वइसे त सुदीप पाण्डे बहुते फिल्मन में काम कर चुकल बाड़ें बाकिर “बलवा” ओह सब से अलगा बा. निर्माता राधे शर्मा के कहना बा कि एह फिल्म के कहानी एगो काल्पनिक गाँव शिवपुर के बा जहाँ पिछला दस साल से बाहुबली डकैत भीमा आपन आतंक पसरले बा. ओकर दबदबा अगल बगल के समूचा जवार पर बा. भीमा के दबदबा अइसन बा कि जेही ओकरा खिलाफ आवाज उठावेला ओकरा के ऊ कालीस्थान में बलि दे देबेला.

ओही गाँव के सभ्य सरपंच निर्णय विश्वकर्मा के बेटा “बलवा” बचपने से एह अन्याय का खिलाफ आवाज उठावत आवत बा. एक दिन जब बाति ओकरा बर्दाश्त के बाहर हो जात बा त ऊ भीमा के महल में आग लगा देत बा. एह बाति के जानकारी जब विश्वकर्मा के होत बा त ऊ भीमा का डर से रातेरात परिवार समेत गाँव छोड़ देत बा. शहर में बलवा के नौकरी मिल जात बा त विश्वकर्मा ओकरा के किरिया धरा देत बाड़न कि घरे मत अइहे आ अपने गाँवे लवटि जात बाड़न.

दस साल बाद बलवा के पता चलत बा कि ओकरा बाप आ बहिन के भीमा मरवा दिहले बा. ई सुनला का बाद बगावत के चोला पहिरले बलवा अपना गाँवे चहुँपत बा.

लेखक निर्देशक राधे शर्मा, निर्देशक चुनमुन पंडित, गीतकार आ संगीतकार अमन श्लोक, छायाकंनकर्ता देवेन्द्र तिवारी के एह फिल्म के खास खास कलाकारन में सुदीप पाण्डेय, प्रिया शर्मा, रीमा पटेल, बाल गोविन्द, पंकज मेहता वगैरह के नाम बा.


(स्रोत – संजय भूषण पटियाला)

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