– विकास

अजगर करे ना चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम !

चलीं तनी एह जानल सुनल कहावत के व्याख्या कइल जाव. सोचल जाव कि आखिर अजगर चाकरी काहे ना करे, पंछी काम काहे ना कर सँ आ आखिर राम का लगे देबे खातिर अतना धन आइल कहवाँ से ?

अजगर के चाकरी ना कइल कहीं ओकर असकतिया होखला के चलते त नइखे ? आ कि अजगरनी से शादी का बेरा ओकरा अतना दहेज मिल गइल कि ओकरा अब कुछ करे के जरुरते ना पड़े आ ऊ आराम से टँगड़ी पर टँगड़ी चढ़वले बइठल रहे. आखिर कवनो त कारण होखी ओकरा काम ना कइला के ?अगर सही में अइसन बा कि बिना कामे कइले ओकरा सबकुछ भेंटा जाला त हमनियो खातिर अइसने कुछ इंतजाम होखे के चाहीं जेहसे नौकरी पावे खातिर हमनी के लमहर लाइनन में ना लागे के पड़े, कॉलेज से डिग्री लिहला का बाद दुआरे दुआरे ना भटके के पड़े, आ हमनी के बापन के सिफारिश ले के दोसरा का आगा मुँह ना खोले के पड़े.

आ पंछी कहीं हमनी के नेतवन से त ना सीख लिहलसि बेकाम रहे के. कहीं ऊ आरक्षण का सहारे त पंछियन का दल में शामिल नइखे हो गइल ? आ पंछी के काम ना कइला के ओकर बीबी कइसे देखेले ? का ओकरा तनिको खराब ना लागे कि सभकर मरद काम करत बा आ ओकर निठल्लू बइठल बा ? आ अइसन निठल्लू पंछी अपना बाल बच्चन का सोझा कइसन चरित्र देखावत बा ?

रहल सवाल राम जी के दिहला के, त का उनुका आजु का व्यावसायिक उथलपुथल से कवनो फरक नइखे पड़त ? अगर उनुका लगे सही में अतना धन बा त दुनिया में अतना हाहाकार काहे मचल बा ?काहे सबही परेशान बा ? सबले बड़ बाति ई कि उनुका अतना धन भेंटाइल कहवाँ से ? का उनुको लगे स्विस बैंक में खाता बा ? हे प्रभू अगर राउर दास मलूका के कहल साँच बा त हमार निहोरा बा आप से कि आपन धन अइसे मत लुटाईं. बाँटही के बा त ओह किसानन में बाँटी जे रात दिन आपन खून पसीना बहा के अनाज त उगा ले लें बाकिर अपने लड़िकन का सोझा दू जून के रोटी ना परोस पावे. अगर रउरा आपन प्रभुता बनवले राखे के बा त अपना तरीका में तनी बदलाव ले आईं महाप्रभु !

बहरहाल दास मलूका जी के इ कहल जहां एक तरफ प्रभु के प्रभुताई पर सवाल उठावत बा दोसरा तरफ उनुका पर भरोसो जगावत बा. अब ई रउरा पर बा कि पानी के गिलास आधा खाली बा कि आधा भरल ?

एह विषय पर बहुते कुछ लिखल जा सकेला. अगर रउरा लागत बा कि एह पर आगा लिखल ठीक रही त जरुर बताईं.

राउर,
विकास

विकास जी के ई रचना उनुका ब्लॉग पर पढ़ के मन ना मानल आ ओकर भोजपुरी अनुवाद करि के रउरा सोझा परोस दिहनी.
http://vikkp.blogspot.com/

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