लगन आ मजबूत इरादा से सफलता के कहानी लिखत फिल्म कथाकार सुरेन्द्र मिश्रा. सपनन के हकीकत जइसन रूप दे देले. सुरेन्द्र मिश्रा रचनात्मक सुबाव के हउवन आ आजु आठगो से बेसी हिन्दी फिलिमन के गीत, 25 गो से अधिका एलबम आ तीस गो ले बेसी भोजपुरी फिलिमन में कथा-पटकथा आ संवाद लेखक का रूप में मजगर पहिचान बन चुकल बा सुरेन्द्र मिश्रा के.

वाराणसी के बाबतपुर में दिनदासपुर गांव के साधारण किसान केदारनाथ मिश्रा का घरे जनमल सुरेन्द्र मिश्रा साल में मुंबई अइलन. धर्मेन्द्र के सनी सुपर साउण्ड स्टूडियो में वाचमैन शुक्ला उनुका से अभद्र तरीका से पेश आइल बाकिर ओहिजा मौजूद गायक बालीब्रह्म भट्ट से रहल ना गइल त ऊ वाचमैन के डँटलन आ सुरेन्द्र मिश्रा के गीत लिखे के कला सिखवले. पहिला मौको दिहले एलबम ‘तेरे बिना क्या जीना’ में. एलबम हिट हो गइल त राकेश रोशन के महतारी इरा रोशन खातिर एलबम लिखलन. फिल्मी गीतन में के.सी. बोकाडिया के ‘प्यार जिन्दगी है’ का अलावे, ‘हमदम’, ‘मनोरमा 60 फिट अण्डर’ जइसन फिलिमन खातिर गीत लिखले. सुरेन्द्र मिश्रा के भोजपुरी ओर खींच ले अइलन निर्माता आलोक कुमार. ऊ सुरेन्द्र मिश्र के अपना फिलिम ‘ओढ़निया कमाल करे’ खातिर कथा पटकथा संवाद लिखे के मौका दिहले. कलम के जादू चलल आ ई फिलिम सुपर डुपर हिट हो गइल.

सुरेन्द्र मिश्रा अबही ले ‘देवा’, ‘पांडव’, ‘कहां जईबा राजा नजरिया लड़ाई के’, ‘खिलाड़ी नम्बर वन’, ‘मर्द नम्बर वन’, ‘बिदाई’’, ‘धरमवीर’, ‘परिवार’, ‘बृजवा’, ‘खटाईलाल मिठाईलाल’, ‘चंदू की चमेली’, ‘हो गईली दिवाना तोहरे प्यार में’, ‘रंगीला बाबू’, ‘दुल्हा अलबेला’, ‘किशन अर्जुन’, ‘कर्तव्य’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘छोटका भईया जिन्दाबाद’, ‘मार देब गोली केहू ना बोली’, ‘जरा देब दुनिया तोहरे प्यार में’, ‘धर्मात्मा’, ‘मृत्युंजय’, ‘जाड़े में बलमा प्यारा लगे’, ‘तू ही मोर बालमा’, ‘जंग’, ‘जुदाई’, ‘लड़ाईला अंखिया ओ लवंडे राजा’, ‘एलान बा’ अउर हालिया प्रदर्शित सुपर डुपर हिट फिल्म ‘खून पसीना’ के कथा पटकथा अउर संवाद लिख चुकल बाड़न. सुरेन्द्र मिश्रा. उनुकर आवे वाली फिलिमन में ‘जानवर’, ‘एक बिहारी सौ पर भारी’, ‘रखवाला’, ‘घात प्रतिघात’, ‘दिल त पागल होला’, ‘चुन्नू बाबू सिंगापुरी’, ‘यादव पान भंडार’, ‘राम बनवले जोड़ी’, ‘ज्वालामंडी’ आ ‘गदर’ शामिल बाड़ी स.

सुरेन्द्र मिश्रा के कहना ह कि ऊ मार्केट के डिमांड परखलन आ बढ़िया स्टोरी लिखलन. ओकरा पटकथा अउर संवाद पर प्रयोग कइलन जवन कामयाब रहल. इहे अनुभव बाद में सुरेन्द्र मिश्रा के राह आसान बान दिहलसि.


(शशिकांत सिंह के रपट से)

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