भोजपुरी संगीत में फूहड़पन के वायरस आ संगीतकार मधुकर आनंद…

– ओमप्रकाश अमृतांशु

MadhukarAnand
­संगीत रस से सराबोर जेकर आत्मा होखेला उ मनुष्य आंतरिक आंनद के अनुभूति से हमेशा आनंदित रहेला. ललित कला में सबसे उँँचा स्थान संगीत कला के बा. गीत, वाद्य आ नृत्य के मिलन संगीत हउए. जनम से लेके बिआह, तीज-तेवहार, रोपनी-सोहनी, कजरी, जँतसार, हर मौसम के मिजाज पे सुनर-सुनर गीत-संगीतन के रचना भोजपुरी संस्कृति के थाती हउए, जेकरा पे हिन्दी सिनेमो लोभा गइल. भोजपुरी सिनेमा के सफर के श्रीगणेश ‘गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ईबो’ फिलिम से भइल. संगीतकार चित्रगुप्त, गीतकार शैलेन्द्र के जादू लोगन के होठन पे आजुओ गुनगुनात रहेला. महेन्द्र कपूर, लता मंगेशकर, आशा भोंसले जइसन महान गायक-गायिका लोग अपना अवाज से भोजपुरी के धन्य कइलस.

भोजपुरी-संस्कृति के सुनर-सुनर रंग-बिरंगा आ टहकार फूलवारी काहे पियराइल जात बिया? फूलवारी के डाढ़-पात त खूब तेजी से पसरत बा, बाकिर ओहमें कोइलर के कूक नइखे सुनात, भाव के गूँजन नइखे, खाली सियार-सियारिन के फेंकरे के आवाज चारू ओरे गूँज रहल बा. पढ़ल-लिखल आ रईस लोग अपने संस्कृति, अपने भाषा से अलगा भइल चलल जात बा. दुनिया भर में आपन महक बिखेरे वाली भोजपुरी के गमक एकदम से कइसे मधिम पड़ गइल? फूहड़पन के वायरस कबले हमनी के संस्कृति के खोंखड़ करत रही ? कइसे अश्लील हो गइल हमार-राउर भोजपुरी ? एही चिंता में डूबल-उतराइल हम धुन के गुनी मधुकर आनंद से भइल बातचीत के कुछ अंश रउरा सामने राखत बानी.

मधुकर जी भोजपुरी सिनेमा में ब्रेक कइसे मिलल ?
‘माई तोहरे खातिर’ से पहिलका ब्रेक मिलल. सिनेमा के निर्माता हमार दोस्त हर्ष जैन रहन. फिलिम त ओतना ना चलल जेतना उमीद रहे. सिनेमा के डायरेक्टर प्रेम सिंह मुम्बई बोलवलें. मुम्बई में संघर्ष करत हिन्दी शास्त्रीय संगीत सिखावे लगनी. कुछ दिन बाद एगो सिनेमा मिलल ‘किशन-अर्जुन’. एही सिनेमा से कुछ लोग नाम जानल. एकरा बाद ‘पवन पुरवईया’ आइल. एही फिलिम में हमरा कुछ नया करे के मिलल. पारम्परिक धुन के साथे आधुकिता के महक बा. सबके दिल में हलचल मचवलस ई संगीत आ एह फिलिम से सभे नाम आ काम जान गइल.

राउर अइसन कवनो फिलिम जवना में पारम्परिक धुन आ वाद्य के इस्तेमाल खूब भइल बा ?
‘मुन्नी बाई नौटंकी वाली’ के संगीत के मधुर खुशबू भोजपुरी गंध से जुड़ल बा. पारम्परिक वाद्य-यंत्र, भिखारी ठाकुर अउरी महेन्दर मिसिर के शैली के संगीत बा एहमें. एह फिलिम के गीत-संगीत एगो दुर्लभ थाती बा. कड़ा मेहनत के साथे-साथे एह फिलिम से मन आत्मा के खुशी मिलल.

जवन रफ्तार से भोजपुरी सिनेमा के संख्या बढ़ल जाता, ओतने तेजी से गीत-संगीत के स्तर उँचा होखत बा ?
जवन चीज के मांग कम समय में ज्यादा होखेला, ओकर स्तर अपने आप नीचे गिरत चल जाला. आज भोजपुरी गीत-संगीत के स्तर चिंता जनक बा. पहिले सिनेमा कम बनत रही सं, त गीत-संगीत पे मेहनत कइल जात रहे. हर तरह से ठोक-बजा के गीत-संगीत के चुनाव होखत रहे. आज समय कम बा, काम ज्यादा बा. बहुत कम लोग बा, जे स्तर बनवले राखत काम करेला.

गीत-संगीत के स्तर गिरावे में सबसे ज्यादा कवन लोग जिम्मेदार बा ?
काल्ह के गायक, आज के नायक, मनोज तिवारी के छोड़ दिहल जाव त थोडा-बहुत सभे एह लाइन में खड़ा बा. दू-चार-दस गो एल्बम में अनरगल गाना गा के, दर्शक वर्ग तइयार करके, लोग सिनेमा में आवेला . सिनेमा में आके ओही स्तर के गानो गावल चाहेला. दर्शक वर्ग के आस रहेला फलनावा के सिनेमा आवत बा, त गानो ओइसने चटकदार होई. अगर ना होई त सिनेमा ना चली.

हमरा ईहो बु़झाला कि इण्डस्ट्री में साहित्यकार-गीतकारन के कमी बा ?
देखीं अमुतांशु जी, साहित्य के कमी त बड़ले बा, साथे-साथे पईसा के बड़का भारी कमी बा. अब, जहवां दारू बिकाता, ओहिजा रउआ जूस बेचब, त सोचीं राउर जूस के खरीदी. देखीं, रउरा सामने ‘गंगा देवी’ केतना साफ-सुथरा आ निमन सिनेमा रहल जवना में अमिताभ बच्चन आ जया बच्चन जइसन महान कलाकार लोग रहे. एह फिलिम के का हाल भइल सभके मालूम बा. संगीतकार हमहीं रहीं. गीतकार उहे लिखेलन जवन कहल जाला. गीत मसालेदार-चटकदार ना होई त ओह गीतकार के पेट ना पोसाई.

निर्माता-निर्देशक लोगन के केतना योगदान रहेला ?
केहू के रउरा संस्कृति से कवनो मतलब नइखे. एहिजा लोग पईसा लगावेला पईसा कमाए खातिर. संस्कृति के रक्षा माटी से जुड़ल लोग करेला. इण्डस्ट्री में सबले सस्ता नाम भोजपुरिए के बा. केहू पईसा लगाके पईसा बना लेत बा. संस्कृति के डाढ़-पात त अइसे नोचात बा कि पूछीं मत. केहू के मोह-दया नइखे लागत, ना केहू के रोक-टोक बा. हं कुछ लोग बा जे भोजपुरी के गौरव बढा़वे खतिर काम कइल चाहेला. बाकिर, उनकरा के दर्शक लोग नीचा गिरा देवेला.

भोजपुरिया लोगन के बीच में केतना लोभावन आ रोचक बा आज के भोजपुरी सिनेमा आ गीत-संगीत ?
हमरा ईयाद बा कि आरा में भोजपुरी सिनेमा लागत रहे त पुरे शहर में ओही फिलिम के धुन गुँजत रहत रहे. गाँव-गाँव से लोेेग पूरे परिवार के साथे आके सिनेमा देखत रहे. आज के दर्शक में माई-बहिन के भूमिका ना के बराबर बा. सभ्रांत परिवार कन्नी काट रहल बा.

रउरा विचार से भोजपुरी गीत-संगीत के फूलवारी कइसे गम-गम गमकी ?
देखीं, भोजपुरी के एह सुन्दर बाग के साचहूं गमकावे के बा त सबसे पहिले सरकार के आगे आवे के पड़ी. सेंसर बोर्ड में ईमानदारी के कैचीं चलावे के पड़ी. बढ़िया गीतकार-संगीतकार आ साहित्यकार चुने के पड़ी. सरकार के आर्थिक सहायता सबसे बड़हन योगदान बनी. सबसे पहिले समाज के मानसिकता बदले के पड़ी. जहिया हर वर्ग के घर-घर में भोजपुरी गीत-संगीत गूँजे लागी, ओही दिन से भोजपुरी संस्कृति के कंचन-कचनार फूलवारी गम-गम गमके लागी.

एह बात के खूब हलचल बा कि रउआ भोजपुरी के चहकत फूलवारी से निकल के अब पंजाबीओ फिलिमन में संगीत के तान छेड़त बानी ?
सोरहो आना सही बात बा. पंजाबी फिल्म ‘रब्बा ईश्क ना होवे’ में हम संगीत देले बानी. सात गो गीत के संगीत खतिर कई लाख रूपिया मिलल. पंजाबी फिल्म के मात्र एक तिहाई बिजनेस करेला भोजपुरी सिनेमा. पंजाबी गीत-संगीत के धुन पंजाबी सुगंध में लपेटाइल अंतर्राष्ट्रीय होखेला.

संगीत रउरा जीवन में केतना महत्वपूर्ण बा, आवे वाली पीढ़ी खतिर का संदेश बा ?
संगीत मोर आत्मा, संगीत परमात्मा , रोम-रोम में बसल संगीते बिया माई. संगीते हमार आश विश्वास बा, संगीते के दिया हम राखिलें जराईलें. नया लोगन से इहे निहोरा बा कि रउआ लोग जहँवे रहीं अपना माटी, अपना संस्कृति के सुगंध बिखेरत रहीं ईमानदारी से.

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6 Comments on "भोजपुरी संगीत में फूहड़पन के वायरस आ संगीतकार मधुकर आनंद…"

  1. आशा बा मधुकर जी भोजपुरी के साथे न्याय करिहें। इंटरव्यू बढ़िया लागल।

  2. अपना संस्कृति के सुगंध बिखेरत रहीं ईमानदारी से.
    thanks

  3. India me bhojpuri bhashi ke sankhya 25 carore se upar ba. ..aa pura duniya jod lin ta rauwa anuman laga sakilen ketna hoi. ..fir bhi bhojpuri film ke 40/- Rs par tikit ke hisab se matra 1 carore ke business ba..aap samajh jaeen ketna log bhojpuri cinema dekhele. ..Marathi ke 5 carore abadi. ..ekar hit film 20 crore ke business kailas. .Khali puran hindi kahani ke nakal. .gana me fuhadta. aa eke dhun ke repetition businesses na badhawe. …astar uchha kare ke zaroorat ba…ab bhojpuri ke soch aadhunik kare ke zaroorat ba. .bhojpuri me making ke paisa bahut kam hola. .Khali hero ke paisa hola…ta quality kahan se aayee??

  4. ravindra bharti | July 21, 2014 at 2:10 pm | Reply

    बहुत बढ़िया लागल

  5. आशा बा राउरा सभे के मेहनत से भोजपुरी के अच्छा दिन आई।

    धन्यवाद!

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