‘खून भरी हमार मांग’ के सबले कमजोर पक्ष बा एकर निर्देशन

– संकेत बी॰ बेदर्दी

SanketBedardi
हालही में रिलीज भइल भोजपुरी फिलिम ‘खून भरी हमार मांग’ के निर्देशन पक्ष एतना कमजोर बा कि दर्शक सिनेमाघर में ई कहला से नइखन चुकत कि केतना बेकार निर्देशन बा एह फिलिम के कि तनिको समझ में नइखे आवत.

दर्शकन से बतियवला आ खुद फिलिम देखला के बाद इहे मालूम भइल कि सचहू फिलिम के निर्देशन पक्ष बहुते कमजोर बा. राजकुमार आर॰ पाण्डेय के बाकी फिलिमन का अपेक्षा एकर निर्देशन बहुते कमजोर बा. मल्टी स्टार पावर देखावे का चक्कर में फिलिम के कहानी पीछे छूटत नजर आवत बा.

फिलिम के पहिलका हिस्सा मजबूत बा लेकिन मध्यांतर का बाद फिलिम बिखरात गइल बिया. कहानी में जहां भावुक दृश्य बा ओहिजा रोमांटिक गाना के जबरन पेश क के ओह सीन के मार्मिकता खतम कर दिहल गइल बा.

कहानी में मोना के प्रेमी नकारात्मक किरदार में बा लेकिन पूरा फिलिम में ओहके सकारात्मक किरदार में राखल गइल बा. जवन कि दर्शकन के पचत नइखे. मोनालिसा पर फिलिमावल मुजरा दर्शक लोगन के थिर क देत बा जबकि अमूमन मुजरा देख के दर्शकन में उत्साह देखाई देला. फिलिम में कहानी से बेसी कलाकार होखे का चलते सभकर किरदार सही से उकेरे में निर्देशक चुक गइल बाड़न. अइसन लागत बा कि दर्शक फिलिम ना कलाकारन के जमावड़ा देखे आइल बाड़े. फिलिम में ‘करूआ तेल’ गाना जबरन घुसावल गइल बा. कहानी से एह गाना के दूर दूर ले कवनो मतलब नइखे. राजकुमार आर॰ पाण्डेय कहीं ना कहीं मनमोहन देसाई के नकल करे लागल बाड़े आज काल्ह. बाकिर उनुका याद राखे के चाहीं कि मनमोहन देसाई के फिलिमन में कहानिए खास होखत रहे.

एह फिलिम के देखला से मन में सवाल उठे लागत बा कि आखिर राजकुमार आर॰ पाण्डेय के निर्देशन दिन प दिन कमजोर काहे होखल जात बा.


संकेत बेदर्दी गोपालगंज के हउवन आ फिलहाल भागलपुर में सक्रिय पत्रकार बाड़ें. बेदर्दी आपनो एगो वेबसाइट चलावेलें जवना के नाम हऽ
www.filmidose.biz

ई त भइल एगो समीक्षा. रउरो सभे में से केहू फिलिम के देखले होखे त एह बारे में आपन राय देव. ना त प्रचारक लोग के ‘ले दही’ त चलते रहेला आ चलतो रही जबले रउरा सभे फिलिम देखला का बाद आपन राय ना बतावत रहब.
– संपादक

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