देश के बड़ गीतकार गोपालदास नीरज लिखले बाड़े –
“गीत अगर मर जायेंगे तो क्या यहाँ रह जायेगा
एक सिसकता आसुओं का कारवां रह जायेगा ”

राधा मोहन चौबे "अंजन" के साथे अनूप पाण्डेय

राधा मोहन चौबे “अंजन” के साथे अनूप पाण्डेय

गोपालगंज (बिहार) जिला के कटेया अंचल में जनमल राधा मोहन चौबे ‘अंजन’ जी भोजपुरी भाषा के सुप्रसिद्ध गीतकार हईं. ऊंहा के गीतन में माटी के महक बा, प्रेम-वेदना के स्वर बा, त जमीनी सच्चाई के साथे रूमानियतो बा. कजरौटा समेत अनेके दर्जन गीत-कविता के पुस्तक रचि के ऊहाँ के भोजपुरी भाषा के समृद्ध करे में आपन महत्त्वपूर्ण योगदान देहले बानी. भरत शर्मा समेत लगभग आधा दर्जन लोक-गायकन के कंठ से निकल के ऊहाँ के गीत भोजपुरी भाषा-भाषी लोग के कंठ के हार बन चुकल बा. कविता-रचना में अश्लीलता के घोर विरोधी रहल कवि अंजन जी के नाम भोजपुरी साहित्य के इतिहास में कवनो परिचय के मोहताज़ नइखे. अपना एही अवदानन के कारन ऊहाँ के भोजपुरी गीत-परंपरा में एगो विशेष स्थान के अधिकारी हईं. एहिजा प्रस्तुत बा अंजन जी से देश-दुनिया आ साहित्य पर भइल बातचीत के कुछ अंश –

स. आज उम्र के एह पड़ाव पर आ के रउआ कइसन महसूस करऽतानी ?
अंजन जी – एक तरह से बुढ़पो एगो संन्यासे ह. जवन ऊर्जा प्रकृति से शरीर के मिलल रहे उ अब धीरे-धीरे कमजोर होता. बुढ़ापा के दुइये गो सुख होला – संतति सुख अउर भोजन के सुख. भरल पूरल परिवार बा आ परिवार में खूब सेवा-सत्कार होता, एकरा से बड़हन सुख अउरी का होई? बहुत सुखद अनुभव होता. ई अब त जीवन के सांझ ह, अउर अवसानो नजदिके बा.

स. भोजपुरी के ओर आपके झुकाव कब से भइल?
अंजन जी – बचपने से भोजपुरी से बड़ लगाव रहल, काहे कि ई माई के बोली नू ह, माई के दूध के साथही मिलल बा. हम जब छठवां कक्षा में पढ़त रहनी, त ओ समय विद्यालय में हमनी के कक्षा-शिक्षक श्री धरिच्छ्न मिश्र जी कक्षा लेबे आईं. ओही बेरा हम ऊहाँ के एगो कविता सुनवले रहनी. ऊहाँ के बड़ा खुश भइनी आ हमार पीठ थपथपवनी. ओही दिन से हमरा लागल कि हम काव्य-साहित्य में कुछ अच्छा क सकेनी.

स. आपके शिक्षा-दीक्षा कवना तरह से भइल?
अंजन जी – साँच त ई बा कि हमरा माई बस बीसे ले गिनती जानत रहे. हमार पिताजी पांच भाई रहनी आ हम ऊ पांच भाई के बीच में एकलौता संतान रहनी. हम पढ़े में एकदम कुशाग्र बुद्धि के रहनी. ओ बेरा त हमनी का नक़ल जानते ना रहनी जा. जब हमरा दसवीं का इम्तिहान देबे के रहे, तब्बे हमरा चेचक हो गइल रहे. बड़ा कठिनाई से परीक्षा देहनी आ प्रथम श्रेणी से पास भइनी. आगे पढ़े के सामर्थ्य ना रहे बाकी लालसा जरुर रहे. बी.ए. में स्वाध्याय के बल पर पुरा बिहार में तेरहवां स्थान आइल रहे. हम नौकरी खातिर कवनो क्षेत्र में जा सकत रहनी, बाकी माँ-बाप के सेवो करे के रहे, एहिसे शिक्षा क्षेत्र में आ गइनी. ओ समय टीचर ट्रेनिंग में पूरा बिहार में फेर पहिला स्थान आइल. हमरा नोट्स के पढ़ के त केतना जाना एम.ए., बी.ए.अऊरी का-का क लिहल लोग.

स. गीत साहित्य के प्राण तत्त्व ह आ एके रचना कवना परिवेश में होला ? एह पर राऊर का राय बा? केहू कहले बा कि –

“कोई गीत नहीं गाता है,
गीत-अधर का क्या नाता है
जिसमे जितना दर्द भरा है
वो उतना मीठा जाता है ”

अंजन जी – गीत त दर्दे के उपज ह. गीत अइसन होखे के चाहीं जेहमें दर्दे प्राण-तत्त्व होखे. गीत में अल्पजीविता ना होखे के चाहीं. आज कल के गीत त अइसन बा कि शुरू में त अच्छा लागेला बाकि कुछ दिन के बाद बहुते आसानी से बिसर जाला आ एक समय-अवधि के बाद त ईयादो ना आवेला. हम दर्द से उपजल एगो गीत के अनुभव बतावऽतानी. हमरा पास थोड़े से जमीन बा, लइका ओही पर खेती करेलें कुल. धान के रोपनी हो चुकल रहे, नहर में पानी ना रहे आ बारिश के कवनो गुंजाइश ना लउकत रहे. हम खेत देखे खातिर गइनी. दृश्य कुछ अइसन रहे कि धरती में दरार पड़ गइल रहे आ लागत रहे जइसे पानी के अभाव में धरती के करेजा फाट गइल होखे. बड़ा दर्द भइल. जब घर लवटनी त एगो गीत लिखनी. भगवान के अइसन कृपा बा कि जब-जब ऊ गीत के मन से गा देनी त ना जाने कहाँ से बरखा शुरू हो जाला. ऊ गीत कुछ अइसे बा –

का कही सचहूँ परान बाड़ऽ बदरा
जान बाड़ऽ बदरा, पहचान बाड़ऽ बदरा
अबही ले चौरा में चान ना फुलाइल
चुनरी-सुनहरी सरेह न रंगाइल
कजरी कियरिया के शान बाड़ऽ बदरा
अबही ले धरती न पलना झुलवली
धनवा सुगनवा ना गोद में खेलवली
आ जइब अमृत वरदान बाड़ऽ बदरा

स. आकाशवाणी में रउआ बहुत दिन ले आपन सेवा देहनी, कइसन अनुभव रहल ?
अंजन जी – तीस जून अनइस सौ बासठे से हम आकाशवाणी से जुड़ गइल रहनी आ तमाम गीतन के प्रसारण होत रहल. बाद में जगदीश चन्द्र माथुर से हमार मुलाकात भइल. ऊ हमरा के बहुत मानस. ढ़ेर दिन ले उनका सानिध्य में रहनी. रात-रात भर उनके साथे मंच पर रहीं. ऊ हमरा से वज्जिका भाषा में गीत लिखवावे आ ऊ जब कहें हम गीत लिख दीं.

स. भोजपुरी अतना समृद्ध भाषा भइला क बादो आठवीं अनुसूची में शामिल नइखे, एह बारे में राऊर का विचार बा ?
अंजन जी – भोजपुरी के विकास के नाम पर आज ढेर संस्था बन गइल बा. दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, तमाम जगह लोग भोजपुरी के मठ बनाके मठाधीश बन के बइठल बा लोग. एह लोग के भोजपुरी से कुछ लेबे-देबे के नइखे, ई लोग खाली अपने विकास में लागल बा. जब भोजपुरी-साहित्य समृद्ध हो जाई, त भोजपुरी के अपने-आप आठवीं अनुसूची में मान्यता मिल जाई. आजकल भोजपुरी में केहू अइसन साहित्यकारो नइखे जे एह में प्राण के संचार क सके. कहाँ केहू भोजपुरी में ओह तरे लिखऽता, जे तरे धरिच्छ्न मिश्र जी लिखीं –

कवना दुखे डोली में रोवत जाली कनिया
छूट गइले माई-बाप छूट गइले दुनिया
एही दुखे डोली में रोवत जाली कनिया

भोजपुरी त सीधे गंगा ह. भोजपुरी के जवन सम्मान चाहीं ऊ सही सम्मान आजु ले ना मिल सकल. हमरा एह बात के बड़ा दुःख बा.

स. आज भोजपुरी में अश्लील गीत लिखे के आ गावे के जवन सिलसिला चलल बा, ओकरा बारे में रउवा का कहब ?
अंजन जी – भोजपुरी त आजकल अर्थकामी हो गईइल बिया, जवना चलते भोजपुरी के अस्तित्व खतरा में जा रहल बा. आजकल त अइसन गीत लिखल जाता जेके रउवा पुरा परिवार साथे बइठ के सुन नइखीं सकत. हम त अध्यात्मिक ढेर लिखेनी आ अश्लीलता से हमरा घृणा बा. जबहिओ कवनो गायक हमार गीत गावे खातिर मांग के ले जाले, त हम उनसे सिफारिश करेनी कि कृपा करके आप ई गीत अश्लील गीतन के बीच में मत गाएब. अइसन नइखे, हमहूँ गीत लिखले बानी जवन गीत जन-जन के कंठ के आहार हो गइल. हम बहुत पहिले एगो गीत लिखले रहनी कि,

बिजली में तड़प केतना होला अनजान बदरिया का जानी,
मनवा के मनवे समझी, अनजान नजरिया का जानी.
कुछ बेचे वाला बेहसे वाला कुछ मोलभाव समझ लेला,
गठरी-गठरी के मोल अलग होला, अनजान बजरिया का जानी.

हम भरत शर्मा के बहुत मानत रहनी आ गावे खातिर बहुत सारा गीतो देहले रहनी, लेकिन बाद में अश्लीलता के लेके उनको से अनबन हो गइल. हम स्वाभिमानी हईं आ एहि के चलते हम कबो अपना आत्मसम्मान के साथ समझौता ना कइनी.

स. रउवा नया पीढ़ी के गीतकार लोग खातिर का सन्देश देब ?
अंजन जी – बहुत ख़ुशी होला ई देख के कि नया पीढ़ी में ज़ज्बा बा कुछ लिखे के, कुछ चिरस्मरणीय करे के. हम नया खून से इहे कहे चाहब कि रउवा सभे लिखी आ बढ़िया से बढ़िया लिखीं, लेकिन एगो बात ध्यान में राखेब कि साहित्य समाज के दर्पण ह आ जब दर्पण में चेहरा साफ़ ना लउके त ओकरा के नकार दिहल जाला.

अंजन जी से बतियावे के ई मौका हम हाथ से ना जाये देबे के चाहत रहनी. हमनी में ढेर देर ले बात होत रहल. सुरुज के जोत जब जवाब देबे लागल त अंजन जी के आशीर्वाद जइसन बातन के साथे विविध रंग के गीतन में सराबोर हम अपना घर के राह ध लिहनी.

– अनूप पाण्डेय


अनुप पाण्डेय स्वतंत्र पत्रकार आ कवि हईं. इनका से 08800638578 भा anupkmr77@gmail.com पर संपर्क कइल जा सकेला.

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