भोजपुरी सिनेमा के ६२ बरिस के सफ़र – १९४८ से २०१० तक

– मनोज भावुक


भोजपुरी सिनेमा अब ५० साल के प्रौढ़ होखे वाला बा. लेकिन उम्र के एह पडाव पर भी एकरा में प्रौढावस्था वाली गंभीरता नइखे.जस -जस उमिर बढ़ल बा. लड़कपन बढ़त गइल बा आ अइसन लड़कपन जवना के समय आ इतिहास कबो माफ़ ना कर पाई .अब त जवना डाली पर बानी ओही डाली के काटे वाली कहावत चरितार्थ हो रहल बा. हम भोजपुरी सिनेमा पर पीछला डेढ़ दशक से लिख रहल बानी. १९६१ से लेके अब तक के ५०-६० गो फिल्म के कई-कई बार देखला के बाद फेर कुछ लिखे के मन करत बा. हाल हीं में २६ दिसंबर २०१० के एयर पोर्ट अथारिटी ऑफ़ इंडिया के आफिसर्स क्लब में भोजपुरी सिनेमा के ५० साल के सफ़र के बारे में एह दौर के सुपर स्टार मनोज तिवारी से विस्तार से बात चीत कइले रहनी ,जवना के प्रसारण कई-कई बार हमार टी वी पर भइल. मनोज जी भी भोजपुरी सिनेमा के वर्त्तमान स्थिति से संतुष्ट नइखन . आज से एक दशक पहिले २००२ में हम भोजपुरी सिनेमा खातिर चुनौती , संभावना आ एकरा भविष्य पर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन , भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार सुजीत कुमार, राकेश पाण्डेय, कुणाल सिंह, रवि किशन , वरिष्ठ निर्माता मोहन जी प्रसाद, अशोक चंद जैन , संजय राय, विनय सिन्हा,किरण कान्त वर्मा, मुक्ति नारायण पाठक आ फिल्म समीक्षक आलोक रंजन समेत लगभग तीन दर्जन फिल्मी हस्तियन के साक्षात्कार कइले रहनी जवन भोजपुरी-हिन्दी के कई गो पत्र-पत्रिकन में प्रकाशित भइल. हमरा ओह शोध पत्र के नाम रहे भोजपुरी सिनेमा के विकास-यात्रा. ओह में हम भोजपुरी सीरियल आ टेलीफिल्म के भी बात कइले रहनी. ………अब वर्ष २०११ आ गइल . आईं भोजपुरी सिनेमा के एह सफरनामा पर विचार कइल जाय कि आज हमनी के कहाँ बानी सन आ आज से ५० साल पहिले कहाँ रहनी सन.

फिल्मी दुनिया में भोजपुरी के प्रवेश

फिल्मी दुनिया में भोजपुरी के प्रवेश के कहानी बड़ा रोचक बा. मुम्बई के फिल्म संसार में भोजपुरी के विजय प्रवेश भोजपुरी गीतन के माध्यम से भइल आ एकर श्रेय अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मलेन के भूतपूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय मोती बी ए जी के जाता. सन १९४८ में एगो फिल्म बनल नदिया के पार ,जवना के निर्देशक रहलें किशोर साहू. इ फिल्म मछुआ -मल्लाह के जिनिगी पर आधारित रहे , जवना के संवाद अवधी में रहे आ ८ गो गीत भोजपुरी में रहे .अधिकाँश गीत दिलीप कुमार आ कामिनी कौसल पर फिल्मावल गइल रहे. गीत लिखले रहनी मोती बी ए जी.इ गीत जेही सुने उहे कहे हाउ स्वीट , हाउ स्वीट. फेर त लोग के भोजपुरी गीतन के चस्का लाग गइल आ हिन्दी फिल्म में भोजपुरी गीत रखे के रिवाज चालू हो गइल . कल्पना करीं बंगाली, पंजाबी, गुजराती आ मराठी माहौल में भोजपुरी के इ शानदार प्रवेश केतना सुखदायी रहल होई. भोजपुरिया स्वाद लोग के अच्छा लागल त चीखना के रूप में एकर इस्तेमाल होखे लागल . मतलब लोग हिन्दी फिल्म में भोजपुरी के गीत या भोजपुरिया टोन, या ओकर मिजाज त लेबे बाकिर पूरा के पूरा फिल्म भोजपुरी में बनावे खातिर केहू तैयार ना रहे.

पहिला फिल्म – “गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो”

त रउरा देखनी कि १९४८ में जब फिल्मकार लोग जान गइल कि भोजपुरी में जादू बा. एकर मिठास लोग के ललचावत बा . …….इ घी के तरह बा, जवना भोजन में डाल दीं, उहे स्वादिष्ट हो जाई. त फिल्मकार लोग भोजपुरी के इस्तेमाल सिर्फ छौंक लगावे खातिर करे लागल. …..बाकिर केहू complete भोजपुरी फिल्म बनावे खातिर तैयार ना रहे. बाकिर उ शुभ घड़ी भी आइल जब भोजपुरी फिल्म के अनिश्चित काल तक खातिर बंद पडल निर्माण द्वार हमेशा-हमेशा खातिर खुल गइल. एह बारे में पत्रकार आलोक रंजन भोजपुरी चलचित्र संघ के स्मारिका में लिखले बाडन की “१६ फरवरी १९६१ भोजपुरी सिनेमा खातिर एगो ऐतिहासिक तिथि बा . आजे का दिन पटना के शहीद स्मारक पर भोजपुरी के पहिला फिल्म गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो के मूहूर्त समारोह संपन्न भइल रहे आ फेर विहान भइला शूटिंग शुरू हो गइल . रउरा सोच सकेनी कि हिन्दी फिल्म के क्षितिज पर एगो नया शक्ति के उदय केतना क्रांतिकारी कदम रहल होई. उहो ओह समय में जब केहू से भोजपुरी फिल्म बनावे के बारे में बतियावल बुरबके बनल रहे. बाकिर हर युग में अइसन बुरबक आ सनकी होलें जे युग निर्माण करेले. अइसने एगो सनकी रहलें नाजीर हुसैन. आज उनका के भोजपुरी सिनेमा के भीष्म पितामह कहल जाला. त नाजीर साहेब भोजपुरी फिल्म बनावे खातिर बेचैन रहलें. भोजपुरी फिल्म बनावे के प्रेरणा उनका देशरत्न डा ० राजेन्द्र प्रसाद से मिलल रहे. जब उ अपना मन के बतिया राजेंदर बाबू के सामने रखले रहले त राजेंदर बाबू कहले रहले कि बात त बहुत नीक बा. बाकिर एकरा खातिर बहुत हिम्मत चाहीं .ओतना हिम्मत होखे त जरूर बनाईं.

ओतना हिम्मत रहे नाजीर साहेब के पास. उ एगो स्क्रिप्ट लिखले जवना के नाम रखले- गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो आ फेर वक्त के रफ़्तार के साथे निर्माता ढूंढें के कोशिश अनवरत जारी रहल. इ एगो अइसन अन्हरिया सफ़र रहे जवना के भोर कब, कहाँ आ कैसे होई केहू ना जानत रहे. चारो तरफ बस एगो दरदीला सन्नाटा पसरल रहे. अइसन अन्हरिया सफ़र में नाजीर साहेब के हमसफ़र बनलें – निर्माता के रूप में विश्वनाथ शाहाबादी, निर्देशक के रूप में कुंदन कुमार, हीरो के रूप में असीम कुमार आ हिरोइन के रूप में कुमकुम . जब काफिला आगे बढ़ल त एह में रामायण तिवारी, पदमा खन्ना, पटेल आ भगवान सिन्हा जइसन शख्सियत भी शामिल हो गइलें. गीत के जिम्मा शैलेन्द्र आ संगीत के जिम्मा चित्रगुप्त जी ले लेलन. फेर का . फिल्म ‘ गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो बनल आ १९६२ में रीलिज भइल . तब गाँव त गाँव शहर के लोग खाइल-पियल भुला गइल . जहां वितरक लोग एह फिलिम के लेबे में नकुर-नुकुर करत रहे , अब दांते अंगूरी काटे लागल. लोग जहां -तहां बतियावे – गंगा नहा, विश्वनाथ जी के दर्शन करs आ तब घरे जा.

एह फिलिम के मोल रहे दर्शक से एकर आत्मीयता, दहेज़, बेमेल विवाह, नशाबाजी, सामंती संस्कार आ अंधविश्वास से निकलल समस्या भोजपुरिया लोग के अपना जिनिगी के समस्या लागल . गीतकार शैलेन्द्र आ संगीतकार चित्रगुप्त गीतन के अतना मोहक बनवलन कि गीत गली-गली बाजे लागलन स.

गंगा मैया के बाद भोजपुरी सिनेमा – (१९६१ से १९६७ )

पहिला भोजपुरी फिल्म गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो के गीत पूर्वोत्तर भारत के गाँव-गाँव में गूंजे लागल . पांच लाख के पूंजी से बनल ‘ गंगा मइया…’ लगभग ७५ लाख रुपिया के व्यवसाय कइलस. इ देख के कुछ व्यवसायी लोग भोजपुरी फिल्म के सोना के अंडा देवे वाली मुर्गी बुझे लगलन. नतीजा भइल कि भोजपुरी फिल्म निर्माण के जवन पहिलका दौर १९६१ से शुरू भइल त उ १९६७ तक चलल ………एह दौर में दर्जनों फिल्म बनल बाकिर लागी नाहीं छोटे राम आ विदेसिया के छोड़ के कवनो फिल्म के प्रदर्शन अच्छा ना रहे. एह दूनो फिल्म के गीत कमाल के रहे.

दस साल (१९६७-१९७७) के चुप्पी

१९६७ के बाद दस साल तक भोजपुरी फिल्म निर्माण के सिलसिला ठप रहल . १९७७ में विदेसिया के निर्माता बच्चू भाई साह एह चुप्पी के तोड़े के जोखिम उठवलें.उ सुजीत कुमार आ मिस इंडिया प्रेमा नारायण के लेके पहिला रंगीन भोजपुरी फिल्म दंगल के निर्माण कइलें. नदीम -श्रवण के मधुर संगीत से सजल इ दंगल व्यवसायो के दंगल में बाजी मार ले गइल.
भोजपुरी फिल्म के धमाकेदार शुरुआत के बावजूद दस साल १९६७ से १९७७ तक भोजपुरी फिल्म निर्माण लगभग बंद रहल. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के अइसन हालत भोजपुरिया संस्कार आ संस्कृति के भोथर छूरी से ह्त्या करे वाला फ़िल्मकार लोग का वजह से भइल.
१९६७ से १९७७ के अंतराल में जगमोहन मट्टू के एगो फिल्म मितवा भी बनल जवन १९७० में उत्तर प्रदेश आ १९७२ में बिहार में प्रदर्शित भइल. एह तरह से इ फिल्म पहिलका आ दूसरका दौर के बीच के कड़ी रहे.

भोजपुरी फिल्म (१९७७ से १९८२ )
१९७७ में प्रदर्शित दंगल के कामयाबी एक बेर फेर नाजीर हुसैन के उत्प्रेरित क देलस आ उ राकेश पाण्डेय आ पद्मा खन्ना के शीर्ष भूमिका में लेके बलम परदेसिया के निर्माण कइलें. अनजान आ चित्रगुप्त के खनखनात गीत-संगीत से सुसज्जित बलम परदेसिया रजत जयन्ती मनावे में सफल भइल .

तब एह सफलता से अनुप्राणित होके भोजपुरी फिल्म के तिलस्मी आकाश में निर्माता अशोक चंद जैन के धमाकेदार अवतरण भइल आ उनकर फिल्म धरती मइया आ गंगा किनारे मोरा गाँव हीरक जयन्ती मनवलस .

भोजपुरी फिल्म निर्माण के दूसरका दौर १९७७ से १९८२ तक चलल .

१९८३ में ११ गो फिल्म बनल जवना में जवना में मोहन जी प्रसाद के हमार भौजी , १९८४ में नौ गो फिलिम बनल जवना में राज कटारिया के भैया दूज, १९८५ में ६ गो फिलिम बनल जवना में लाल जी गुप्त के नैहर के चुनरी आ मुक्ति नारायण पाठक के पिया के गाँव अउर १९८६ में १९ गो फिल्म बनल जवना में रानी श्री के दूल्हा गंगा पार के हीट भोजपुरी फिल्म व्यवसाय के खूब आगे बढ़वलस .

भोजपुरी सिनेमा के नयका युग या वर्त्तमान युग –

१९८२ से २००२ तक त अइसन हो गइल की कब फिल्म बने आ कब परदा से उतर जाय पते ना चले. इ समय भोजपुरी सिनेमा खातिर सबसे बुरा रहे. २००३ में मनोज तिवारी के ससुरा बड़ा पैसावाला के सुपर-डुपर हिट भइला के बाद भोजपुरी सिनेमा के कायाकल्पे हो गइल. २००३ के बाद के समय के भोजपुरी सिनेमा के नयका युग या वर्त्तमान दौर कहल जाता. आईं अब एह दौर के बात कइल जाय . २००३ में मनोज तिवारी आ रानी चटर्जी अभिनीत फिल्म ससुरा बड़ा पैसावाला सुपर-डुपर हीट भइल. ओही समय मोहन जी प्रसाद रवि किसन के लेके सैया हमार आ सैया से कर द मिलनवा हे राम दू गो फिल्म बनवले . दूनो फिल्म अच्छा बिजनेश कइलस बाकिर मोहन जी प्रसाद के ही अगिला फिल्म पंडित जी बताईं ना वियाह कब होई, सुपर-डुपर हीट भइल. फेर त भोजपुरी सिनेमा के किस्मते जाग गइल. अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, जूही चावला, मिथुन चक्रवर्ती जैसन हिन्दी के नामी कलाकार भोजपुरी फिल्म में काम करे लागल. भोजपुरी फिल्मन के बजट बढ़ गइल आ एकर शूटिंग लन्दन , मारीशस आ सिंगापुर में होखे लागल. एह दौरान हिन्दी के कई गो बड़ निर्माता -निर्देशक सुभाष घई , सायरा बानू आ राज श्री प्रोडक्शन जैसन ग्रुप भोजपुरी फिल्म बनावे खातिर अग्रसर भइल.

रवि किसन आ मनोज तिवारी के अलावे भोजपुरी सिनेमा के आकाश पर कई गो नया हीरो चमकले. दिनेश लाल यादव निरहुआ, पवन सिंह, पंकज केसरी, विनय आनंद, कृष्णा अभिषेक आ नयी हिरोइन रानी चटर्जी ,नगमा, भाग्यश्री, दिव्या देसाई, पाखी हेगड़े, रिंकू घोष , मोनालिसा, श्वेता तिवारी जैसन कलाकार के दस्तक से भोजपुरी सिनेमा रफ़्तार पकड़ लेलस. एही पीरियड में कल्पना जैसन गायिका उभर के अइली.
वर्ष २००९ भोजपुरी मनोरंजन जगत खातिर काफी चर्चा में रहल. एगो लम्बा इंतजार के बाद हमार टी वी समेत भोजपुरी के कई गो चैनल आइल. भोजपुरी फिल्म के ट्रेड मैगजीन भोजपुरी सिटी,भोजपुरी संसार समेत कई गो फिल्म के पत्रिका शुरू भइल. उहँवे एह साल के सबसे बड़ क्षति रहे ससुरा बड़ा पैसवाला के निर्माता सुधाकर पाण्डेय के आकस्मिक मौत.

भोजपुरी सिनेमा २०१० –

अब आईं बात कइल जाय भोजपुरी सिनेमा २०१० के…. २०१० भोजपुरी सिनेमा खातिर ना त बहुत अच्छा रहल , ना ही बहुत खराब. एह साल के सबसे बड़ उपलब्धि रहल मनोज तिवारी के फिल्म भोजपुरिया डान के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के आमंत्रण मिलल . साथही भोजपुरी के दू गो स्टार मनोज तिवारी आ श्वेता तिवारी के बीग बॉस सीजन -४ में गइल . २०१० में निर्माता प्रवेश सिप्पी जैसन फिल्मकार भी भोजपुरी सिनेमा जगत में आ गइलें. उनकर फिल्म मृतुन्जय पहिला बार पूरा देश में एक साथ प्रदर्शित भइल.एह फिल्म के नायिका रिंकू घोष फिल्म विदाई से भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में जवन मुकाम बनवली , उ आज ले बरकरार बा. मनोज तिवारी भोजपुरिया डान से वर्ष २०१० में दू साल बाद वापसी कइलें जवना के फ़ायदा एह फिल्म के साथे-साथ मनोज तिवारी के भी मिलल. न्यू कमर्स हिरोइन में एह साल गुंजन पन्त अपना फिल्म मार देब गोली , केहू ना बोली से टाप थ्री में जगह बनवली. भोजपुरी के एगो और सुपर स्टार विनय आनंद ननिहाल जैसन फिल्म देके आपन स्थिति मजबूत किले.अनारा गुप्ता आ संजय पाण्डेय भी कई गो हीट फिल्म दिहल लोग. पवन सिंह आ मोनालिसा के एक और कुरुक्षेत्र चर्चा में रहल.
अगर फिल्म वितरण के हिसाब से देखल जाय त एह साल अच्छा कमाई करे वाली फिल्म में ‘ देवरा बड़ा सतावेला, दाग, दामिनी, सात सहेलियां के नाम लीहल जा सकेला. इ सब फिल्म दू करोड़ से तीन करोड़ तक के व्यवसाय कइले बाडी स. साथहीं भइया के साली ओढनिया वाली, सैया के साथ मडैया में, लहरिया लूट ए राजाजी, ज़रा देब दुनिया तोहरा प्यार में , आज के करण-अर्जुन आ रणभूमि भी अच्छा कमाई क इले बा.
लेकिन हमार माटी में दम बा. धर्मात्मा, बलिदान, तू ही मोर बालमा फिल्म से ओकरा निर्माता के निराशा हीं हाथ लागल. एकरा बाद त दिल, साथी रे , चंदू की चमेली ,तेज़ाब, किसना कइलस कमाल भी निराशे कइलस.

हिट-सुपर हीट के दृष्टि से देखल जाय त निरहुआ नम्बर वन पर बाडन. दाग ,सात सहेलियां, आज के करण-अर्जुन , शिवा निरहुआ के एह साल के सफल फिल्म ह. हं पवन सिंह जहां रहले ओह से ऊपर उठल बाडन. देवरा बड़ा सतावेला, सैया के साथ मडैया में आ भइया के साली ओढनिया वाली से पवन के मार्केट बढ़ल बा. रवि किशन के फिल्म के बात कइल जाय त देवरा बड़ा सतावेला, लहरिया लूट ए राजाजी, आ ज़रा देब दुनिया तोहरा प्यार में ठीक-ठाक बिजनेस कइले बा. हिरोइन के बारे में बात कइल जाय त इ साल पाखी हेगड़े आ मोनालिसा खातिर काफी अच्छा रहल.
वर्ष २०१० में कुल २५ गो फिल्म हीं पूरा भारत में रीलीज हो पावल लेकिन निर्माता रमाकांत प्रसाद, राजकुमार पाण्डेय, दिलीप जायसवाल आ अभय सिन्हा व्यावसायिकता के साथ-साथ प्रयोगवादी फिल्म भी बनवलस लोग.

वर्ष २०१० जहां भोजपुरी सिनेमा खातिर सुखद रहल उन्हें टू पीस बिकनी वाली कई गो फिल्म पानी मांगे तक खातिर तरस गइल. एह से साफ़ बा की भोजपुरी सिनेमा के दर्शक अब जागरूक हो रहल बाडन आ भोजपुरी के अस्मिता के साथ खिलवाड़ उनका बर्दास्त नइखे.
आवे वाला साल एह जात साल से सबक ली आ अगिला साल अउर बेहतरीन फिल्म बनी, अइसन उम्मीद कइल जाता.

निष्कर्ष-
भोजपुरी सिनेमा में भाषा के बहुत गड़बड़ी बा. एक ही घर में चार गो भाई चार तरह के भोजपुरी बोल रहल बाडन जवन कि बिलकुल अव्यवहारिक बा. ………माई खातिर बेटा हो के प्रयोग करत बा आ भउजी खातिर रे के. ……..भोजपुरी में सम्बन्ध आ संबोधन के निर्वाह होला जवन कि फिल्म में नइखे कइल जात. गीतन में अश्लीलता आ भोंडापन भरल बा. संगीत ज्यादातर घिसल-पीटल आ copy – paste टाइप के बा. कई गो अइसन गीत लादल गइल बा जवना के कहानी से कवनो लेना-देना नइखे. एह से उ फिल्म पेवन साटल कपड़ा नियन लागता. भोजपुरी ह कुछुओ चल जाई के फार्मूला अभियो चलत बा. भेड़-चाल अभियो जारी बा. अधिकाँश फिल्म पूर्वाग्रह से आजो ग्रसित बा. अभियो ठाकुर साहेब रेप करत आ लाला जी मुन्सीगिरी करत लउक जइहें. भोजपुरी सिनेमा के लोग के इ कब ज्ञान होई कि हमनी के दूसरी सहस्राब्दी के दूसरा दशक के शुरुआत कर चुकल बानी जा. समय के साथे चले के पड़ी. भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती दौर में गीतकार शैलेन्द्र , मजरुह सुल्तानपुरी , अनजान, ……………………बीच के दौर में लक्क्षमण शाहाबादी जवन गीत लिखले उ आजो गुनगुनाइल जाता. ओह लोग के मनोरंजन के साथ सामाजिक सरोकार के भी निर्वाह करे के रहे. समाज के प्रति जबाबदेही रहे. अब उ सब ख़तम होखल जाता. कामेडी आ रोमांस के नाम पर हिरोइन के ढ़ोंढी देखावे आ खोदे में आज के ज्यादातर फिल्मकार लोग के परम सुख के प्राप्ति होता. …………भोजपुरी क्षेत्र के सरकार भी भोजपुरी फिल्म के लेके उदासिन बिया. जवन बनता ओही पर खुश होके थपरी पीटे के बा या त अश्लीलता – अश्लीलता चिल्लाए के बा. काहे होता अइसे, एह पर गंभीरता से सोचे खातिर केहू के फुर्सत नइखे. जहाँ भोजपुरी सिनेमा लागता ओह सिनेमा हाल के तकनीकी व्यवस्था कइसन बा, एकोस्टिक यानी ध्वनि तंत्र काम करता कि ना ……….आवाज साफ़ सुनाई देता कि ना. ……..लोग कान से ना, आँख से गाना सुनता त काहे? एह से सरकार के कवनो मतलब नइखे. ……..भोजपुरी फिल्म के उत्थान खातिर सरकारी सहयोग बहुत जरुरी बा. साथहीं सरकार एगो अइसन समिति के निर्माण करे जवन भोजपुरी सिनेमा पर नज़र रखे. अश्लीलता के परिभाषा आ सीमा तय करे. अश्लील फिल्म बनावे वाला के खुल के विरोध करे आ जे अच्छा फिल्म बनावता ओकरा के सम्मानित करे. ओह फिल्म के व्यापक स्तर पर आ विश्व स्तर पर प्रचार-प्रसार करे.फिल्म में भाषा के गड़बड़ी रोके खातिर भाषाविद के रखल जाय. जे भी भोजपुरी फिल्म में काम करत बा या करे के चाहत बा उ भोजपुरी भाषा आ ओकर टोन सीखे.

विश्व स्तर पर भोजपुरी के पहचान भोजपुरी फिल्म से मिलल बा. अब भोजपुरी सिनेमा भोजपुरी समाज के आ भोजपुरिया लोग के जवन तस्वीर पेश करी , ओही रूप में आ ओही नज़र से दुनिया हमनी के देखीं. भोजपुरी एल्बम इंडस्ट्री भोजपुरी माने वल्गर बनाइये देलस. …………आवे वाला फिल्म भोजपुरी के गौरवशाली अउर वास्तविक तस्वीर पेश करी , इहे उम्मीद बा आ इहे कामना बा.


संपर्क-
लेखक भोजपुरी चैनल हमार टीवी में क्रिएटिव हेड बानी. इहाँ से संपर्क manojsinghbhawuk@yahoo.co.uk पर कइल जा सकेला. भोजपुरी सिनेमा पर विस्तार से जाने खातिर www.manojbhawuk.com पर या www.bhojpuricinema.wordpress.com पर visit कइल जा सकेला.

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1 Comment

  1. ‘भोजपुरी सिनेमा के ६२ बरिस के सफ़र ‘ आलेख बड़ी अच्छा लागल .’भावुक जी ‘ आ ‘अँजोरिया’ के बहुत – बहुत धन्यवाद .
    राउर
    ओ.पी. अमृतांशु

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