दखल

नया बदलाव क इतिहास रचे वाला साल के विदाई !

– ‍प्रगत द्विवेदी

नया साल के खुशमिजाज सलाम का साथे, बीतल बरिस के खटमिठ अनुभवन क इयाद आइल. नवका सत्र के, नया ‘सनेस‘ में हमके इहे बुझाइल कि हमहन के देश तमाम तरह के संकटन से उबरत, ‘भ्रष्टाचार‘ से जूझत, आर्थिक मन्दी से लड़त, महँगाई से पार पावत आखिरस निकलिये गइल आ निकलल त अइसे कि संसार एकरा कूबत, हौसला आ धीरज के देखते रहि गइल.

आर्थिक मोर्चा पर त दुनिया क बड़-बड़ देश लड़खड़इलन स, बाकि हमनी का डटल रहि गइनी जा. ई डटल अपना आप में भरत के जिजीविषा, आ संघर्ष क्षमता के दरसावे वाला बा. वैश्विक ताकत बनल रहला खतिर, अपार श्रम-शक्ति वाला हमन के देश तबे, देरी ले, मजबूती के साथ टिक पाई, जब राजनीतिक अस्थिरता वाला भँवरजाल से निकल के ऊ अपना मजबूत इरादा आ इच्छा शक्ति के परिचय दीही. आवे वाला समय में एकर उम्मीद कइल जा सकेला. उम्मीद आ विश्वास के साथ आगा बढ़ला पर असंम्भवो, संम्भव हो जाला. हमहन के नया साल के ऊगत सूरूज के उजास के अगवानी एही संकल्प के साथ करे के चाहीं.

दस बरीस के बाद होखे वाली ए बेरी के जनगणना से ई साफ हो गइल कि देश के आबादी एगो नया आबाद देश के नेंव रख रहल बिया. ऊ 121 करोड़ पहुँचल आ ओकरा साथे साथ तरक्की के कई गो आधारन में इजाफा भइल. साक्षरता, रोजगार, व्यापार, पोषण-स्तर, प्रति व्यक्ति आमद (इनकम) आ ओकरा क्रय शक्ति में बढ़ोत्तरी भइल. एह बेरी के जनगणना बिविध जातियन क स्थिति स्पष्ट कइलस, लिंग-अनुपात बतवलस. रोजी रोजगार क हालत बयान कइलस.

शिक्षा के क्षेत्र में बहल नया बेयार देश खातिर खास बदलाव के सूचक रहल. कई तरह के परीक्षा प्रणलियन में बदलाव भइल. ओमे पारदर्शिता आ वस्तुनिष्ठता आइल. आवे वाला साल में एकर असर देश के युवा वर्ग पर साफ लउकी. ‘शिक्षा के अधिकार‘ के सफलता सुनिश्चित करे खातिर ज्यादा से ज्यादा संख्या में अध्यापक चयन के परीक्षा (टी.ई.टी.) आयोजित भइल. देश के खेल संसार में बहुत कुछ नया घटित भइल. क्रिकेट के वर्ल्ड कप भारत आइल. दूसरो खेलन में हमनी के खिलाड़ी कम्पीट कइलन स आ मेडल के संख्या बढ़ल. दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम के आयोजन से खेल जगत का बहुत कुछ सीखे के मिलल. धांधलियन के साथ बहुत कुछ करिया-उजर उजागर भइल. हमनी के देश एगो अउर नया ‘ट्रैक‘ बनवलस. फार्मूला-1 रेस के आयोजन के बाद, भारत ओह गिनल चुनल देशन में गिनाये लागल, जवन एफ-1 रेस के मेजबानी के आयोजन करेलन स.

एकदम ‘आम‘ लउके वाली ‘जनता‘, जवना के दबंग राजनीति आ माफिया एकदम मूरख आ कमजोर समझत रहल, जवना के तानाशाही हुकूमत लात तर जँतले रहल, एकाएक नींद से जागल आ आक्रोश में सड़क पर उतरि आइल. दुनिया का कई देशन में एकर नजारा लउकल. हमनियों किहॉं रामदेव आ अन्ना हजारे का प्रेरना अउर जागरन अभियान से भ्रष्टाचार, कालाधन आ भ्रष्ट व्यवस्था का खिलाफ अहिंसक लामबंदी का साथ जनता. बूढ़, जवान, लइका, औरत सबका साथ लोकपाल बिल के मांग लेके अन्ना का बारह दिन ले चलल, अनशन का समर्थन में खुलमखुल्ला संसद के सोझा उतर आइल. एकर आँच खाली भारते ना विदेशों में नजर आइल. राजनीति करेवाला लोग जनता के ताकत के भीतर तक महसूस कइलस. एसे आवे वाला साल में लोकतंत्र के भावी रूप में बदलाव के संकेत मिलत बा.

‘मन्दी‘ का चुनौतियन का बीच, अपना मजदूर शक्ति का बल पर भारत के कई उद्योग आ कारोबार अपना हौसला आ श्रम से मजबूती दिहलन स. गुजरात में भावनगर का पास ‘अलंग‘ नाव क एगो जगह बा, जवन लगभग दस किलोमीटर ले, समुद्री तट पर फइलल बा, पानी वाला जहाजन के तूडे़ वाला काम एहीजा होला. एके जहाजन के कब्रगाहो कहल जाला. हमनी के देश के तीस फीसदी स्टील एइजा के स्टील कबाडे़ से मिलेला. इहाँ लगभग पचास हजार मजदूर खाली छव-सात हजार रूपया महीना पर दिन रात जहाज तूडे़ वाला काम कके आपन गुजारा करेलन स. झुग्गी झोपडी आ तंग गलियन में जिनगी बसर करे वाला ये मजूरन का बल पर बिकराल मंदी का बावजूद ‘अलंग‘ के धन्धा अउरी चोख भइल. दुनिया से लाखन गो जहाज तूरे खतिर एइजे अइलन स. यूपी, बिहार से आइल हजारन मजदूरन के जिनगी में उमेद के नया सुरूज कब उगी, ई बड़का सवाल जस के तस बा, बाकिर जहाज तूडे़ का कारोबार में दस फीसदी बढोत्तरी के उमेद कइल जा रहल बा.

पच्छिमी देशन से उपजल मंदी का दौर में देशी कारोबारियन का भीतर विकासपरक ‘प्रोग्रेसिव‘ कदम उठाके, प्रतिस्पर्धा (कम्पटीशन) में उतरला के भूख नजर आइल. सरकार का ओर से बड़ सुधार के उमेद बन्हले ए कारोबारियन में एफ.डी.आई. पर सरकारी पलटी के कारण मायूसी नजर आइल. कम्पटीशन में बनल रहे खतिर देशी उद्योग आ कारोबारियन के कोशिश अबही रूकल नइखे. रिजर्व बैंक आ सरकार के सकारात्मक रूख के इंतजार कर रहल बा. सुधरन के उमेद नया साल में, विकास के नया दुआर जरूर खेली, अइसन आशा बा. देश के अर्थ-व्यवस्था में मंदी, रूपया के कमजोरी आ इनफ्लेशन (मुद्रास्फीति) का कारन भले कवनो नया उमेद ना जागल बाकिर ‘ग्रोथ‘ बरकरार रहल.

पछिला साल आदिवासियन, बनवासियन आ छोट किसानन खातिर बदलाव वाला रहल. जीविका खातिर, जमीन आ विकास खातिर, जमीन लेबे-देबे आ अधिग्रहण नीति के लेके संघर्ष उफान पर लउकल. सिंगूर से पास्को, नोएडा आदि जगहन पर प्रबल जनविरोध उपजल आ सरकार के अधिग्रहण वाला पुरान नीति-नियमन में बदलाव खातिर सोचे के मजबूर होखे के पडल. न्यायालय के हस्तक्षेप का साथ राजनीति के दिशा बदलल. सिंगूर ममताजी के गति दिहलंस त पश्चिमी उ॰प्र॰ राहुलजी के नया जोश.

वन, पर्यावरण, पहाड़ आ जंगल के कटाई, खनन आ दोहन पर चिंता बढ़ल. संरक्षण खतिर चेतना बढ़ल. पहाड़ आ जंगल के खस्ताहाल पर फेर से सोचे आ कुछ करेक संवेदनशील समझ विकसित भइल. जंगल में आग त लगबे करेला, जब लगेला त भरी तबाही मचावेला. उत्तराखंड का ‘गंगवाड़ा‘ में लागल दावानल के बुतावे आ अपना जंगल के बचावे में, वन पंचायत का बोलवला पर सैकड़न लोग टूट पड़ल. आग बुतावे में चार-पाँच आदमी जरि मरि गइलन. प्रशासन एक लाख रूपया देके छुट्टी पा लिहलस. ओ मरे वालन के परिवार आपन मुखिया खो देहलस बाकिर ई सॉच जग जाहिर हो गइल कि जंगल से जिये आ आपन जियका चलावे वाला खतिर जंगल बचावल ढेर महत्वपूर्ण बा.

ई साँच आ एकदम खरा साँच बा कि आवे वाला समय एगो नया अवसर, नया मोका जरूर देला. नया तौर तरीका, नया सुधार का जरिये, बदलाव ले आवे क सोच सिरजे खातिर, चुनौतियन के नया संकल्प-बल से सामना करे के परेला. नया लक्ष्य निर्धारित करही खातिर त नया साल के सबेरा धरती पर उतरेला. भलहीं अतीत से वर्तमान बेहतर ना होखे, बाकि ओके बेहतर बनावे के जिमेवारी सकारल ‘खास‘ बात हऽ, नया उम्मीद, नया आस-भरोस, नया राह क संबल हऽ, जवन आगा का कठिन डगर में ‘आत्मबल‘ बढ़ाई. निरापद आ बेहतर भविष्य खतिर कड़वे सही, कुनैन खइला में चूके के ना चाही. ‘पुतवो नीक आ भतरो नीक‘ में से असली ‘नीक‘ कवन ह, एकर चुनाव करहीं के पड़ी.


पिछला कई बेर से भोजपुरी दिशा बोध के पत्रिका “पाती” के पूरा के पूरा अंक अँजोरिया पर् दिहल जात रहल बा. अबकी एह पत्रिका के जनवरी 2012 वाला अंक के सामग्री सीधे अँजोरिया पर दिहल जा रहल बा जेहसे कि अधिका से अधिका पाठक तक ई पहुँच पावे. पीडीएफ फाइल एक त बहुते बड़ हो जाला आ कई पाठक ओकरा के डाउनलोड ना करसु. आशा बा जे ई बदलाव रउरा सभे के नीक लागी.

पाती के संपर्क सूत्र
द्वारा डा॰ अशोक द्विवेदी
टैगोर नगर, सिविल लाइन्स बलिया – 277001
फोन – 08004375093
ashok.dvivedi@rediffmail.com

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