पिछला बेर पोजिटिव थिंकिंग के बात सामने आइल रहुवे से आजु ओहिजे से शुरू करत बानी. पोजिटिव थिंकिंग, माने कि सकारात्मक सोच, माने कि सकारथ सोच ओह सोच के कहल जाला जवन आदमी के मनोरथ पूरा करे, ओकर ईच्छा पूरा करे भा ओकर सोचल सगरी काम पूरा करे में सहायता करे. ठीक एकरा उलट होले निगेटिव थिंकिंग, माने कि नकारात्मक सोच, माने कि अकारथ सोच जवन बेकार के सोच होले, जवना से कवनो मकसद, कवनो कारथ पूरा ना होखत होखे. कहल जाला कि सोचावट में बहुते ताकत होले बाकिर ओकर सही इस्तेमाल हमनी का ना कर पाईं ले. सही सोच हमेशा सकारथ होखेला गलत सोच अकारथ बनि जाला. अब सकारथ आ सवारथ वाली सोच में मकसद एके लेखा होखला का बावजूद दुनु सोच में बहुते अन्तर होला. सवारथ वाला सोच बस आपन सोचेले आ ओकरा एहसे कवनो मतलब ना होखे कि एह दौरान दोसरा केहू के कतना नुकसान होखत बा. सकारथ सोच अपना फायदा के जरूर सोचेला बाकिर दोसरा के बिना नुकसान चहुँपवेले. मान लीं कि रउरा दउड़ में शामिल बानी आ बगल वाला दउड़ाक रउरा ले तेज दउड़त बा. अब एहीजा सवारथ वाली सोच सोची कि काहे ना ओकरा के लंघी मार दिहल जाव कि ऊ ढिमला जाव आ हम आगा निकल जाईं जबकि सकारथ सोच रउरा में स्फूर्ति आ उत्साह भरे के काम करी जवना से रउरा ओकरा से तेज दउड़ सकीं. अब इहो ना होखे कि हर तरह के सोच पूरा हो सकेला. कवनो सोच चाहे ऊ कतनो सकारथ सोच काहे ना होखो सही ना हो सके जब ओकर मकसद प्रकृति के नियम का बहरा होखे. जइसे कि केहु सोचे कि ओकरा लगे तीन भा चार गो हाथ हो जाव त ई कवनो सोचावट से ना हो सकी. हँ सकारथ सोच रउरा के एह लायक जरूर बना दी कि रउरा कई हाथ के काम अपना दूइये हाथ से कर सकीं. सकारथ सोचे उहे सकारथ होले जवना पर रउरो पूरा भरोसा होखे. अगर रउरा बेमन के, बिना भरोसा के कुछ सोचल चाहत बानी त सोचीं ओकरा के जागते में सपना देखला से बेसी मानल भूल होखी. अब सकारथ अकारथ आ सवारथ से मिलते जुलत शब्द होला महारत. हर आदमी कवनो ना कवनो गुण में महारत हासिल कर सकेला आ ओह महारत के सही इस्तेमाल से आपन सगरी मनोरथ अपना सकारथ सोच से पूरा कर सकेला. अब एह पूरा पर इयाद आइल कि एगो पुरावल होला, एगो पुरईन, हवा कबो पुरुवा बहेले त कबो पछुआ, आ कोर्ट कचहरी पंचायत में अकसरहा पुरवा साखी के जरूरत पड़ेला. अब एकरा के रसरी लेखा पूरत जाईं जतना मन करें आ तबे सही बतकुच्चन होई. बाकिर अब आजु ना अगिला बेर !

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