का होई जब राउर टहलुआ रउरे के टहलावे लागे ? टहलुआ ऊ जे टहल करे, सेवा करे, राउर छोट मोट काम रउरा कहला पर कइल करे. टहलुआ के स्त्रीलिंग टहलनी होला. सेवा टहल करे खातिर जनता अपना सांसद विधायकन के चुनेले बाकिर चुनाते ऊ लोग चुने वालन के टरकावे लागेला, एने से ओने टहलावे लागेला. हालांकि टहलावे से बेसी सुभीता टहरावे शब्द में बा. कम से कम टहल से मतिभ्रम त ना कराई. बाकिर टहलल शब्द बहुते बेसी इस्तेमाल का चलते सही मानल जाये के चाहीं. एहिजा त टरकावे का मकसद से टहरावे के जिक्र भइल बा बाकिर जनता अतना आसानी से ना टरके. तबो ना जब टहलुआ के हरकत घाव बन के आत्मा में टभके लागे, आँखि से लोर बनि के टपके लागे. टपकल त आमो महुआ करेला जवना के बिने खातिर फजीरही से चुननिहार आपन झोरा दउरी लिहले ओकरा फेंड़ का नीचे टपाटप चुनत जाले हर टपकल महुआ भा आम के. शायद अइसहीं टपके लागेले नेता लोग चुनाव का बेरा. पुरनका पार्टी के पाकल आम महुआ जब जान जाले कि अब एह डाढ़ पर ढेर दिन के टिकान नइखे बाचल त ऊ टपके खातिर तइयार हो जाले आ टपकावे वाला लोग पता ना का सोच के ओकरा टपके के इन्तजारो ना करसु आ ओह टपकुआ के सोझे अपना झोरी में टपका लेले. झोरी में ढेर टपकल बिटोरा जाव त गाँव जवार में सनेस पसरि जाला कि फलनवा के अबकी चलती बुझात बा. आजुकाल्हु यूपी में एही तरह विधायक टपाटप टपकत बाड़े, केहू सपा का झोरी में केहू बसपा का झोरी में आ कांग्रेस भाजपा टुकुर टुकुर ताके में लागल बा कि शायद केहू ओनियो टपके. खैर बात चलल रहे टहलुआ से आ टघरत पता ना केने केने घूमि लिहलसि. कर्नाटक में भाजपा के मुख्यमंत्री पर जमीन घोटाला खनन घोटाला के आरोप लागल त उनुका त इस्तीफा दे देबे के पड़ल जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री घेरइली त कांग्रेस सोझे मुँह बिचुका दिहलसि कि शीला अइसन कवनो कसूर नइखी कइले कि उनुका के हटा दिहल जाव भा उनुका से इस्तीफा माँग लिहल जाव. अब विपक्ष कतनो टरटरात रहे, टेर लगावत रहे, कांग्रेस ओकर सुने वाला नइखे. इहे बड़का के निशानी ह कि कुकुर भूके हजार हाथी चले बाजार. लोग के कहला सुनला पर चलि के ओकरा रामराज्य त चलावे के नइखे जे बाद में पूरा दुनिया फेर ओकरे के दोषी ठहराई कि जब ऊ जानत रहले कि सीता बेकसूर बाड़ी त उनुका के जंगल में भेजले काहे ! जनता के कवन ठेकान !

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