भोजपुरी साहित्यकार विनोद द्विवेदी के लिखल छोट छोट कहानियन के संग्रह “कहनी-अनकहनी” प्रकाशित हो गइल बा. एह संग्रह के बारे में प्रकाशक के कहनाम एहिजा दीहल जा रहल बा –

लघुकथा कहानी के ऊ लघु-विन्यास ह, जवना में जिनिगी के कवनो खास पल, कवनो घटना, क्रिया-व्यापार भा संवेदन-सूत रहेला. कथा बीने-बनावे वाला ओही के कहनी की छोट काया में अपना लूर-ढंग से बीनत समाजिक जथारथ के विद्रूप-विसंगति, संवेदनहीनता आ विडम्बना भा मानवी-मूल्य के संकेतिक रुप में उद्घाटित करेला. पढ़वइया-सुनवइया रे नजर खुद-ब-खुद ओह ‘साँच’ पर पहुँच जाला, जवन कथाकार देखावल चाहत रहेला. मानवी-मूल्यन के क्षरण, अनीति, भ्रष्टाचार आदि नकारात्मक पक्ष उजागर करे का साथ-साथ रचनाकार ओह सकारात्मकता आ नेह-निष्ठो के रचनात्मक उरेह करेला, जवन मनुष्य आ मनुष्यता के दिशा देव.

अरसा से अनुज विनोद द्विवेदी एह विधा (लघुकथा) में अपना रचनात्मकता बल-बेंवत आ कला के साधत, गति देत आइव बाड़न, बिना कवनो चाह-चिन्ता के कि ऊ साहित्याकर कहासु. पछिला तीन-चार दशकन में उनकर कतने लघुकथा कईएक प्रमुख पत्र-पत्रिकन में प्रकाशित चर्चित भइली सन. उनहने के बीनत-बटोरत ई छोट संग्रह कहनी-अनकहनी तइयार हो गइल. विनोद जी घर-परिवार-समाज आ देश के जरत-बुतात सवालन से मुठभेड़ करत, आदमी का अमानवी बात-ब्यौहार आ कथनी-करनी के अपना कथा के विषय बनवले बाड़े. संग्रहित कहानियन के समय-संदर्भ पछिला तीस सालन के बा, तब्बो ऊ प्रासंगिक आ अरथवान बा.

‘पाती’ परिवार से जुड़ल रचनाकार के एह प्रासंगिक कृति के प्रकाशन करत खा हम आश्वस्त बानी कि भोजपुरी पाठक-वर्ग एह संग्रह के स्वागत हृदय से करी !

– डॉ अशोक द्विवेदी,
संयोजक,
पाती प्रकाशन (बिग-सी मीडिया ग्रुप के इकाई),
नई दिल्ली


विनोद द्विवेदी के परिचय –
जन्म – 3 सितम्बर 1958 का दिने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के सुल्तानपुर (डाकघर – गोसपुर) गाँव में.
शिक्षा – स्नातक
आजीविका – भारतीय खाद्य निगम में अधिकारी
संपर्क-सूत –
एन-10 79 आर.बी.सी.,
आर. के. पुरम्, न्यी कालोनी,
ककरमत्ता,
वाराणसी.

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