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फगुआ के दिन नियराइल बा आ साथे साथ चुनावो के दिन नियराइल जात बा. वइसे त नेता हरमेसा से मुँहफट बेलगाम होत आइल बाड़ें बाकिर अबकी का चुनाव में एह बेलगामो प कवनो लगाम लागत नइखे लउकत. सभे अपना विरोधियन के लेवारे में लागल बा. त हमहू सोचनी कि एह माहौल में लेवा का नीचे लुकइला के कवनो जरुरत नइखे आ खुल के मैदान में ओही तरह उतर जाए के बा जइसे ना ना करत आदमी रंग लाग गइला का बाद खुदहु लाग जाला दोसरा के लसारे में. शुरु करत बानी लेवारल आ लसारल से.

लेवारल क्रिया ह, काम ह जवना में लेवा लगावल जाला दोसरा के. लेवा संस्कृत शब्द लेप्य से निकलल मानल जाला. लेपे वाला चीझु लेवा कहल जाला. पहिले का जमाना में, आ अबहियों आम आदमी का घर में जहाँ कोयला, लकड़ी भा गोंइठा प खाना पकावल जाला चूल्हा पर चढ़े वाला बरतन के लेवल जाला, ओकरा पेंदी प लेवन लगावल जाला. एह लेवन आ लवना में फरक होला. लवना चूल्हा में झोंकाए वाला लकड़ी के कहल जाला जबकि लेवन बरतन का पेंदी प लगावल माटी के परत के. लेवन शब्द लेप्य से बनल बाकिर धान के फसल रोपे का पहिले खेत में लेव लगावल जाला. कहे के मतलब कि ओकरा के जोत जोत के पँकियावल जाला, पाँकि जइसन बना दिहल जाला खेत के माटी के. ओही लेव लगला का बाद ओहमें धान के रोपाई होला. खेतीए का तरह राजनीतिओ में आपन फसल रोपे से पहिले खेत के लेव बनाए के पड़ेला. अइसने लेवाड़ होला जवन मकान भा घर बनावत घरी ईंटा जोड़े के मसाला से बनावल जाला. लेवाड़ भा लेवार उहो होला जवन पानी भरल गड़हा भईंसियन भा सूअरन के लोट पोट कइला से बन जाला. वइसे सूअरन वाला लेवाड़ के खोभाड़ कहल जाला.

अब सोचे के बात बा कि कहाँ लेपे वाला लेवा आ कहाँ ओढ़े वाला लेवा. लेवा लेपल जाला त लेवा ओढ़ल जाला. मकसद दुनू के एके जइसन होला माहौल से बचावे के. एक जगह करीखा धुँआ से बरतन के बचावे के जुगत होला त दोसरा जगह जाड़ा पाला में अपना देह के बचावे के. मध्यम परिवार अब लेवा आ गेनरा से शायदे परिचित रह गइल होखी. अब ना त केहु का लगे अतना फुरसत बा कि लुगा लत्ता जोड़ जोड़ के लेवा गेनरा सीए ना अब लोग के पसंद आई. अब त बनल बनावल रजाई, कंबल, धूस खरीद ले आवेला लोग. लेवा आ गेनरा में बहुत फरक ना होखे, ओढ़े के काम आइल त लेवा, सूते के काम आवे त गेनरा. हँ लेवा तनिका हलिक फुलुक होखेला जबकि गेनरा भारी, कठ. ई त बाति भइल लेवारल के अब चलीं तनिका लसारलो देखि सुनि लीहल जाव. आ जब लसारल के चरचा करब त बतावल जरूरी लागी कि अइसनो एगो शब्द होला लेसारल आ लेसल.

दिया जरवला के लेसल कहल जात रहुवे आ दिया के बत्ती बना के दिया में लगावे के काम लेसारल कहल जात रहुवे, भा कहीं कि कहल जाला. अलग बात बा कि हमरा रउरा किहाँ दिया बत्ती अब दियरी बाति भा छठे छठियारे नजर आवेला. बाकिर लसारल ओकरा के कहला जाला जवना में केहु के माटी धूरा में गिरा के भा घसीट के गंदा कइल जाला. आ जेकरा के लसार दीहल गइल ऊ लसराइल हो गइल. कपड़ा लत्ता लसरा जाव त धो पोंछ सूखा के साफ कर लीहल जाला बाकिर आदमी लसरा जाव त ओकरा के आसानी से साफ ना कइल जा सकेला जबले कि ऊ आपन गोल मत बदल लेव. काल्हु ले जे दोसरा पार्टी में रहि के लसराइल लागत रहुवे से अपना पार्टी में आवते झकाझक लागे लागत बा. अलग बाति बा कि ओकरा अइला से एह तरफ पहिले से रहल लोग लसरा जाव आ उनका दोसरा तरफ पलटी मारे के पड़ि जाव.

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