अगर रउरा बिहार में रहीले, सिनेमो देखीले, भोजपुरी से लगावो बा त काहे ना आपन राय लिख के सगरी लोग के जनाइले कि कवन फिलिम कइसन बनल बिया ?

अँजोरिया के फिल्म अध्याय में फिल्म प्रचारकन के लिखल रपट नियमित रुप से छपत रहेला. ओह लोग के सुभाव होला कि अपना दही के मीठ आ दोसरा के दही के खट्टा बतावल करसु. अलग बाति बा कि अँजोरिया के सुभाव देखत ऊ लोग हमरा लगे दोसरा का बारे में कवनो गलत टिप्पणी ना भेजे. खैर ई दोसर बाति बा. असल बात ई बा कि भोजपुरी सिनेमा के आपन समाज कवना रुप में देखत बा इहो जानल जरुरी बा.

प्रचारकन का रिपोर्ट का हिसाब से कवनो भोजपुरी फिल्म सुपर डुपर हिट फिल्म से कम ना होली सँ, कवनो अभिनेता सुपर स्टार से कम ना होखसु. अलगा बाति कि कमाई का लालच से कूद के आइल निर्माता फाइनेंसर आ वितरक का पाट में पिसा जाले आ फेर ना लवटसि. कुछ लोग जे एह नदी के थाह लिहले बा ऊ लोग जरुर बाजार में बरकरार बा.

कुछ दिन पहिले हम महुआ चैनल पर भोजपुरी के अनदेखी के चरचा चलवले रहीं आ खुशी के बात बा कि ओकरा बाद पाठक लोग के प्रतिक्रिया एह बाति के समर्थन कइलसि. अलगा बाति बा कि गाछ ना बिरिछ तहाँ रेंड़ परधान. भोजपुरी के दोसर कवनो चैनल अतना व्यापक रुप से मौजूद नइखे से लोग मजबूरी में महुआ से सटल बा. महुआ के लगाव भोजपुरी से ना हो के कमाई से बा आ एह फेर में ओहिजो उहे हो रहल बा जवन भोजपुरी लेखन में हो रहल बा. बिगड़ल हिन्दी के भोजपुरी कहात लिखात बा जवना के अँजोरिया हमेशा से विरोध कइले बिया. इहाँ तक कि समाचार वाचको लोग के बोली सुन के तनिको ना लागे कि ऊ लोग कबो भोजपुरी में बोलत बतियात होखी. एकाध गो धारावाहिकन के मुख्य पात्र तक भोजपुरी ठीक से ना बोल पावसु.

सिनेमा के हाल टीवी से बेहतर नइखे. बाकिर दुर्योग से हम सिनेमा त एकदमे ना देख पाईं, टीवी चैनल त कबो समय मिलल त रिमोट उठा के देखियो लिहिले. एह चलते हम अब बड़हन भोजपुरी समाज के सहारा लिहल चाहत बानी. ओह लोग के जे सिनेमा देखेला, लिखे के क्षमता राखेला, आ इंटरनेट के इस्तेमाल करे ला. अगर रउरा हर हफ्ता के रिलीज फिल्मन का बारे में आपन बेबाक राय लिख भेजीं त बहुत खुशी होखी. ध्यान एके बात के रहे कि केहू के व्यक्तिगत रुप से नीचा मत देखावल जाव. अंजोरिया खातिर हर ऊ आदमी प्रशंसनीय बा जवन कवनो तरह से भोजपुरी का साथ जुड़ल बा आ एकरा में आपन काम कर रहल बा. अब एह दिशाईं कबो महेन्द्र मिसिर जइसन लोग के बारे में कुछ नाजायजो सुनाव त अनसुनी कर दिहल अँजोरिया के सुभाव जइसन हो गइल बा. मकसद होखे के चाहीं भोजपुरी के बेहतरी के, केहू के टाँग खिंचला के ना. से जब रउरा कवनो भोजपुरी फिलिम देखीं त ओकरा बारे में एक पन्ना के लेख लिख भेजीं. साथ में आपन पूरा परिचय जरुर दीं. राउर लेख प्रकाशनीय होई त जरुर प्रकाशित होखी. धीरे धीरे एह काम से भोजपुरी में कुछ बढ़िया फिल्म समीक्षक निकल अइहें जवना लोग के मिले वाला सम्मान आ प्रचार कवनो मानदेय से बेसी होखी. बस राउर प्रतिक्रिया ईमानदार होखे के चाहीं, आजु भोजपुरी में फिल्म समीक्षकन के बेहद कमी बा आ एह कमी के अगर रउरा पूरा सकत होखीं त राउर स्वागत बा.

संपादक, अँजोरिया

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