– विजय शंकर पाण्डेय

LaajLaagela
श्रीमती आशारानी लाल क कथा संग्रह ‘लाज लागेला’ पर कुछ लिखे में हमहीं के लाज लागत हौ. जइसे सूरज के दीया देखावे में लाज न लगै त देखे वाले ओके पागल जरूर कइहैं. इहै हमार हालत होई. तबो हम ढिठाई करत हईं.

विद्वान भूमिका लेखक श्री रामदेव शुक्ल जी बहुत ठीक लिखले बाड़न ‘पीरा से उपजल जीवन दृष्टि’. स्वयं के पीड़ा से नाहीं, समाज के पीड़ा से, दूसरे क पीड़ा देख के, महसूस कइके ई दृष्टि भइल हौ, जवने से एतना नजदीक से कोई घटना के कल्पना कइले हइन. एमिन आप के पैनी दृष्टि क महत्व हौ. घटना त समाज में लोग रोजै देखत हौ, लेकिन ऊ महसूस नाहीं करत. आशारानी लाल जी क एतन संवेदनशील स्वभाव हौ कि महिला स्वभाव क बहुत बारीकि से अध्ययन कइले हइन. जेकर लइका पतोह अउर पति अपने खुद भारत के उच्च प्रशासनिक सेवा में हो, उच्च शिक्षा से जुड़ल हो, ओ घरे क प्राणी एतने छोटे स्तर के, चाहे मध्यम दरजा के परिवार में का होला, ओकर एतना बखूबी बयान करत हौ, ऊ एक प्रकार से सुखद अचरज क विषय हौ.

जादातर महिला लेखिका पुरुष से उत्पीड़ अउर शोषण क अपने कहानी में बात कहेलीन. लेकिन आशारानी लाल जी समाज में व्याप्त दूसर पहलूओ दिखौले हइन.

नारी खुद नारी के अथवा पुरुष के कइसे शोषण करेले, एकर बहुत बढ़िया चित्रण कइले हइन. ए संदर्भ में ‘छिनार’ कहानी पढ़े लायक हौ. ‘ई छिनार मेहरारू खाली आजै के उपज नइखी इ त जनम-जनक से होत आइल बाड़ी, आजो बाड़ी आ काल्हो रहिहन.’ केतना निर्भीक टिप्पणी आप क बा.

आप क कहानी क सहजता बहुत अच्छा लागत हौ, आप के कहानी क कथा नायक अपने गंतव्य पर जात हौ, एने ओने भटकत ना हौ. रास्ते में कवनो मेहरारू के पन्डुली नाहीं निहारे लागत हौ. ‘नात’ केतना मर्मस्पर्शी लघुकथा हौे. केतना यथार्थ भोगल जइसन लगत हौ. भारतीय नारी क केतना उच्च आदर्श झलकत हौ. जवने क सारी दुनियाँ आज मुरीद हौ.

एही तरह ‘पवित्रा’ में आदमी क केतना पवित्र लगाव बा, अपने साथे बचपन में पढ़त लड़की से ओकर मदद कइल बूढ़ भइलो पर नाहीं भुलात. ‘आजो पवित्रा बाड़िन आ आगहूँ रहिहन’ लेखिका क आदर्श प्रेम कहानी हौ.

‘छिनार’ कहानी में अपने भारतीय संस्कृति क झलक विद्वान लेखिका बहत सुन्दरता के साथ देखवले बाड़िन. ओही तरह ‘वाह रे ददिया वाह’ कहानी में नारी आदर्श झलकत बा. ओनके अकिंचन प्रेम क अद्भुत उदाहरण बा.

‘आपन आ गैर के’ कहानी में समाज क असली चित्र देखात बा. भौतिकता में संवेदनशीलता कइसे नष्ट हो जात बा, बाजारवाद में निज क स्वारथपरता, कृतघ्नता केतना उपर चढ़ आवत बा, एकर बहुत सहजता से चितरण कइल बा.

आशारानी लाल जी के सब कहानी में भारतीय संस्कृति क संदेश हौ. चाहे कंटाइन, माई कबो गरीब ना होली, भा नन्हकी हो, पूरा कहानी संगरह गाँव-शहर के समाज क चित्र बन के उभर आवत हौ. हम अगर चित्रकार होइत त सब कहानियन क एक चित्र बना देइत. पूरे समाज क नक्शा बन के तइयार हो जात. जवन आज के समाज क बुराई बा तवनो, पहिले के समाज क अच्छाई बा तवनो, सब सामने आ जाता.

कहानी में जगह-जगह गँवई बोलबाल, ताना कसल, व्यंग कसल क बहुत अच्छे ढंग से प्रयोग भयल बा. समाज के कवनो अंग क बात छोड़ले नइखीं. नारी मन क बहुत सजीव चित्रण कइले बाड़िन. ए संदर्भ में ‘दुलहिन’ कहानी देखे लायक हौ. इहो एगो उमिर होला, जब लाज-शरम के परदा आँखिन पर तनी बेसी रहेला.’ लेखिका क सौंदर्य, अउर काम क बखान के अनुपम तरीका देखात हौ. केतना सुन्दरता के साथ रसन क प्रयोग कइले बाड़िन, ई एनके भाषा क कमाल हौ.

‘कहा हो कहँवा बाड़ऽ’ कहानी में पढ़ल-लिखल लोगन प चुटकी कइले बाड़िन. ‘जब देखा तब घरे में घुसल रहलऽ’. (ई कहानी त प्रोफेसर साहब के पढ़ावे के चाहत हौ.)

‘पढ़ाई त जबले आदमी जिएला तबले करते रहेला’ एकर त आशारानी लाल जी एक जीयत-जागत सबूत बाड़िन. अब त पचहत्तर बरिस के अवस्था में अपने पति क चौबीसो घंटा सेवा में लगल रहे के बादो आप के लेखनी हमेशा चलत रहेले. जे आशा क रानी हो ऊ त लाल रहबै करी. हम त आप के माता-पिता के नमन करत बाड़ी जे ई नामकरण कइके ‘यस्य नाम: तत्स गुण’ के चरितार्थ कइलस. हमरे जइसन साहित्यिक प्रेमी लोगन खातिर आप एक प्रेरणा क स्रोत बाड़ीं.

‘सुन्दता कहुँ सुन्दर करई, छवि गृह दीप सिखा जनु बरई’ गोस्वामी तुलसीदास जी माता सीता जी क बखान करत लिखले हवन कि माता एतना सुन्दर हइन कि ओनके देख के दूसरो सुन्दर हो जात हौ. ओही तरह आशारानी लाल जी क कहानी संग्रह अइसन हौ कि जे पढ़ी उहौ कहानीकार हो जाई. हमरे तरह.

ईश्वर करे कि आप दीर्घायु हों, साहित्य क खजाना भरल करैं. हम लोगन के आशीर्वाद मिलल करै. जियादा का लिखीं ‘छोट मुँह बड़ बात’ हमके खुदै लाज लगत हौ.


पुस्तक समीक्षा :
पुस्तक : लाज लागेला

लेखिका : श्रीमती आशारानी लाल

प्रकाशक : अतुल्य पब्लिकेशंस, 7/25 महावीर गली, अंसारी गली, दरियागंज, नई दिल्ली 110002

प्रकाशन बरीस : 2105

लेखिका से संपर्क : डी-2. 2793, एस ब्लाॅक, टाइप – 4, नेताजी नगर, नई दिल्ली – 23


विजय शंकर पाण्डेय,
गुंजन कुटिया, नारायणी विहार कालोनी, चितईपुर, सुन्दरपुर, वाराणसी – 221005
मोबाईल – 9451881109

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