– ओमप्रकाश अमृतांशु

MamtaRaut-singer
जेकर आत्मा संगीत के रस के सराबोर होखेला उ मनुष्य भगवान के अतिप्रिय होखेला. एही से संगीत में शुद्वता आ शास्त्रीयता के महत्व होखेला. स्वर के उपासना, रियाज, से नाद ब्रह्म के आराधना क के अंतर्मन में गहराई तक उतरल संगीत के मुख्य लक्ष्य होखेला. संगीत के उत्पति वेद से मानल गइल बा. जवन स्वर रस के सृष्टि करे ओकरे के संगीत कहल जाला.

भोजपुरी संस्कृति आ भोजपुरी संगीत दुनिया में आपन एगो अलगे महत्व रखेला. भोजपुरी लोकसंगीत के सागर दुनिया के कवनो लोक संस्कृति से कम मीठ नइखे. आज कुछ लोगन का चलते भोजपुरी संगीत के रस जरूर फीका पड़ गइल बा. लेकिन, कुछ लोग अइसनो बा जे भोजपुरी के संगीत में फेरू से मिठापन भरे के कोशिश क रहल बा. बिहार आ झारखंड़ के माटी में खेलत-कूदत-गाावत एगो साधारण परिवार में जनमल अपना भारत के बेटी ममता राउत के बहुत कमही भोजपुरिहा ना जानत होखीहें. ‘सुर संग्राम’ के उप विजेता आ ‘भारत की शान-2’ के विजेता ममता राउत हमेशा कामयाबी हासिल करत बाड़ी. ‘बिहार सम्मान’, ‘पूर्वांचल संगीत सम्मान‘, भारत की शान में लगातार तीन सप्ताह ले ‘बेस्ट परफार्मर आफॅ द डे’ , ‘राजीव गाँधी एक्सलेंट अवार्ड’ आ पुरस्कार के कमी नइखे ममता के झोली में. बचपन से संगीत में रूचि राखे वाली ममता आजु भोजपुरी आ हिन्दी संगीत के सेवा खातिर अपना के उबिछ दिहले बाड़ी. कइसे झारखंड के लोक गीत गावत-गावत ममता अचानक भोजपुरी गुनगुनावे लगली? भोजपुरी से केतना स्नेह बा? भोजपुरी संगीत में बढ़त फूहड़पन से केतना नाखुश आ खुश बाड़ी? भोजपुरी खातिर का करे वाला बाड़ी? हिन्दी संगीत में केतना सहभागी बाड़ी ? आज हम ममता राउत जी से समय लेेले बानी एही सब बात पे चर्चा करे खातिर.

ममता जी, भोजपुरी गायन के ओर रूझान कइसे भइल ? रउआ त रांची में पलाइल-पोसाइल बानी.
अमृतांशु जी, हम रांची में जरूर पलाइल-पोसाइल बानी. रांची हमार जन्मस्थल आ कर्मस्थलो हउए. हमार शिक्षा-दीक्षो स्व0 गुरू अंजना विश्वास जी के देख रेख में रांचीए में भइल. हम झारखंड के लोकगीत गावत रहीं. धीरे-धीरे भोजपुरी लोक गीतन के ओर झुकाव बढ़े लागल. असल में हमार पैतृक घर पूर्वी चंपारण जिला के मोतिहारी में बा. हमार बाप-दादा के घर मोतिहारी में आजुओ बा. त भोजपुरी भाषा खून में रहले रहे. हम भोजपुरी सी॰ डी॰ सुन-सुन के भोजपुरी गावे के रियाज करे लगलीं.

राउर पहिला भोजपुरी एलबम के का नाम रहे आ राउर केतना एलबम बाजार में बा?
हमार पहिला एलबम देवी गीत पे आइल रहे. एलबम के नाम रहे ‘बनके देखऽ तु माई के दिवाना’. एह एलबम के एगो गीत में बाँझिन के दुःख-दरद के कहानी बा. बाँझिन देवी से गोेहार करत कहतिया कि ‘माई तू त माई हऊ, हमरो के माई बना दऽ’. गाना के बोल रहे – ‘बबुआ के बिना ए माई सुन लागे ई अँगनवा’. अबहीं ले दस-पन्द्रह गो एलबम में गवले बानी.

भोजपुरी फिलिम में ब्रेक कइसे मिलल ? राउर पहिला भोजपुरी फिलिम के नाम का रहे ?
सुर संग्राम में उप विजेता भइला के बाद भोजपुरी फिलिमन ला ऑफर आवे लागल. पहिला भोजपुरी फिलिम के नाम रहे ‘पियवा बड़ी सतावेला’. गाना के बोल रहे – ‘झाडू-पोछा करब नाहीं मांजब बरतनवा’.

भारत के शान-2 के विजेता बनल रउरा खातिर केतना महत्वपूर्ण रहे ?
‘भारत के शान’ जीतल हमरा खातिर बहुते खास रहल. ई हिन्दी शो रहे जबकि हमार पहिचान भोजपुरी गायिका के रहुवे. से भोजपुरी क्षेत्र से उठि के हिन्दी में संघर्ष कइल, मुकाम पावल हमरा खातिर चुनौती जस रहे. तबहिओ हम हिम्मत ना हार के शो में भाग लिहलीं. सभके देखावे खातिर कि हमहूं हिन्दी गा सकीलां. शो में चर्चित संगीतकार लोगन के साथे समय बितावे आ आपन प्रतिभा देखावे के मौका मिलल. एकर र्श्रेय हम अपना परिवार आ गुरूजन लोगन के देहब.

हिन्दीओ फिलिम में गावे के मौका मिलल होई ?
हिन्दी सिनेमा में गावे के ऑफर आवत बा. मुम्बई मिरर में एगो गीत गवले बानी. गीत के बोल बा – ‘आला रे आला रे’. एकरा अलावे अबहीं आउर तीन-चार गो हिन्दी सिनेमा में हमार गावल गाना रउरा सभे के बहुत जल्दिये सुने के मिली.

भोजपुरी सिनेमा के अपार सफलता दिआवे खातिर आजुकाल्हु फूहड़ गीतन के सहारा लिहल जाता. राउर का कहना बा एह पर ? रउआ कहां ले सहमत बानी ?
हम इहे मानी ला कि हमार भोजपुरी बहुत मीठ भाषा हियऽ. कुछ लोग भोजपुरी धिन का साथे दुअर्थी शब्द जोड़ के फूहड़ गाना तइयार करत बा. एहसे हम सहमत नइखीं. फूहड़पन आ फूहड़ गीत-संगीत से हम कोसो दूर रहे के कोशिश करेनी. आजुकाल्हु भोजपुरी सिनेमा आ एलबम में फूहड़पन के जवन फैशन चलल बा उ भोजपुरी के मिठास में जहर घोर देले बा. सिनेमा हिट करवावे खातिर लोग फूहड़पन के सहारा लेत बा. भोजपुरी के दायरा एगो खास वर्ग ले सिमट के रह गइल बा. जवन भोजपुरी संस्कृति खातिर घातक बा.

रउरो लगे त अइसन गीत गावे के ऑफर आवत होर्ह ?
हमारा साथे केतना बेर अइसन भइल बा. हमरो लगे लोग आवेला अइसन गीत गवावे खातिर. संगीतकार-गीतकार आ निर्देशक लोग जब गीत लेके आवेला त सबसे पहिले हम ओह गीत के देखी लां, तब फैसला करीलां. गीत के शब्दन से कवनो आपति होखेला त हम साफ मना कर दिहिलां. लोग कहेला ठीक बा तू ना गइबू त दोसर केहू गाई. ठीक बा कवनो बात नइखे जे गावे ओकरे से गवावे के चाहीं. सवाल बा कि केहू त शुरू करो फूहड़पन के खिलाफ आवाज उठावे के. हमहुं चाहिला कि कुछ अइसन काम करीं कि दुनिया के संदेश पहुँचे कि भोजपुरी फूहड़पन के आइना ना, सभ्य समाज के समर्पण के भाषा के नाम हउए.

आजुकाल्हु के पढ़ल आ प्रबुद्व वर्ग के लोग भोजपुरी से कन्नी काट रहल बा. काहे ?
राउर बात एकदम सही बा. अब हमनी के कुछ अइसन काम करे जा रहल बानी जा, जवना से लोगन के मालूम चली कि असली भोजपुरी का हउए. भोजपुरी के ना जानेवाला लोगो भोजपुरी संस्कुति के जाने-समझे के कोशिश करी. आशा बा लोग हमनी के काम के सराहना करिहें.

भोजपुरी से रउरा केतना लगाव बा ?
इहो कवनो पूछे वाला बात बा ? भोजपुरी से हम बहुत प्रेम करीलां. भोजपुरी के हम अपना करेजा से निकाल नइखीं सकत. भोजपुरी में जीहींला, भोजपुरी में सोंचींला, भोजपुरिये के खाइला रोटी. भोजपुरी में रोइला, भोजपुरी में हँसीला , भोजपुरिये में गाइला, उमरिया बा छोटी.

आम जनता खातिर राउर का संदेश बा ?
अबहीं देश में जवन बहिनन साथे दुष्कर्म हो रहल बा उ निंदनीय बा. हम सभे से इहे कहल चाहत बानी कि बेटी के जनम लेवे से पहिले केहू मत मारो. भ्रूण हत्या मत करीं सभे. आज लड़िकिन साथे जवन अत्याचार हो रहल बा, सभ केहू के आपन लड़िका लोगन के समझावे के चाहीं कि लड़की के मान सम्मान देव. जइसे माई दुर्गा, माई लक्ष्मी, माई सरस्वती के देवी के रूप में पूजा होखेला ओही नजर से लड़िकिनो के देखे के चाहीं. तबहीं देश तरक्की के ओर आगे बढ़ी. बस, एही शुभ संदेश संगे सभ केहू के जय भोजपुरी. जय भारत.

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