खुला आसमान का नीचे संगीत के महफिल. बिहार कोकिला शारदा सिन्हा का आवाज पर विभोर हो रहल त मालिनी अवस्थी का बोल पर मदमस्त होखत श्रोता. एहसे अलग फिल्म अभिनेता शेखर सुमन जब मंच सम्हरलन त महफिल के रौनक देल बनत रहे.

राजधानी दिल्ली के मैथिली भोजपुरी अकादमी का तरफ से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के शुरुआत शेखर सुमन गोरे गोरे बदनवा में कमाल के गोदनवा गीत से कइलें आ फेर श्रोता लोगन का फरमाइश पर अपना सधल गायकी के परिचय देत लागा चुनरी में दाग आ मधुवन में राधिका नाची रे प्रस्तुत कइलें. उनका बाद बिहार कोकिला शारदा सिन्हा विद्यापति गीत जय जय भैरवी असुर भयावह का बाद चलु देख बहिना जुलूम भेल भारी पेश कइली. ओकरा बाद अइली मालिनी अवस्थी जिनकर स्वागत श्रोता ताली का गड़गड़ाहट से कइलें. मालिनी शुरु भइली रामजी के भइल जनमवा, चलऽ हो कर लेई दरसनवा से. फेर सईंया मिले लरिकैया मै क्या करूं पेश कइला का बाद चैत का चित पर लागे ना रे रामा पेश कइली. मालिनी अवस्थि के धोबिया, बटोहिया जइसनपाारम्परिक गितन के प्रस्तुति श्रोता लोग के ताली बजाये पर मजबूर कर दिहलस.

मंच से संबोधन देत मालिनी अवस्थी कहली कि आजु भोजपुरी के अभिनेता आ गायकी का बदौलत भोजपुरी के चौतरफा विकास हो रहल बा. भोजपुरिया श्रोता सुरस्गीत प्रेमी आ समझदार होलें आ पूरा तन्मयता से गीत संगित के आनन्द उठावेलें. अपना के अवध के बेटी बतावत मालिनी मैथिली आ भोजपुरी संस्कृति के बचावे बढ़ावे खातिर हो रहल मैथिली भोजपुरी अकादमी के पहल के कायल बतवली.


(स्रोत : प्रशान्त निशान्त)

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