– डाॅ. अशोक द्विवेदी

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काल्हु भोरे क निकलल रात एक बजे घरे पहुंचनी. ए साल के सावन में बलिया बनारस ढेर इयाद आइल बाकि महाराष्ट् में भीमा श॔कर ज्योतिर्लिंग के दरस परस खातिर कइल यात्रा अपना आप में अनूठा आ अविस्मरणीय रहल. पहाड़, झरना, बन से होत प्रकृति के अनुपम सुघराई, उहो झिमिर-झिमिर बरखा में. रहस्य रोमांच से भरल, हरियरी के ई निसर्ग सुघराई खाली देखल आ अनुभव कइल जा सकेला. घुमरियावत ऊँचाई वाली सड़कन से गुजरत, बादर का दीरघ जाल में कुहा आ भाप लेखा धुआँ से तोपाइल गरब से छाती उतान कइले ऊँच परबत चोटियन के ‘योगमुद्रा’ हमके बारंबार हैरत में डालत रहे. हम सोचत रहलीं कि आदिदेव महादेव के ढेर ज्योतिर्लिंग नदियन का आसपास, पहाड़न आ जंगलन का निसर्ग रूप वाला स्थाने पर काहे बा ? चमक दमक, आ साज सज्जा से बिरत, एतना सरल, एतना मौलिक कि सादगी लजा जाय तवन देव हमनी के ई भोला बाबा हउवन. बन के बेलपत्तर, भाँग-धतूर, मदार आ बनफूलन से सजे आ खुश होखे वाला अइसन उघार-निघार, अगड़धत, बउड़म देवता दुनिया में कहाँ मिलिहें ? ई हमनिये का लोक में नू भेटइहें काहे कि उनका चिता भसम रमावे वाला बैरागी रूप का पाछा छिपल सुन्दर, सत्य शिव (कल्यानकारी) रूप आदि काल से लोक मंगल क सिरिस्टि (सृष्टि) करत आइल बा.

पुरान पोथियन में शिव क कतने खिस्सा कहनी बा. उनुका गिरहस्थियो के चरचा बा. उनका पूजा, साधना क बिधि-परंपरा आ अभिषेक क लूरो ढंग बतावल बा; बाकि ए औढरदानी के अइसन प्रकृत-रूप कि बरखे-बूनी से जुड़ा जइहें. इनका स्वागत में बदरवो रूई का फाहा अस गलइचा आ कालीन बन जइहें स. बाकि जइसे उनका एहू से मतलब नइखे. अइसन गुनिया कि एकदम निछक्क निरगुनिया, पलिवारो वाला बाड़न आ पाथर लिंग रूप में पुजात बाड़न. जहवाँ बिराजत बाड़न, ऊ बन जंगल आ दुर्गम पहाड़न वाला बीहड़ पथ बा. भीमोशंकर लिंग बे पहाड़ बन घोरियवले कइसे मिलित ? इहाँ त्रयम्बकेश्वरो लिंग नासिक का लगे बा. मुम्बई से गइलीं त अइसहीं पहाड़ के ऊँचाई लाँघत, बन क्षेत्रन से जाए के परल. ओहू घरी बदरी आ कुहा से तोपाइल पहाड़न क अनगिन चोटी लउकली सs, ओहू बेरी भींजत-नहात दर्शन भइल रहे. उहाँ गोदावरी नदी मिलल आ इहवाँ भीमा नदी. एहू बेर मुम्बइये से जात बानी.

Yatraa1हमके बुझला ड्राइवर टेढ़ रस्ता पर घुमा देले बा, दू-तीन गो पहाड़ लाँघ चुकल बानी; बाकिर बाबा बाड़न कि निगिचाये क नाँवें नइखन लेत. अबही सड़क क बोर्ड प टाँकल लउकल हा “भीमाशंकर 92 किलोमीटर”. टेढ़ मेढ़, ऊंच खाल पहाड़ सड़क, कई हाली त एकदम समकोने पर घूमल बा. हमनी क यू.पी.,बिहार रहित त एही सड़किया प हजारन गड़हा आ ऊढ़ुक मिलित; ‘सावधानी हटल कि दुर्घटना घटल’. गनीमत बा कि ई महाराष्ट्र हवे. एही तरे पछिला साल हम ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) गइल रहलीं त सड़किया बरोबर आ चिकनाह मिलल रहे. उहवों बन पहाड़ी भेंटाइल रहे; डहरी में ओतना ना; बाकि जब नर्मदा नदी तट आइल त ओंकार परबत मिलल. नदी का ओपार सटले ओंकारेश्वर आ एह पार अमलेश्वर (ममलेश्वर). नदी पर तीन गो बढिया मजबूत पुल पैदल आवे जाए खातिर. ओइसे नीचे नदियो में एह पार से ओ पार जाए खातिर पाँच कि दस रुपया मे चटपट नाइ आ स्टीम बोट रहे. बगले में नर्मदा डैम रहे, ओ बेर का यात्रा क अलगे सुख सवाद भेंटाइल रहे. उहवाँ सरकारी इंतजाम बड़ा टंच रहे. नर्मदा के पानी, क्षिप्रा (शिप्रा) नदी में मिलावे खातिर मोटे मोटे पाइप बिछावे क काम रातो दिन चलत लउकल. अब त ऊ पूरा नियरा गइल होई. बारह ज्योतिर्लिंग में ओंकारेश्वर का अलावा ओइजा उज्जैन में महाकालेश्वर बाड़न शिप्रा का पावन तट पर. उहाँ क चाक चौबंद इंतजाम में एम.पी.टूरिज्म लोगन का ठहरे खातिर बढियां रिसार्ट बनवले बिया. ओंकार पर्वत अजुओ अपना कथा किंबदन्तियन का अनुसार मौलिक सुघराई लेले विराजमान बा. हम उहाँ रात भर रुकलो रहलीं. जान लीं कि ओघरी उहाँ से आवे क मनवे ना करे. बाकिर हमरा इन्दौर लवटे के रहे; तबे दुसरा दिन उज्जयिनी का शिप्रा नदी आ महाकालेश्वर के दर्शन हो पाइत.

भीमाशंकर के एह डहर में अब्बे एक घँटा पहिले “मालसेज घाट” नाँव से प्रसिद्ध ऊँच पहाड़ क ऊ कटान प्वाइंट गुजरल हा. नया जुग के लइका लइकिन खातिर एने क नैसर्गिक पर्बतीय सुघराई पिकनिक स्पाट क मजा देत बा. कतने जियतार जल प्रपात, झरना आ पहाड़ काट के ठहराव थल(स्पाट) साइत नवहा मन का सेल्फी आ यादगार फोटो लेबे खातिर उकसावेला.

Yatraa3टप्पा टोइंया, नियरा-दूर बसल गाँव आ सुघ्घर खेती लउकत बा ऊंच पहाड़ का उपरो. हम अचंभित बानी एह कृषि के उपजाऊ उन्नत रूप के देखि के. बरखा का जल के रोक-बान्हि के रोपल धान लहलह करत बा. ऊखि, मकई (मक्का) अतना बियार कि अपना जवार क खेती मन परले लाजो लागत बा. हँसत बिहँसत छोट गाँवन के सामरथ आ पुरुसारथ साफे लउकत बा. सड़क का किनारा बाल भूजि के बेचत कतने लइका उपरा पहड़वो प मिलल रहले हा सs. अब फेर हमनी का तिसरका ऊंचाई प चढ़ जा रहल बानी जा. फेर ऊहे टेढ मेढ़ घूमावदार पातर सड़क, सामने से छोट गाड़ियन क रेला. महादेव का दर्शन में जोखिमो बहुत बा. तबो हजारन लोग जा रहल बा, ना जाने कतना सरधा विश्वास आ साध-सपना गँठियवले. हमहूँ ओही लोक मे बानी. सँगे हमार सहचरी पत्नी आ छोट बेटी बिया. ओ लोगन क साध सपना, सरधा अलगा बा हमरे संग जोराइल, नथाइल. पहाड़ के एह तिसरकी ऊँचाई का बाद फेर नीचे क ढलान. त बाबा भीमाशंकर नीचे बाड़न का बुझला ?

पहुँचला पर गाड़ी पार्किंग के अजब व्यवस्था नजर आइल. हमनी के अढ़ाई किलोमीटर पहिलही रोक दिहल गइल. एकोरा ऊबड़ खाबड़ ऊंच पहाड़े पर हजारन गाड़ियन का बीच हमरो गाड़ी ठेल दिहल गइल. अब पैदले रूट मार्च. आगा एक किलोमीटर बाद दोसर पार्किंग रहे. उहों हजार गाड़ी ठुँसाइल लउकली सs. हलांकि लोगन के ढोवे खातिर सात आठ गो मिनी बसो ठकचल जात लउकली स; बाकिर सैकड़न लोगन सँगे हमनियो का पैदले गइल नीक लागल. राह भर पहाड़ से झिर झिर झरत छोट छोट झरना आ बनवृक्ष. पहुंचला का बाद एक किलोमीटर के लमहर लाइन. ओहू के एकदम नीचे उतरे के रहे. सड़क का दूनो बगल सैकड़न गो दोकान खाये पिये के. बाल उसिनल आ भूंजल दूनो. केरा आ सेब. लाइने में चार घंटा अउर लाग जाई, लवटत लोगन मे से एगो भाई बतवले कि नीचे उतरला प मंदिर का सहन मे पांच सौ रुपया में पास मिलत बा. ओहू खातिर लाइन बा. हमनी का लाइन मे से बहरिया गइनी जा. सीढी उतरत बहुत नीचे मंदिर परिसर मे व्यवस्था संस्था कार्यालय से तीन गो पास लेके बिशेष लाइन मे लगनी जा. ऊहो मंदिर का दुअरिया पर जनरल लाइने मे मिलत रहे. फेर ऊहे भीड़. तबो बड़ा ढंग से दरसन भइल. लवटे का बेर फेर अढाई किलोमीटर पैदल ऊंच चढ़ाई वाली सड़क. गोड़ पांच पांच किलो के भारी तब्बो सब्बुर आ उछाह. सैकड़न लड़िका मेहरारू तिरपित भाव लिहले लवटत रहे.

एह कठिन, ना भुलाय जोग यात्रा क अउर आजू बाजू कतने अकथ कहानी बा. सोचीं त बहुत कुछ, ना सोचीं त कुछ ना ! एगो ईहो कि जात खा आ लवटत खा के अलगा अलगा अनुभव में सराहे जोग नागरिकता देखे के मिलल. कतने जगहा गाड़ियन क जाम पुलिस ना एने क भलमानुस लोग छोड़ावत लउकल. रात खा दस बजे, का बाद जब हमनी का जाम मे फँसल रहनी जा, त उहां के पब्लिक वालंटियर बन के जाम छोड़वलस. आगा त पुणे वाली शानदार एक्सप्रेसवे मिल गइल आ हमनी का थाकल मानल, बाकि तृप्त मन घरे पहुंचलीं जा.

(31 अगस्त 2015)

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