उज्जैन, 24 मार्च. कालिदास के नगरी, विद्वानन के सभा अउर मंच पर प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी. बनारस के पूरबी  गायिकी पेश करत खुद मालिनी अवस्थीओ विभोर हो उठली. शिव स्त्रोत से आरम्भ कइला का बाद मालिनी दादरा आ ठुमरी के जवन रंग देखवली कि सभागार बार बार ताली के आवाज में डूबत रहल.

उज्जैन में आयोजित विक्रम महोत्सव में अबकि बेर अलग प्रयोग कइल गइल. ‘नवसंवत्सर नव विचार’ नाम के कार्यक्रम नौ दिन तक लगातार चलल. एहमें महाराजा विक्रमादित्य के नवरत्नन का तरह गायिकीओ के नौ गो रतन बनावल गइल. समापन रामनवमी पर मालिनी के गायन से भइल. ऊ अन्तिम दिन के रतन रहली. महाकवि कालिदास का स्मृति में आयोजित ई  कार्यक्रम पंडित सूर्य नारायण व्यास संस्कृति स्कूल में भइल जहाँ संस्थान के अध्यक्ष योगेश शर्मा आयोजन के उद्देश्य बतवलन. फेर ओकरा बाद मालिनी शिव स्रोत से शुरु कर के  दादरा, ठुमरी, आ चैती के रंग देखवली. विलुप्त होत घाटो शैली के गीत सुनवली त श्रोता लोग ओकरा के खूब पसन्द कइल. हर गीत क साथे ओकर व्याख्या उनका गायन के अलगे ऊँचाई पर ले जात  रहे.

जबलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति राम राजेश मिश्र अपना धन्यवाद उद्बोधन में कहलन  कि आंगिक आ वाचिक परम्परा पढ़ले त रहलन, देखलन सुनलन ओह दिन पहिला बेर. ऊ मालिनि अवस्थी के बार बार उज्जैन आवे के निहोरा कइलन.

मालिनी अवस्थी क साथे हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्र, तबला पर रत्नेश मिश्र आ सारंगी पर संगीत मिश्र संगत कइलें.  मालिनी अतना बड़ अउर सम्मानित कार्यक्रम में शामिल होखे के मौका मिलला के अपना खातिर गर्व के बात बतवली.

स्रोत : प्रशान्त निशान्त

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