भोजपुरी साहित्य के बड़हन थाती अँजोरिया पर

आजु ढेर दिन बाद अपना भोजपुरी अन्तरताना अँजोरिया पर आवे के मौका मिलल त कुछ खुशी मिलल. बाकिर साथही अफसोसो भइल कि भोजपुरी साहित्य के थाती के एगो बड़हन हिस्सा अपना अँचरा में समेटले आ भोजपुरी में पहिलका अन्तरताना होखे के सौभाग्य पवले अँजोरिया के हालत आह बुढ़िया माई जइसन हो गइल बा जवना के बालबच्चा घर का एगो कोना में फेंक अपना बाकी काम में अझूराइल बाड़ें.

साँच कहीं त अब जाँगर थाके लागल बा आ केहू लउकत नइखे जेकरा पर अँजोरिया के देखभाल सँउपल जा सके.

बाकिर इहो साँचे बा कि अबहियों रोज नाहियों त तीन सौ भोजपुरी प्रेमी एह अन्तरताना पर आवत रहेलें. साथही करीब साढ़े आठ हजार लोग एकरा के सब्सक्राइबो कइले बा.

अँजोरिया के राउर सहयोग एही तरह हमेशा मिलत रहो, अइसने कामना बा.

चलत-चलत बतावत चाहत बानी कि भोजपुरी पत्रिकन आ किताबन के एगो बड़हन संग्रह के अद्यतन कइनी ह. देखीं सभे आ एकरा के अउरो पुरहर बनावे में आपन राय-विचार दीं सभे.