बदला के आगि

– डॉ॰ उमेशजी ओझा

UmeshOjha
प्रशांत एगो ट्रेवल्स एजेन्सी के मालिक रहले. शहर में आवे वाला यात्रियन के शहर के देखे वाला जगहन प घुमावे खातिर अपना एजेन्सी से छोट गाडी उपलब्ध करावल उनकर काम रहे. प्रशांत के व्यपार बहुते चल निकलल रहे. भीआईपी लोगन मे़ उनकर बढिया जान पहचान बन गइल रहे. ओेह मे एगो जानल मानल बड़ कम्पनी के मनेजर आलोको शामिल रहले जिनका से प्रशांत के बढ़िया जान पहचान हो गइल. आलोक के जब कबो कहीं जाए के होत रहे त प्रशांते से गाड़ी लेके जात रहले. जेकरा से दुनो के बीच बढिया संबंध बन गइल रहे. प्रशांत उनका घरहु आवे जाए लगले. प्रशांत जबो आलोक का घरे जासु नया-नया गाड़ी बदलि-बदलि के जात रहले. प्रशांत, आलोक के भईया आ उनका पत्नी के भउजी बोलत रहले. जब प्रशांत आलोक के घर जइतन त घनटन उनका पत्नी से बतियावत रहले. वोह घरी आलोक के बेटी अनु आपन माई के साथे बइठ के दुनो के बतियावल सुनत रहली. प्रशांत आपन पत्नी के दुखड़ा अनु के माई से सुनावत रहले. कहत रहले कि उ अपना पत्नी के बेवहार से तंग आ के ओकरा के छोड देले बाड़न. एह प अनु के माई एक दिन कहली कि, ‘अनु, कांहे ना तहरा बाबुजी के मउसी के बेटी से प्रशांत के बिआह करवा देहल जाव. उ प्रशांत के साथे बिआह क के बड़ी खुश रही.’
‘हँ, माई ठीके रही.’
ओकरा बाद प्रशांत आलोक आ उनका पत्नी का साथे जाके लई़किओ देख अइले. आवते प्रशांत कहले, ‘अनु… अनु….देख ना, उ लइ़की तहरा निहन तनिको नइखे. उ हमरा इचिको पसंद नइखे.’
अनु अनुसना क के कुछ ना बोलली.
थोड़ही दिन बाद प्रशांत फेरू अनु के घरे अइले आ सीधे अनु से कहले, ‘अनु, तहरा गाड़ी चलावल पसंद बा नु. हम तहरा के गाड़ी चलावे सिखाइब.’
अनु चिहकत कहली, ‘हँ-हँ हमरा गाड़ी चलावे सिखे के खूब मन करेला. हम गाड़ी चलावे सीखब.’
‘त ठीक बा. चलऽ गाड़ी सिखे़.’
‘चलीं.’ आ अनु प्रशांत का साथे गाड़़ी सिखे चल दिहली. अनु के माई तनिको ना रोकली. अनु बहुते खुबसुरत लइ़की रहली. उ खुबे लाम रहली. भुअर आँखि, करिया बादल निहन घनघोर बाल, उनका सुन्दरता के चार चांद लगावत रहे़. एक हाली जे उनका के देख लेव, उनकर दिवाना हो जात रहे. गाडी सिखावत-सिखावत प्रशांतो अनु के दिवाना हो गइले. गँवे-गँवे दूनो में ईयारिओ हो गइल.
एक दिन गाड़ी सिखावते-सिखावत प्रशांत, अनु के पीठ प आपन हाथ फेरत बोलले, ‘अनु, का तू हमरा से बिआह करबु ?’
अनु के कुछ बुझात ना रहे कि जवना आदमी के उ चाचा कहत रही उ आजु कइसन बात करत बा. उ गाड़ी के अगिला सीट प चुप-चाप बइठल रही. एको हाली कुछ ना बोलली.
‘अनु तहार चुप हँ बा त ठीक, ना त तहरा बाबुजी के गाड़ी से धक्का मरवा देब आ भाई के अगवा करवा देब.’
अनु प्रशांत के बात से डेरा के दु दिन त प्रशांत से बातो ना कइली. दु दिन बाद जब अनु अपना कॉलेज जाए लगली त राहता़ मे़ प्रशांत आपन इ़ंडिगो कार अनु के सामने रोक दिहले.
‘अनु, चलऽ गाड़ी में बइठऽ, तहरा के कॉलेज छोड़ देत बानी.’
अनु के लाख मना कइलो प प्रशांत ना मनले. अनु प्रशांत के जिद का आगा टिक ना पवली आ गाडी मे बइठ गइली. गाडी में बइठते प्रशांत अनु के कॉलेज ले जाए का जगहा सीधे अपना गाँव उड़ीसा चलि अइले. ओहिजा अनु के डेरवा के मंदिर मे़ बिआह क लिहले. ओकरा बाद अनु मजबुर हो के प्रशांत के आपन पति माने लगली. कुछ बरिस बाद अनु एगो बेटी आ एगो बेटा के जनम दिहली.

एगो अतवार का दिने जब प्रशांत के एजेन्सी बन्द रहे, अनु प्रशांत से कहली, ‘सुनत बानी जी, आजु छुट्टी के दिन बा. कालीबाड़ी पूजा करे चलल जाव आ ओने से घुमत-घामत घरे आ जाएके.’
कुछ सोचत प्रशांत कहले, ‘ठीक बा. चलऽ.’

दिन भर घुमला के बाद अनु साँझि के अपना पति प्रशांत के फोन कइली त उनकर फोन बन्न मिलल. ओकरा बाद अनु अपना घरे फोन कइली त उनकर सास रानी फोन उठवली.
अनु पुछली, ‘हेलो मां जी. प्रशांत घरे आ गईल बानी ?’
‘अरे, अनु का कहत बाड़ु? तू लोग त साथही गइल रहु आ तुही पुछत बाडु कि प्रशांत घरे अइले हा कि ना. कहीं कुछ भइल का ?’
‘ना मां जी, कुछ ना भइल ह. रउरा शांत रहीं. हम घरे आवत बानी त सभ बताइब.’ आ फोन काट दिहली.

तनकिए देर बाद अनु अपना घरे आ गइली आ हाॅल में राखल सोफा प ढेर हो गइली. तुरते उनकर सास रानी गरम चाय के कप अनु के पकड़वली. अनु चाय के चुस्की लेबे लगली. उनका बगल में उनकर सास बइठल चाय के चुस्की लेत अनु से पुछली, ‘अनु, आजु तु अकेले कइसेे घरे आ गइलु? अबही तक त प्रशांत नइखन आइल. उ कहाँ रह गइल बा ? सब ठीक त बा नु ?’
‘हँ माई, बिलकुल ठीके होइहे. हमरा के त राहता में छोड़ि के आपन कवनो ईयार लोग के साथे चलि गइले ह. रउरा चिन्ता मत करीं उ आ जईहे. आ ना अईहे त हम रउरा खातिर बानी नु.’

थोड़ देर बाद सासरानी रसोई में चल गइली. अनु कुछ सोचत अक-बक बोलत एके हाली सोफा से उठली आ कहीं फोन करे लगली, ‘हेलो, बाबुजी ?’
‘हँ बेटा अनु, कुछ भइल बा का कि अतना राति के फोन कइले बाड़ू ?’
‘बाबुजी, अबही ले प्रशांत घरे नइखन आइल.’
‘हें ? अच्छा कवनो घबराए के बात नइखे. कबो-कबो त प्रशांत खुबे रातिओ के आवत रहेले. फिकिर मत करऽ. हो सकेला कि उनका आपन ईयार लोग के साथ देर हो गइल होई त सबेरहु आ जइहे.’

सबेरे ले प्रशांत घरे ना लवटले त अनु अपना मकान मालिक, अपना भाई आ अपना बाबुजी के फेरू खबर कइली. ओकरा बाद अनु अपना बाबुजी, भाई का साथे प्रशांत के खोेजे में जुट गइली. खोजे के बीचे मे ओ लोग के खबर मिलल कि उनका थाना का इलाका में एगो लाश मिलल बा. खबर मिलला का बाद अनु के साथे सभ लोग थाना गइल आ लाश देखि के अनु अपना पति प्रशांत के रूप में पहचान कइली. अनु के बतावल बेयान के आधार प आ प्रशांत के देहि से मिलल गोली के निशान प अनजान हत्यारा का खिलाफ उनका पति के हत्या करे के केस क के पुलिस आपन जॉच शुरू कर दिहलसि.

पुलिस सबसे पहिले प्रशांत के माई रानी से पुछताछ कइलसि त उ बतऽवली कि, ‘प्रशांत, अपना पत्नी साथे सबेरही काली मंदिर पूजा करे गइल रहले. सांझि ले जब दुनो बेकत वापिस ना अइले त फिकीर सतावे लागल. बाकि का करतीं. कबो-कबो उ लोग देर रातो के आवत रहे लोग. एह से सोचनी कि आजुओ उ लोग देरिए से खाना ओना खा के आवे. ई सभ सोचते रही कि सांझि के बहू अनु के फोन आइल त उ पुछली कि प्रशांत घरे आइल बाड़े कि ना. आ बहू थोडही देर बाद अकेल घरे आ गइली आ हमरा के जिनगी भर देखे के बात कहली. ई बात तनी हमरा गजब के लागल.’

रानी के बेयान मे़ छुपल बात के आधार प पुलिस के शक के सुई अनु के ओरि घुम गइल रहे. पुलिस अनु के थाना में बोला के पुछताछ शुरू कर दिहलसि. थोड़ देर त अनु एने-ओने के बात बतावत रहली. बाकि ई उनका पता ना रहे कि बड़-बड़ भूत पुलिस के परछाही से साच बक देबेलें त भला अनु के का बसात बा. उहो पुलिस के आगे जादा देर तक ना टिक पवली आ जवन सचाई बतवली उ एकदम करेजा दहला देबे वाला रहे.

‘बिआह के बाद कुछ दिन तक दूनो के संबंध बढिया रहल. ओकरा बाद प्रशांत अनु के शरीर तंग करे लगले. एजेन्सी के काम आ घरे अइला का बाद घर के काम मे अपना सास के हाथ बटावे से अनु थाक जात रही. राति के जब प्रशांत के साथ ना दे पावत रही त ‘अनु एह सब मे़ त तहार माईए बढिया बाड़ी. हम उनुको साथे ई सभ करेनी. तू त बेकार बाडू. तहरा बिआहे ना कइल चाहत रहे.’

एकरो से बढ़ि के जबरन घिन हरकत करत रहले. जब उनकर विरोध करत रही त मारपीट करत रहले. अतने ना ओकर विडिओ बनाके आपन दोस्त-ईयारनो के देखावत रहले.’ उनका गलत बात बोलला से आ आपन ईज्जत नीलाम होत देखि के तंग आके एक दिन कहली, ‘प्रशांत, हम रउरा एह घिन हरकत से तंग आ गइल बानी. अब हमरा सहल नइखे जात. हम रउरा घर के ईज्जत बानी आ रउरा ओकरे नीलाम करत बानी. हम पुलिस में जाके शिकायत क देब.’
‘ठीक बा, जा के त देखाव पहिले. घर से त निकल. दुनो लईकन के गरदनिये अईंठ देब.’

अनु प्रशांत से तंग आ के आपन ईज्जत खातिर, प्रशांत के अपना सभ उलझन के जड़ मानि के प्रशांत से बदला लेबे के आगि में जरे लगली. प्रशांत के अपना राहता से हटावे खातिर अपना भाई बोनी आ उनका दफ्तर में काम करे वाला उनकर दोस्त सुरेश के अपना साथे मिला के योजना बनवली. सुरेश आ अनु के मिलन आपन काम के सिलसिला में भइल रहे. जान पहचान भइला का बाद दूनो में धीरे धीरे दुरी घटत चलि गरइल. अनु बाते बात में सुरेश के आपबीति सभ बात बतावत रहली. अनु के बात सुन के सुरेश के मन में अनु खातिर दया बढ़त चलि गइल आ प्रशांत ला घिन.
एक दिन सुरेश कहले, ‘ देखऽ अनु, जवन करे के योजना बनावत बाड़ू तनिका सोच लिहऽ. एकर परिणाम का होई जानत बाडू?’
‘चाहे जवन होखे, हम बस अतना जानत बानी कि हम आपन ईज्जत नीलाम होखे से बचावत बानी. अगर आजु ना चेतब त काल्हू कुछ अउर होई.’

सच बा जब औरत आपन ईज्जत खातिर उतरि जाव त का दोसर, का आपन सेनुर, सब बराबर बा. एही खातिर कानुनो बनावल बा कि औरत से अगर आपन ईज्जत बचावे में केकरो खूनो हो जाए त उ अपराध नइखे. अगर औरत के इच्छा के विरूद्व ओकर मरदो कुछ करत बा त उ सजा के भागी बा.
अनु के अनुरोध प सुरेश अनु साथे मिल के प्रशांत के मारे के प्लान में हथियार ले आवे के तइयार हो गइले. एक दिन सुरेश अइलन. ‘अनु, अनु, तहरा हुकुम के अनुसार हथियार के बेवस्था हो गइल बा.’
‘ठीक बा. अपना पासे राखऽ. केकरो से कुछ मत कहिह.’

प्लान का मुताबिक ओह दिन अनु पूजा के बहाने अपना घर से अपना स्कूटी से प्रशांत का साथे निकलली. पहिले दूनो जने होटल, आपन ऑफिस, आइल लोग. ओहिजा से माजा गाड़ी लेके पहिले काली मंदिर में पूजा कइला के बाद, लेक घूमे गइली. ओकरा बादे अनु गाड़ी के चालक सीट प बइठि के गाड़ी मे़ राखल पानी के शीशी में मिलावल गुल्कोज के साथे नीद के गोली प्रशांत के पिआ दिहली. जेकरा से प्रशांत के नींद आ गइल आ गाड़िए में सूत गइले. ओकरा बाद तय योजना मुताबिक अनु सुरेश आ अपना भाई बोनी के संगे शहर के बहरी एगो नजदीकी समाचार पत्र के आफिस के लगे बोलवली. ओहिजा से अपना गाड़ी में ले के शहर से दूर एनएच प करीब बीस कि॰मी॰ सुनसान जगह प एगो पुल से पहिले फेड़ का पासे अनु, सुरेश आ़ बोनी मिल के बेहोश प्रशांत के उतारि के नीचे बइठा दिहले. पहिले सुरेश प्रशांत के माथा मे़ एगो गोली आ फेरू छाती मे़ तीन गोली मारि के उनकर हत्या क दिहले. अनु प्रशांत के बगली से पईसा के बेग, मोबाईल वगैरह निकाली के सुरेश के दे दिहली. जाते-जात सुरेश से बोलली, ‘सुरेश, ई सभ चीज के बेकार क दीह आ बढिया से देख ल कि कहीं उ जिअत त नइखे.’

सुरेश अनु के बात प सिनेमा के हीरो निहन पलटत एगो अउर गोली प्रशांत के छाती में मारत बोलले, ‘देखऽ अनु, एकरा में तनिको जान नइखे. ई पहिले हिललो रहे बाकि अब एकरा में सुगबुगाहटो नइखे.’

अनु के बेयान के आधार प पुलिस बोनी आ सुरेश के पकड़ि के अनु का साथे जेल भेज दिहलसि. कहानी लिखे जाए तकले तीनो जेल में रहले. बोनी आ सुरेश अनु के बदला लेबे के आग में अनु का साथे-साथे जर चुकल रहले. बाकि तीनो के मुंह प तनिको पछतावला के निशान ना लउकत रहे.


लेखक परिचय :
वाणिज्य में स्नातकोत्तर, बी॰एच॰एम॰एस॰, आ पत्रकारिता मे डिप्लोमा लिहले उमेश जी ओझा साल 1990 से लिखत बानी. झारखण्ड सरकार में कार्यरत उमेश जी के लेख आ कहानी अनेके पत्र पत्रिकन मे प्रकाशित होत रहेला.
ई कहानी एगो साच घटना प आधारित बा. एकर सचाई के देखत एकरा मे स्थान आ पात्रन के नाम बदल दिहल गइल बा.

संपर्क सूत्र :
डॉ॰ उमेश जी ओझा,
39, डिमना बस्ती, डिमना रोड, मानगो, जिला – पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर)
पिन – 831018
मोबाइल – 09431347437
email – kishenjiumesh@gmail.com

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1 Comment on "बदला के आगि"

  1. बदला के आगि में सब केेहू जरता, देश जरता, समाज जरता। निक लागल उमेश जी के रचना.

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