बचपन में जब घामा खेलत मिजाज थाकत रहे त कवनो आम भा नीम का फेंड़ का झाँहे दु पल सुकून के मिलत रहे. अइसनके सुकून के तलाश जब जिनिगी में होला त सहारा बनेला रिश्तन के छाँह. जबे कबो मन डगमगाय त मनोज तिवारी के गीत सुनीं भा उनुकर फिलिम देख लीं. जिनिगी के तिखर घाम में ई दुनु रउरा के अपना छाँहे अँकवार लीहें. जब मनोज तिवारी से भेंट होखे त कलम बिना सवाल जबाब के ना रहि पावे.

मनोज जी, भोजपुरी गीतन में मिठास के परंपरा बाजार के भेट चढ़ गइल बा आ लोकगीतन में आजु अश्लीलता आ फूहड़ता के छौंक लगावल जात बा. एह पर का कहब ?
एह बात के दरद हमनी सभही के बा. आजु मनुहार, प्यार आ दर्द के परिभाषो लोकगीतन में बदले लागल बा. बाकिर जवना दिने सुने देखे वाला एकरा के नकार दीहें ओही दिने भोजपुरी गीतन के मिठास लवटि आई.

आपके गीतन से सगरी व्यवस्था हिल जात रहुवे. ‘पियजिया अनार हो गइल,’ आजुओ लोग के इयाद बा जवन अटल सरकार के मुसीबत में डाल दिहले रहुवे. अब आपके तरकश से गीत संगीत के अइसन तीर कमे निकलत बा. कारण ?
‘जिया ये बिहार के लाला…’ गीतो त संगीत के बाजार में परंपरागत व्यवस्था के तूड़ले रहल. कुछ लोग कवनो कीमत पर तरक्की पावल पसंद करेला जबकि हम कबो अपना गीतन से समझौता ना करीं.

आपके क्राईम बेस शो ‘सावधान इंडिया’ त बहुते पापुलर भइल बा, कइसन लागत बा पहिला हाली कवनो क्राइम बेस शो के एंकरिंग करत ?
हमरा ला ई ना भूलाएवाला आ एकदमे अलग तरह के अनुभव वाला शो ह एह शो में हम जननीं कि यूपी के जुर्म के तह में का बा. ई शो हमरा सोझा अनेके चुनौती खड़ा कर दिहले बा बाकिर हम डगमगाइल नइखीं.

मनोज जी, रउरा अतना लमहर सिनेमाई सफर कइले बानी आ आजुओ सफलता राउर गोड़ चूमत बिया. एकरा पीछे कवन राज बा ?
आप फिल्म लाईन में होखीं भा कवनो दोसरा लाईन में. सफलता पावे के सबले नीमन तरीका इहे बा कि जवन हईं तवने रहीं आ उहे करीं जवन रउरा नीक लागे.

आपके अतना उर्जा कहाँ से मिलेला. भारत समेत दुनिया भर में होखे वाला राउर शो आ फेर शूटिंग शेड्यूल ?
बस कसरत करीलें आ फिट रहीलें. हमार व्यस्तते हमरा के उर्जा देले.

‘गैंग ऑफ वासेपुर’ क बाद हिंदी सिनेमा में रउरा आवाज में गीत फेर कब सुने के मिली ?
बस जल्दिए कुछ अउरी बड़ हिन्दी फिलिमन में हमार गाना सुनाई दी.

आपके सीसीएल में शामिल भोजपुरी दबंग टीम के कप्तान बनावल गइल बा. माने कि एहिजो राउर दबंगई देखे के मिली ?
हमरा एह बात के मलाल हमेशा रहल कि दोसरा भाषा के स्टार क्रिकेट खेलेलें त भोजपुरी स्टारन के एहसे फरका काहें राखल गइल बा ? अब हमार ई मलाल दुर हो गइल बा.

राजनीति क पिच पर चौका छक्का कहिया मारब ?
फिलहाल त हमार पूरा धेयान अपना शेड्यूल कैलेंडर पर बा. एह में शोज, फिलिम, सावधान इंडिया, एड, ब्रांडिंग, क्रिकेट, सिंगिंग वगैरह का बाद शायदे जगहा बाचे.

मनोज जी, भोजपुरी सिनेमा के मौजूदा गड़बड़झाला पर का कहब आप ?
एह दौर में कुछ गड़बड़झाला जरूर बा बाकि संगही संगे बढ़न्ती के लक्षणो बा. जब गड़बड़झाला के दूर कर लिहल जाई त बढ़न्ती के अउरी बल मिली इहो तय बा.

बचपन के कुछ याद ताजा कर सकीलें का ?
हमार शुरूआती पढ़ाई-लिखाई बिहार के भभुआ के अतरवलिया गांव पर भइल रहे. साल 1985 में सेवा निकेतन उच्च विद्यालय बरहली, भभुआ से हाई स्कूल पास कर के आगा के पढ़ाई ला बनारस आ गइनी आ ओहिजे से हम बी.पी.एड. आ एम.पी.एड.कइनी.

संगीत का तरफ रुझान कब आ कइसे भइल ?
संगीत त हमरा खून में रचल-बसल बा. हमार बाबूजी गांव जवार में शास्त्रीय संगीत के नामी गायक रहनीं, साल 1983 में जब हम 13 साल के रहीं त माथ पर से बाबूजी के हाथ उठ गइल. उनुका सराध का दिने कवनो कलाकार के हारमोनियम हमरा घरे छूट गइल. ओकरा के उठा के हम घरे ले अइनी आ गाहे बगाहे ओह पर अंगुरी थिरके लागल. एकरे बाद हम खुद ब खुद बांसुरी बजावल सीखनी आ रफी के गीत ‘जल्दी जलदी चला रे कहारा-सूरज डूबे रे नदिया’ के धुन निकलनी. एहीजे से संगीत ओर हमार झुकाव बढ़ल. गाँव से बनारस अइला पर हम एहिजा के सांगीतिक आ सांस्कृतिक परम्परा के करीब से समुझनी. भाई साधु शरण हमरा के भोजपुरी संगीत आ गवनई के कैरियर बनावे ला उकसवले. बनारसे में दशाश्वमेध घाट पर हमार पहिलका सार्वजनिक प्रस्तुति ‘राममय रात’ भइल जवना में भारी भीड़ जुटल आ हमार गवनई सराहल गइल. एहिजे हमरा शुरुआती पहिचान मिलल.

अपना संगीत सफर का बारे में कुछ अउर बताईं.
हमार भाई साधु शरण हमरा गीतन के दू गो कैसेट बनववलन. ऊ कैसेट रहली स ‘भोजपुरी हंगामा’ आ ‘रामभजन’. दुनु ना चलल आ हम एकरा के चुनौती मान लिहनी साल 1996 तकले के दौर बहुते संघर्ष भरल रहल. वाराणसी के एगो स्टेज शो में त हम पुलिसिया बर्बरतो भुगतनी. गुलशन कुमार से मिले ला कई-कई दिन ले हम टी-सीरीज का दरवाजा पर खड़ा रहत रहीं, बाकिर मुलाक़ात ना हो पावत रहे. एकाध बार टी-सीरीज में गावहू के मिलल लेकिन हमरा के नकार दिहल गइल. बाकिर हमहू हार ना मननी. साल 1996 में वैष्णव देवी के यात्रा से लवटनी त डरत सहमत हम एख बेर फेरू टी-सीरीज के दूआर खटखटवनी. ओह दिन गुलशन कुमार जी मौजूद रहनी. हमरा गीतन के तइयार कैसेट ‘मइया के महिमा’ जवन कई बेर रिजेक्ट भइल रहे, गुलशन कुमार के बहुते नीक लागल. उहाँके हमरा आवाज़ के तारीफ करत कहनी कि, तुम्हारी आवाज़ बहुत मृदुल है। हमरा आँखि से लोर बह उठल. गुलशन कुमार ओह दिन हमरा के नया नाम मनोज तिवारी ‘मृदुल’ दिहनी. टी-सीरीज से निकलल हमार पहिलका कैसेट ‘मईया के महिमा’ सुपर हिट रहल. एह कैसेट से हमरा गंभीर कलाकार के पहचान मिलल. एकरा बाद बगलवाली, सामने वाली, चूड़ी खनका के वगैरह हिट कैसेटन के लकीर लाग गइल.

भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे ला का करत बानी ?
भोजपुरी त हमार आत्मा ह. एकरा के समुचित सम्मान दिआवे ला हमार सगरी जीवन समर्पित बा. भोजपुरी के बढ़न्ती से जुड़ल हर संघर्ष के हमार सहयोग आ समर्थन रहेला. भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में डलवावे ला हम राजनीतिज्ञन क बीच भरपूर लॉबिंग कइले बानी. सोनिया गांधी से लगाइत श्रीप्रकाश जायसवाल तक सबसे बतियवले बानी.


(शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा)

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