बतकुच्चन ‍ – ९४


मेरे मन कछु और है, बिधना के कछु और. सोचले त रहीं कि अबकी के बतकुच्चन में एकरा सेंचुरी के चरचा करब बाकि बाबा लस्टमानंद जी दोसर ओर खींच ले गइलन. अब मन से भा बेमन से उनकरे बात करे के पड़ी. पिछला अतवार के बाबा अपना गजइला के चरचा करत कहलन कि बतकुच्चने वाला एकरा बारे में जनता जनार्दन के बुझा सकेलें. बाबा अतना बड़हन जिम्मेदारी मत दीं कि हम बा दीं. लेकिन चलीं हमहूं गजाईं एह गजइला पर.

गजाइल माने गाज निकाल दिहल. जब दूध भा कवनो घोल के ढेर मथल जाला त ओहमें फेन जइसन बन जाला आ एकरा के गाज कहल जाला. गजाइल मतलब अतना पेरा गइल कि मुँह से गाज निकल जाव. कवनो काम करत करत थाक गइला पर कहल जा सकेला कि हम गजा गइनी अब. हालांकि कुछ लोग अइसन थाकेला कि ओकरा मुँह पर फेफरी पड़ जाला. ओठ सूखला से जवन चमड़ी जस निकलेला ओकरे के फेफरी कहल जाला. चलीं लवटल जाव गजाइल पर. एही से मिलत जुलत कुछ अउरी शब्दन के चरचा कइल जाउ.

एगो कहाउत ह कि, बबुनी ससुरा ना जाली, मने मने गाजेली. बबुनी के एह गाजे में आ ओह गजइला में फरक होला. एह गाजा के उत्पति गाजा बाजा से लिहल जा सकेला. गाजा मतलब खुशी के प्रकट करे वाला आ बबुनी मन ही मन खुश होली बाकि उपर झाँपर ससुराल जाए से मना करेली. मन में त बा कि जाईँ बाकिर कहीं त कइसे. अब एगो गाजा एक तरह के मिठाईओ के कहल जाला. आटा मैदा सान के वर्गाकार रूप दे के छानल आ फेर चीनी के पाग में पगा के गाजा बनेला. अब रउरा कहब कि हई ल, ई त गजइला का जगहा गाजे लगलन. ठीके कहनी. गाजल के मतलब होला एक के उपर एक धइल, सरिहावल. त बात त सही बा. गजाइल, गाजल, गाजा, गाजा, गाजल एक के उपर एक गजात गइल आ हमार बतकुच्चन बनत गइल. जानत बानी कि रउरा सभे गाजल आ गज़ल में अझूराइब ना काहे कि सभे जानत बाकि गज़ल उर्दू पद्य के एगो शैली ह. हालांकि गज़ल शब्द हरिन के विरह में हरिनि के रोवला के कहल गइल रहे पहिले पहिल. बाद में प्रेम का जंगल में विचरत शायर लोग एकरा के आपन गज़ल बना लिहल. एह बतकुच्चन में गज महाराज छूटले जात रहलन. गज हाथी के कहल जाला आ एगो नापो के. बारह इंची के एक फुट, तीन फुट के एक गज. अलग बात बा कि अब एह नाप के इस्तेमाल दर्जी करसु त करसु केहू दोसर ना कर सके काहे कि तब ऊ गैरकानूनी हो जाई. सरकार मीटर अपना लिहलसि आ गज फुट के लतिया दिहलसि. ठीक वइसहीं जइसे फारेनहाइट के इस्तेमाल रोक के ओकरा जगहा सेल्सियस के इस्तेमाल होखे लागल बा. एगो अउर शब्द जोड़ी याद आ गइल नाप आ माप के. लम्बाई चौड़ाई नपाले, वजन भा मात्रा मपाले.

चलत चलत पिछला बेर के मूसरी आ मुसरी के बारे में बतावल जरुरी नइखे लागत. काहे कि सभे जानत होई कि एगो मूसल के त दोसरका चुहिया के कहल जाला.

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2 Comments

  1. सादर नमस्कार,

    हमार इहाँ देहल कमेंट सायद फेन से स्पाम में चलि गइल..संपादक जी से निहोरा बा…की ओके इहाँ ले आईं….सादर।।

  2. बहुते बढ़िया…हार्दिक आभार…

    हम त बस इहे कहल जाहतानी की गज के एगो मतलब कमानी भी होला ….उ कमानी जवने से सारंगी आदि बजावल जाला…अउर हँ..साथे-साथे गज के एगो अउर मतलब बा….अरलग..यानि व्योड़ा..अरे जवन गउआँ में पहिले केवाड़ी बंद करे खातिर आड़ा लगावल जात रहल ह….यानि अरगल के गज भी कहल जाला।।
    ………
    गजाइल…हमरी इहाँ..गजुआइल (साबुन, पेस्ट आदि खूब गजुआता)..की रूप में त खूब चलेगा पर हमरी इहाँ ए संदर्भ में गजाइल से अधिका गजुआइल चलेगा अउर गजाइल गाँजल यानि एकट्ठा कइल अउर बबुनी गाजेली वाला में खूब चलेगा….खैर सब मिलाजुला के हम इ कहल चाहनी की रउरी बतकुच्चन से हमरा बहुते फायदा होला..अउर कवनो सब्द की बारे में गहरा ग्यान मिलेला……लिखत रहीं….सादर।।

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