गाँव का नौटंकी से अपना अभिनय के शुरुआत करे वाला मनोज टाइगर आज भोजपुरी सिनेमा के मजबूरी बन गइल बाड़न. अब तक करीब पचीस गो भोजपुरी फिल्मन में कामेडियन बन के अपना अभिनय के जौहर बिखेर चुकल बाड़न, इनकर सबसे बढ़िया फिल्म बतासा चाचा आ रहल बा जवन कि बाल श्रम विषय पर बनल बा.

Manoj Tiger in and as Batasa Chacha

मनोज सिंह उर्फ मनोज टाइगर आजमगढ़ जिलाके फूलपुर तहसील के जमुहट गाँव के हउवें. बाबूजी किसान रहलें आ अपना बेटा के इलाहाबाद से स्नातक करा के सरकारी नौकरी में देखे के सपना पलले रहलन. बाकिर मनोज के मन पढ़ाई में कम आ अभिनय में बेसी लागत रहे. गाँव में जबे रामलीला भा नौटंकी के मंचन होखत रहे त मनोज कवनो ना कवनो किरददार जरुर करत रहलें. उनका एह काम के घर में बहुत विरोध होखल करे. आजिज आ के मनोज मुंबई के राह धर लिहलन जहाँ ऊ जुहू में शशि कपूर के पृथ्वी थियेटर में काम करे लगलें आ बादमें पंचमदंग नाम के एगो नाट्य मंडली बनवले.

एही दौरान इनकर मुलाकात आयशा जुल्का से भइल जिनका इनकर नाटक अंतरनाद बहुत बढ़िया लागल रहे. ऊ इनका के अपना साथे फिल्मन में काम करे के प्रस्ताव दिहली आ ओहिजे से शुरु भइल मनोज टाइगर के फिल्मी कैरियर.के शुरुआत भइल आ तब से फेर पीछे मुड़ के ना देखलन. दस साल ले रंगमंच पर काम कइला का बाद मनोज टाइगर के सल २००५ में भोजपुरी फिल्म चलत मुसाफिर मोह लियो रे में मुख्य हास्य अभिनेता के रोल मिलल. एह फिल्म के शूटिंग पूर्वांचल के अनेक जगहा का साथ साथ चौरौ चौरा आ गौरीबाजार में भइल. फिल्म सुपर हिट रहल. ओकरा बाद मनोज टाइगर के दुसरका भोजपुरी फिल्म मिलल निरहुआ रिक्शावाला में बतासा चाचा के किरदार कइलें. बतासा चाचा का रुप में उनकर काम अतना बढ़िया रहल कि तब से सिनेमा उद्योग में इनका के लोग बतासा चाचा का नामे से जाने लागल. ओकरा बाद त मनोज टाइगर का लगे फिल्मन के लाइने लाग गइल.

साल २००९ में निर्माता आदर्श जैन मनोज टाइगर के अपना फिल्म पवन पुरवईया में बतौर नायक लिहलें. अब बतासा चाचा का बारे में मनोज टाइगर के कहनाम बा कि बतासा चाचा फिल्म उनका जिनिगी के सबसे बढ़िया फिल्म हवे आ एहुमें ऊ बतौड़ नायक बाड़े. फिल्म के कथानक बालश्रम का समस्या पर आधारित बा आ फिल्म के समाजसेवी योगेश पाण्डेय के भरपूर सहयोग मिल रहल बा.


(स्रोत : रंजन सिन्हा )

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