन ढेर दिन ले फोकट में ना हो सके.

माफ करब सभे. बाकिर उमर बढ़ल जात बा, जिम्मेदारी बढ़ल जात बा, समय घटल जात बा. एहसे कुछ ना कुछ बदलाव कइल जरूरी बा. फिल्म से जुड़ल खबर मुहुर्त पर, शूटिंग से जुड़ल खबर महीना में एक बार, हर टेरीटरी में रिलीज होखे के आ एक बेर रिलीज भइला पर. बस अतने खबर दिहल जा सकी.

फिल्म के बैनर, फिल्मकारन, तकनीशियन आ कलाकारन के पूरा सूची एके बार भेज दीं. रिलीज से पहिले ओह फिल्म से जुड़ल बीस पचीस गो स्टिल भेज दीं. त हर केहु के ओह फिल्म का बारे में काम लायक जानकारी मिल जाई. फिलिमो के फायदा मिली आ एके बतिया सतरह बार टाइप करे से हमरो छुट्टी मिली.

भोजपुरी सिनेमा के बात भोजपुरी में ना कर सकीं त बहुते साइट बाड़ी सँ हमार कवन जरूरत ?

विदा लेत बानी. बदलाव आजुए से चालू हो गइल बा.

अपने सभे के,
ओम

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