Prabhakar Pandey

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया”

आजु जी बहुत उदास बा. ए उदासी के कारन हम खुदे बानी. हमरा ई लागत रहल ह की भारत में जवन भ्रस्टाचार व्याप्त बा, अंधकार व्याप्त बा, असांति व्याप्त बा, ओकर कारन खाली नेते अउर अधिकारी बाने. नेता, अधिकारी मिली के देस के बेंच रहल बाने. सारा दोस हम एही लोगन की मत्थे  लगा के आपन पीछा छोड़ा लेत रहनी हँ.

पर रातिखान जवन दिल अउर दिमाग में मंथन भउवे ओसे त हमरा इहे लगुवे की सबसे बड़हन दोसी त हमहीं बानी. हम झूठे दूसरे के दोस लगावतानी पर देस के, समाज के गइतलखाने में ले जाएवाला हमहीं कथित पढ़ल-लिखल, नासमझ इंसान बानी. हमरी एइसन चतुरबुरबकवा त केहू हइए नइखे.

बाह भाई बाह….बाह रे हम. अगर हम नइखीं लूट पावत त दूसर लूटेवालान के कोसत बानी, ओ लोगन पर इल्जाम लगावत बानी पर का हम दुध के धोवल बानी? हम त विचार करते बानी आपो विचार करीं.
हमरा त अब ई पूरा तरे से विस्वास हो गइल बा की भ्रष्टाचार में खाली नेते, अधिकारी लिप्त नइखें, अरे भाई ए में बढ़ि-चढ़ि के आम आदमी, मजदूर, किसान, विद्यार्थी, सब केहू सामिल हो गइल बा. हाँ पर बात ई बा की जे जवने अस्तर पर बा ओही अस्तर पर समाज, देस के लूट रहल बा. भ्रष्टाचार में व्याप्त बा.

का रउआँ हमरी बातीं से सहमत नइखीं? अरे महराज ए भ्रष्टाचार, बुराई, अराजकता आदि की पीछे, जवन कहल जाला जड़ में, हमनिएजान बानी जाँ. रउआँ खुदे सोंची जब ओट देबे के समय आवेला तब रउआँ का देस, समाज के धेयान में रखि के सोंचेनी? रउरी दिमागे में त जातिवाद, आपन हित खाली लउकेला. रउआँ ओ प्रत्यासी के चुनाव करेनी जवन भले चोर होखो, अपराधी होखो पर रउरी जाति-विरादरी के होखो अउर अगर जाति-विरादरी के ना होखो तो कम से कम एइसन होखो जवने से राउर कुछ नीजी फायदा हो जाव. का ई भ्रष्टाचार ना ह? हम गाँव में छोट परधानी की चुनाव में देखतानी की कथित गँवई भोली-भाली जनता रूपया ले के परधानन के ओट दे तिया. जे जेतने पइसा खरच करता लोग ओके ओतने पसंद करता. आईं आप सबके एगो नारा सुना देतानी जवन गाँव, ब्लाक, छेत्र स्तर पर हो रहल चुनावन में हम सुनले बानी-

मुँह में बोतल, हाथे में अंडा, ए बेरी जीती फलनवा  के लवंडा.
 इ नारा एकदम से साफ जाहिर करता की हमार ओट ओही आदमी के मिली काहें की ओकरिए भइले आजकल खूब पिये (शराब) के अउर अंडा, मुर्गा कटता. अउर उम्मीदवार पइसा खरच क के मजदूरन, किसानन, रेक्सा चलावेवालन के खूब पिया-खिया के चुनाव जीतल चाहताने त का ए में ओ उम्मीदवारे के दोस बा की आम जनता के दोस बा.

हँ ई कहीं की जे जेतने में बा उ ओतने में समाज, देस के लूट रहल बा. गुरुजी लोग पढ़ावल नइखे चाहत अउर विद्यार्थीलोग पढ़ल नइखे चाहत. नकल के आसरा बा. गुरुजी जेके समाज के एगो अभिन्न अंग की साथे-साथे नैतिक अगुआ की रूप में देखल जाला उ खुदे भ्रष्टाचार में व्याप्त बा. पढ़ावल नइखे चाहत पर तनखाह पूरा अउर समय से चाहीं. स्कूले भले नइखे लोग जात पर ट्यूसन जरूर पढ़ाईलोग, नेतागीरी करी लोग अउर अंत में नकल करा के लइकन के पास करावे के सोंची लोग. आम जनता भी इंतिहाने की समय में स्कूल-कालेजन में पहुँची के अपनी लइकन के नकल करावे खातिर जोगाड़ भिड़ावल सुरु क देला लोग. लइका के पढ़वले पर धेयान नइखे पर घुस देके ओके नौकरी दिउअवले पर पूरा धेयान बा. का ई भ्रष्टाचार ना ह.

खुदे मारि क के थाने पर पइसा दिया जाता की पुलिस हमके मति पकड़ों अउर निर्दोसवे के पकड़ि के ले जाव. दुकानदार अपनी मर्जी से सामान के दाम बढ़ा के बेंच रहल बा लोग. दूधवाला दूध में पानी मिलावता. पंच लोग पइसा ले के फैसला करता लोग. मजदूर लोग जे अधिका पइसा देता ओकरी इहाँ पहिले काम पर पहुँचि जाता लोग. परमिटवाला चीनी, मिट्टी के तेल आदि अधिक पइसा ले के बेंचि देता. गाँव के परधान आबादी-ओबादी अपनी आदमियन के दे देता ना त खुदे ओपर अधिकार क लेता. चपरासी पइसा देवेवाला के काम पहिले करा देता अउर पहिले काम करावे कातिर लोग पइसा भी देता. पंडीजी (कथावाचेवाला) ओही की घरे कथा बाँचे पहिले पहुँचि जाता लोग जेकरी इहाँ से अधिका पइसा मिली.  गरीबे के बिआह 5 मिनट में करा देता लोग जबकी धनिक के बिआहे में पूरा राति लगा देता लोग. का इस सब भ्रष्टाचार ना ह…का ए सबसे भ्रष्टाचार के बढ़ावा नइखे मिलत.

अरे महराज हमरा त ई लागता की हमनाजीन झूठे नेता, अधिकारी पर दोस लगावतानी जाँ, अपनी अंदर झाँकि के नइखींजान देखत की हमनीजान केतना इमानदार बानी जान, दूध के धोवल बानीजान.
हमरा त ई लागता की अगर हमनीजान में से भी केहू उच्च पद पर पहुँची त उहो उहे करी जवन आज उच्च पद पर बइठल लोग करता. त काहें दूसरे की ऊपर दोसारोपन करतानी जाँ.

किसानन, मजदूरन, विद्यार्थियन की आंदोलन में भी सरकारी संपत्ति के नुकसान पहुँचावल जाता अउर देस की हालत पर आँसू बहावल जाता. बाह भाई बाह, बाह खेलाड़ी बाह. बाह रे देस के प्रेमी आम जनता लोग. बाह, तोह लोगन के माया अपरम्पार बा.

अरे पहिले अपनी गिरेबाँ में झँकले के जरूरत बा. अगर देस के भलाई सही मन से चाहे के बा त पहिले अपना के ठीक करे के परी. शांतिकुँज हरिद्वार के ई नारा पर गौर करे के परी- हम सुधरेंगे, देश सुधरेगा. पहिले अपना के सुधारीं सभें महराज.
एगो चोर दूसरे चोर के कइसे कहि सकेला की तूँ चोरी मति करS. ओकरा खातिर पहिले खुदे साहू बने के परी. समझनी नाँ. त दूसरे के बुराई देखले से पहिले आपन मन देखीं.

रहीमदासजी कहले बानी-

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसा बुरा ना होय..

पहिले अपनी आप के सुधारीं. सच्चा राष्ट्र-प्रेमी बनी, समाजसेवक बनी, देखावा मति करीं..

जय हिंद. जय भारत.

-प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया”


हिंदी अधिकारी
सीडैक, पुणे
ई-पत्र- prabhakargopalpuriya@gmail.com
मोबाइल- 09022127182/09892448922


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